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फाइलेरिया से निपटने के लिए चलेगा विशेष अभियान
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कन्नौज। फाइलेरिया रोग की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग 21 दिसंबर से दस दिनों तक जिलेभर में विशेष अभियान चलाएगा। इस दौरान घर-घर जाकर फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। दवा भी खिलाई जाएगी।
बुधवार को सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप और डॉ. केसी राय ने प्रेसवार्ता करते हुए अभियान के बारे में जानकारी दी। सीएमओ ने बताया कि 21 दिसंबर से आठ जनवरी तक पूरे जिले में एक साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एमपीडब्ल्यू, एएनएम, आशा एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं के माध्यम से दवा खिलाने का कार्य घर-घर जाकर किया जाएगा। इसके बाद भी जो व्यक्ति दवा सेवन से वंचित रह जाएंगे, वह अपने पास के उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल, मलेरिया कार्यालय से दवा प्राप्त कर सेवन कर सकते हैं। फाइलेरिया रोग में अक्सर हाथ या पैर में ज्यादा सूजन हो जाती है। इससे इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। जी मिचलाना, उल्टी आना, हल्का बुखार आना, चक्कर आना और घबराना इसके लक्षण है।
कैसे होता है फाइलेरिया रोग
फाइलेरिया की बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। इस मच्छर के पनपने में मल, नालियों और गड्ढों का गंदा पानी मददगार होता है । क्यूलेक्स मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता तो वह फाइलेरिया के छोटे कृमि का लार्वा अंदर पहुंचा देता है। संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रूप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।
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बुधवार को सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप और डॉ. केसी राय ने प्रेसवार्ता करते हुए अभियान के बारे में जानकारी दी। सीएमओ ने बताया कि 21 दिसंबर से आठ जनवरी तक पूरे जिले में एक साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एमपीडब्ल्यू, एएनएम, आशा एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं के माध्यम से दवा खिलाने का कार्य घर-घर जाकर किया जाएगा। इसके बाद भी जो व्यक्ति दवा सेवन से वंचित रह जाएंगे, वह अपने पास के उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल, मलेरिया कार्यालय से दवा प्राप्त कर सेवन कर सकते हैं। फाइलेरिया रोग में अक्सर हाथ या पैर में ज्यादा सूजन हो जाती है। इससे इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। जी मिचलाना, उल्टी आना, हल्का बुखार आना, चक्कर आना और घबराना इसके लक्षण है।
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कैसे होता है फाइलेरिया रोग
फाइलेरिया की बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। इस मच्छर के पनपने में मल, नालियों और गड्ढों का गंदा पानी मददगार होता है । क्यूलेक्स मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता तो वह फाइलेरिया के छोटे कृमि का लार्वा अंदर पहुंचा देता है। संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रूप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।
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