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अभिलेख के लिए किसानों ने किया प्रदर्शन
kannauj, uttar pradesh, india
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:16 AM IST
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एसडीएम को ज्ञापन देते किसान
- फोटो : amar ujala
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39 गांवों के जले हुए चकबंदी अभिलेखों को दुरुस्त कराने को लेकर किसानों में भी एकजुटता दिखने लगी है। तहसील दिवस में बुधवार को सैकड़ों किसानों ने पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया। प्रदर्शन में किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद यादव ने कहा कि कन्नौज जनपद जब फर्रुखाबाद में शामिल था तब फतेहगढ़ स्थित चकबंदी कार्यालय में हुए अग्निकांड में इस जनपद के भी 39 ग्रामों के अभिलेख जल गए थे।
इस बारे में किसान सेना ने वर्ष 2001, 2004 व 2013 में सरकार को अवगत कराया, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। इसके कारण इन गांवों के अंतिम अभिलेख तैयार नहीं हो पाने से नित्य नई समस्याएं पैदा हो रही हैं। जमीनों के वाजिब हस्तांतरण नहीं हो पा रहे हैं। दबंग लोग फर्जी बैनामा करवा कर कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। खरीदी गई जमीनों के दाखिल खारिज वर्षों से नहीं हो पाने के कारण भविष्य में उनके वारिसानों और विक्रेताओं से विवाद होने की संभावनाएं हैं।
इन गांवों के किसानों के बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। सहकारी समितियों से खाद बीज के लिए ऋण नहीं मिल पा रहा। वहीं सूखा राहत से भी किसान वंचित हैं। मृतकों के परिजनों की विरासत तक दर्ज नहीं हो पा रही है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि चकबंदी संचालक लखनऊ के 28 जनवरी 2009 का आदेश निरस्त करते हुए 27 जनवरी 2009 को जिस स्थिति में इन गांवों के चकबंदी अभिलेख थे, उसी को आधार मानकर अभिलेख तैयार कराए जाएं।
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इन गांवों के जिन किसानों के पास आकार पत्र 23 है, उनका मिलान कर उसी के अनुरूप किसानों को आकार पत्र 45 दिया जाए। 35 वर्षों से कब्जा दखल पाए किसानों ने अपने खेतों का विकास कर उन पर नलकूप, बोरिंग, कमरे, इमारतें आदि बना ली हैं। ऐसी स्थिति में चकबंदी धारा 6 (1) का प्रकाश नए विवाद को जन्म देगा। इस मौके पर शील कुमार हजेला, सुधीर कुमार हजेला, विनोद कुमार पांडेय, प्रतापसिंह यादव, रक्षपाल सिंह, बसंत सिंह व श्यामाचरण सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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इस बारे में किसान सेना ने वर्ष 2001, 2004 व 2013 में सरकार को अवगत कराया, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। इसके कारण इन गांवों के अंतिम अभिलेख तैयार नहीं हो पाने से नित्य नई समस्याएं पैदा हो रही हैं। जमीनों के वाजिब हस्तांतरण नहीं हो पा रहे हैं। दबंग लोग फर्जी बैनामा करवा कर कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। खरीदी गई जमीनों के दाखिल खारिज वर्षों से नहीं हो पाने के कारण भविष्य में उनके वारिसानों और विक्रेताओं से विवाद होने की संभावनाएं हैं।
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इन गांवों के किसानों के बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। सहकारी समितियों से खाद बीज के लिए ऋण नहीं मिल पा रहा। वहीं सूखा राहत से भी किसान वंचित हैं। मृतकों के परिजनों की विरासत तक दर्ज नहीं हो पा रही है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि चकबंदी संचालक लखनऊ के 28 जनवरी 2009 का आदेश निरस्त करते हुए 27 जनवरी 2009 को जिस स्थिति में इन गांवों के चकबंदी अभिलेख थे, उसी को आधार मानकर अभिलेख तैयार कराए जाएं।
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इन गांवों के जिन किसानों के पास आकार पत्र 23 है, उनका मिलान कर उसी के अनुरूप किसानों को आकार पत्र 45 दिया जाए। 35 वर्षों से कब्जा दखल पाए किसानों ने अपने खेतों का विकास कर उन पर नलकूप, बोरिंग, कमरे, इमारतें आदि बना ली हैं। ऐसी स्थिति में चकबंदी धारा 6 (1) का प्रकाश नए विवाद को जन्म देगा। इस मौके पर शील कुमार हजेला, सुधीर कुमार हजेला, विनोद कुमार पांडेय, प्रतापसिंह यादव, रक्षपाल सिंह, बसंत सिंह व श्यामाचरण सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।