{"_id":"65d3c1a26ff5866cd7068bc6","slug":"farmers-house-and-courtyard-smelling-of-marigold-flowers-kannauj-news-c-214-1-knj1003-109597-2024-02-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: गेंदा के फूलों से महक रहा किसान का घर-आंगन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: गेंदा के फूलों से महक रहा किसान का घर-आंगन
Tue, 20 Feb 2024 02:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 20 Feb 2024 02:31 AM IST
विज्ञापन
तिर्वा। बदलते समय के साथ ही अब खेती किसानी में भी बदलाव आ रहा है। किसान अब सामान्य फसलों की जगह फूलों और सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। जिससे वह कम लागत में अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। फूल किसानों के घर-आंगन को महका रहे हैं और आमदनी भी दोगुनी कर रहे हैं।
तिर्वा तहसील क्षेत्र के बौरापुर गांव निवासी सरनाम सिंह राजपूत कृषक ने परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती की शुरुआत की है। किसान ने बताया कि पिछले साल नवंबर के महीने में डेढ़ बीघा जमीन पर गेंदा के फूल की खेती करने के लिए कानपुर कृषि विद्यालय से पौध लाए थे। यह खेती उनके लिए सब्जी और अन्य किसी भी सामान्य फसलों की तुलना में ज्यादा लाभकारी साबित हो रही है। किसान ने बताया कि ज्यादातर फूल की खरीदारी कानपुर समेत अन्य जिलों से की जाती है। फूल विक्रेताओं को यहीं पर उसी भाव में फूल मिलने से उनकी भी आमदनी बढ़ गई है।
इनसेट
साल में दो बार होता है गेंदा का उत्पादन
किसान ने बताया कि ये फसल वर्ष में दो बार की जा सकती है। पहली फसल नवंबर से मार्च और दूसरी मार्च से अक्तूबर तक तैयार हो जाती है। इसी वजह से यह अधिक मुनाफे वाली खेती है। गेंदा फूल तैयार होने के बाद वह उसे लोकल तिर्वा मंडी के अलावा कन्नौज मंडी में बिक्री कर देते हैं। जहां पर फूल 60 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाता है। पिछले तीन माह में हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर चुके हैं।
विज्ञापन
इनसेट
मुनाफा ज्यादा लागत है कम
किसान ने बताया कि गेंदा फूल की खेती करने में लागत बहुत ही कम लगती है। अन्य फसलों की अपेक्षा फूलों की खेती करने में आय बढ़ गई है। फूल की खेती करने में खेत की उर्वरक क्षमता में कोई भी असर नहीं पड़ता है। क्योंकि फसल की पैदावार करने के लिए कोई भी कीटनाशक दवा का उपयोग नहीं किया जाता है।
विज्ञापन
तिर्वा तहसील क्षेत्र के बौरापुर गांव निवासी सरनाम सिंह राजपूत कृषक ने परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती की शुरुआत की है। किसान ने बताया कि पिछले साल नवंबर के महीने में डेढ़ बीघा जमीन पर गेंदा के फूल की खेती करने के लिए कानपुर कृषि विद्यालय से पौध लाए थे। यह खेती उनके लिए सब्जी और अन्य किसी भी सामान्य फसलों की तुलना में ज्यादा लाभकारी साबित हो रही है। किसान ने बताया कि ज्यादातर फूल की खरीदारी कानपुर समेत अन्य जिलों से की जाती है। फूल विक्रेताओं को यहीं पर उसी भाव में फूल मिलने से उनकी भी आमदनी बढ़ गई है।
विज्ञापन
इनसेट
साल में दो बार होता है गेंदा का उत्पादन
किसान ने बताया कि ये फसल वर्ष में दो बार की जा सकती है। पहली फसल नवंबर से मार्च और दूसरी मार्च से अक्तूबर तक तैयार हो जाती है। इसी वजह से यह अधिक मुनाफे वाली खेती है। गेंदा फूल तैयार होने के बाद वह उसे लोकल तिर्वा मंडी के अलावा कन्नौज मंडी में बिक्री कर देते हैं। जहां पर फूल 60 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाता है। पिछले तीन माह में हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर चुके हैं।
विज्ञापन
इनसेट
मुनाफा ज्यादा लागत है कम
किसान ने बताया कि गेंदा फूल की खेती करने में लागत बहुत ही कम लगती है। अन्य फसलों की अपेक्षा फूलों की खेती करने में आय बढ़ गई है। फूल की खेती करने में खेत की उर्वरक क्षमता में कोई भी असर नहीं पड़ता है। क्योंकि फसल की पैदावार करने के लिए कोई भी कीटनाशक दवा का उपयोग नहीं किया जाता है।