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Kannauj News: सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में करोड़ों के गोलमाल की आशंका, डीएम ने मांगी रिपोर्ट
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कन्नौज। शहर में बनाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में करोड़ों रुपये के गोलमाल की आशंका व्यक्त की जा रही है। प्लांट के लिए छह साल पहले 89 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसमें सीवर लाइन डालने में 86 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और अब जल निगम के अधिकारी इसके लिए बजट की मांग कर रहे हैं। डीएम ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट जल निगम से तलब की है और नगर विकास विभाग सहित जल निगम के आला अधिकारियों को पत्र भेजा है।
शहर की आबादी को सीवर लाइन से जोड़कर ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करने की कवायद छह साल पहले शुरू की गई थी। इसके लिए शासन स्तर से 89 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। कार्यदायी संस्था जल निगम ने नगर में सीवर लाइन डाली और उसमें 86 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इस सीवर लाइन में शहर के 22 हजार घरों को जोड़ना था, जिसके सापेक्ष केवल 6000 घरों को ही जोड़ा जा सका है।
सीवर लाइन भी जगह-जगह चोक हो गई, जिससे मलबा ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहा था। अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो जल निगम के अधिकारियों की तंद्रा टूटी। कानपुर से जेटिंग मशीन को लाकर सीवर लाइन खुलवाने की कवायद शुरू की गई, लेकिन मेनहोल ऊपर तक भरे होने के कारण यह मशीन भी खराब हो गई।
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इसके बाद अधिकारियों ने गटर में मजदूरों को उतारकर सीवर लाइन खुलवाने का प्रयास किया तो उसमें भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी और काम वहीं रुक गया। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कार्यदायी संस्था से रिपोर्ट तलब की। जल निगम के अधिकारियों ने सीवर लाइन खुलवाने के लिए और अधिक बजट की मांग की तो डीएम ने पहले दी गई धनराशि का ब्यौरा मांग दिया। इसकी शासन स्तर से जांच कराई जाएगी।
इनसेट
अधूरे शेखाना नाले की भी होगी जांच
जल निगम ने शहर के सभी नालों को जोड़ने के लिए एक प्लान तैयार किया था, लेकिन वह भी धरातल पर साकार नहीं हो सका। शेखाना नाले को सदिकापुर गांव में अधूरा छोड़ दिया गया। परिणाम यह हुआ कि नाले का गंदा पानी गांव के चारों तरफ भर गया। इसमें करीब 250 बीघा खेती डूब गई। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज तिर्वा की टीम ने जब इसकी जांच की तो पता चला कि आगे 25 सेमी की ऊंचाई है, जिससे पानी क्रॉस नहीं हो सकता है। ऐसी स्थिति में गांव के लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। डीएम ने बताया कि इसकी भी जांच कराई जाएगी।
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शहर की आबादी को सीवर लाइन से जोड़कर ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करने की कवायद छह साल पहले शुरू की गई थी। इसके लिए शासन स्तर से 89 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। कार्यदायी संस्था जल निगम ने नगर में सीवर लाइन डाली और उसमें 86 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इस सीवर लाइन में शहर के 22 हजार घरों को जोड़ना था, जिसके सापेक्ष केवल 6000 घरों को ही जोड़ा जा सका है।
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सीवर लाइन भी जगह-जगह चोक हो गई, जिससे मलबा ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहा था। अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो जल निगम के अधिकारियों की तंद्रा टूटी। कानपुर से जेटिंग मशीन को लाकर सीवर लाइन खुलवाने की कवायद शुरू की गई, लेकिन मेनहोल ऊपर तक भरे होने के कारण यह मशीन भी खराब हो गई।
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इसके बाद अधिकारियों ने गटर में मजदूरों को उतारकर सीवर लाइन खुलवाने का प्रयास किया तो उसमें भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी और काम वहीं रुक गया। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कार्यदायी संस्था से रिपोर्ट तलब की। जल निगम के अधिकारियों ने सीवर लाइन खुलवाने के लिए और अधिक बजट की मांग की तो डीएम ने पहले दी गई धनराशि का ब्यौरा मांग दिया। इसकी शासन स्तर से जांच कराई जाएगी।
इनसेट
अधूरे शेखाना नाले की भी होगी जांच
जल निगम ने शहर के सभी नालों को जोड़ने के लिए एक प्लान तैयार किया था, लेकिन वह भी धरातल पर साकार नहीं हो सका। शेखाना नाले को सदिकापुर गांव में अधूरा छोड़ दिया गया। परिणाम यह हुआ कि नाले का गंदा पानी गांव के चारों तरफ भर गया। इसमें करीब 250 बीघा खेती डूब गई। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज तिर्वा की टीम ने जब इसकी जांच की तो पता चला कि आगे 25 सेमी की ऊंचाई है, जिससे पानी क्रॉस नहीं हो सकता है। ऐसी स्थिति में गांव के लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। डीएम ने बताया कि इसकी भी जांच कराई जाएगी।