{"_id":"5f020e298ebc3e430f3f811a","slug":"dm-order-kannauj-news-knp569505578","type":"story","status":"publish","title_hn":"समूह की 500 महिलाएं सिलेंगी यूनिफार्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समूह की 500 महिलाएं सिलेंगी यूनिफार्म
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कन्नौज। कोरोना संक्रमण से चल रही जंग में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को काम देने पर जोर दिया जा रहा है। इस क्रम में जिले की करीब 500 महिलाओं को करीब 2,93,220 छात्र-छात्राओं की यूनिफार्म सिलने का काम मिलेगा। इससे समूह की महिलाओं को घर बैठे जहां काम मिलेगा वहीं शासन की बाहरी कंपनी पर निर्भरता खत्म होगी।
देशभर में कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और स्वयं सहायता समूह को काम देने की पहल शुरू की गई है। उन्हें परिषदीय स्कूलों के बच्चों की यूनिफार्म की सिलाई और आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस क्रम में जिले के 50 स्वयं सहायता समूहों की 500 महिला सदस्यों को सिलाई का काम मिलेगा।
समूह की महिलाएं बच्चों की नाप लेने घर-घर जा रहीं हैं। डीसी एनआरएलएम धर्मेद्र यादव ने बताया कि इसके लिए विकास खंड कन्नौज समेत उमर्दा, गुगरापुर, तालग्राम, सौरिख आदि महिलाओं के समूहों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। अन्य ब्लाकों की महिलाएं पहले से ही प्रशिक्षित की जा चुकी हैं।
विज्ञापन
डीएम राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों व उनके साथ लौटी महिला सदस्यों को उनके गांव के निकट ही रोजगार प्रदान किया जाए। इसी के तहत समूह की महिलाओं को ड्रेस सिलाई का काम दिया जाएगा।
हर साल दी जाती हैं दो-दो जोड़ी यूनिफार्म : बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रति वर्ष दो-दो जोड़ी यूनिफार्म दी जाती है। इसके लिए सरकार प्रति जोड़ी 200 रुपये बजट देती है। इसके बावजूद चयनित कंपनी बच्चों को सही समय और नाप की यूनिफार्म उपलब्ध नहीं करा पाती। ऐसे में समूह की महिलाएं ये जिम्मेदारी निभाएंगी।
विज्ञापन
देशभर में कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और स्वयं सहायता समूह को काम देने की पहल शुरू की गई है। उन्हें परिषदीय स्कूलों के बच्चों की यूनिफार्म की सिलाई और आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस क्रम में जिले के 50 स्वयं सहायता समूहों की 500 महिला सदस्यों को सिलाई का काम मिलेगा।
विज्ञापन
समूह की महिलाएं बच्चों की नाप लेने घर-घर जा रहीं हैं। डीसी एनआरएलएम धर्मेद्र यादव ने बताया कि इसके लिए विकास खंड कन्नौज समेत उमर्दा, गुगरापुर, तालग्राम, सौरिख आदि महिलाओं के समूहों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। अन्य ब्लाकों की महिलाएं पहले से ही प्रशिक्षित की जा चुकी हैं।
विज्ञापन
डीएम राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों व उनके साथ लौटी महिला सदस्यों को उनके गांव के निकट ही रोजगार प्रदान किया जाए। इसी के तहत समूह की महिलाओं को ड्रेस सिलाई का काम दिया जाएगा।
हर साल दी जाती हैं दो-दो जोड़ी यूनिफार्म : बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रति वर्ष दो-दो जोड़ी यूनिफार्म दी जाती है। इसके लिए सरकार प्रति जोड़ी 200 रुपये बजट देती है। इसके बावजूद चयनित कंपनी बच्चों को सही समय और नाप की यूनिफार्म उपलब्ध नहीं करा पाती। ऐसे में समूह की महिलाएं ये जिम्मेदारी निभाएंगी।