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Kannauj News: धनस्टिन दवा पर लगा प्रतिबंध
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कन्नौज। यूपी के कन्नौज समेत कई जिलों में आलू बीज को नुकसान पहुंचाने वाले धनस्टिन दवा की बिक्री व उत्पादन पर प्रतिबंध लग गया है। अकेले कन्नौज में ही करीब 1900 बीघे में आलू की फसल नहीं उगी थी।
किसानों की समस्या को देखते हुए अमर उजाला ने आठ नवंबर के अंक में गलत दवा के प्रयोग से एक हजार बीघे रकबे में आलू की फसल न उगने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। बाद में यह रकबा बढ़ता गया। खबरों का संज्ञान लेने के बाद प्रदेश के कृषि निदेशक विवेक सिंह ने आलू बीज के नुकसान की हकीकत परखने के लिए टीम गठित कर दी थी। 15 नवंबर को कानपुर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक महेंद्र सिंह, चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय कानपुर से वैज्ञानिक डॉ. विश्वास, डीडी कृषि कन्नौज जीसी कटियार, जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह और जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी ने जांच की थी। इसमें धनस्टिन दवा को गलत ठहराया गया था। यह दवा मेरठ एग्रो केमिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की है।
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बयान
कन्नौज में जो जांच कमेटी आई थी, उसमें धनस्टिन दवा कंपनी से आलू बीज न उगने की पुष्टि हुई थी। कमेटी में शामिल सभी अधिकारियों ने दवा कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए लिखा था। उसके बाद निदेशक ने निर्माण व बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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--जीसी कटियार, उप कृषि निदेशक
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धनस्टिन दवा कंपनी के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा गया है। बाजार में जो भी धनस्टिन दवा बची है, उसे हटाने को भी कहा गया है। जांच के लिए सैंपल गया था, उसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। फिलहाल दवा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। इस दवा से कन्नौज समेत कई जिलों में आलू बीज को नुकसान हुआ था।
--अविशांक सिंह चौहान, प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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कंपनी ने 50 लीटर ही दवा बिक्री करने का भेजा था जवाब
जनपद में सैकड़ों लीटर धनस्टिन दवा बिक्री हो गई, लेकिन कंपनी ने अधिकारियों को 50 लीटर ही दवा बिक्री करने का पत्र भेजा था। उससे पहले जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह ने कई बार संपर्क साधा, लेकिन अधिकारियों ने फोन पर बात तक नहीं की थी। ई-मेल का भी जवाब नहीं दिया। कई दिनों बाद कंपनी ने 50 लीटर दवा बिक्री करने की बात स्वीकार की।
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किसानों की समस्या को देखते हुए अमर उजाला ने आठ नवंबर के अंक में गलत दवा के प्रयोग से एक हजार बीघे रकबे में आलू की फसल न उगने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। बाद में यह रकबा बढ़ता गया। खबरों का संज्ञान लेने के बाद प्रदेश के कृषि निदेशक विवेक सिंह ने आलू बीज के नुकसान की हकीकत परखने के लिए टीम गठित कर दी थी। 15 नवंबर को कानपुर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक महेंद्र सिंह, चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय कानपुर से वैज्ञानिक डॉ. विश्वास, डीडी कृषि कन्नौज जीसी कटियार, जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह और जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी ने जांच की थी। इसमें धनस्टिन दवा को गलत ठहराया गया था। यह दवा मेरठ एग्रो केमिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की है।
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बयान
कन्नौज में जो जांच कमेटी आई थी, उसमें धनस्टिन दवा कंपनी से आलू बीज न उगने की पुष्टि हुई थी। कमेटी में शामिल सभी अधिकारियों ने दवा कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए लिखा था। उसके बाद निदेशक ने निर्माण व बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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--जीसी कटियार, उप कृषि निदेशक
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धनस्टिन दवा कंपनी के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा गया है। बाजार में जो भी धनस्टिन दवा बची है, उसे हटाने को भी कहा गया है। जांच के लिए सैंपल गया था, उसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। फिलहाल दवा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। इस दवा से कन्नौज समेत कई जिलों में आलू बीज को नुकसान हुआ था।
--अविशांक सिंह चौहान, प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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कंपनी ने 50 लीटर ही दवा बिक्री करने का भेजा था जवाब
जनपद में सैकड़ों लीटर धनस्टिन दवा बिक्री हो गई, लेकिन कंपनी ने अधिकारियों को 50 लीटर ही दवा बिक्री करने का पत्र भेजा था। उससे पहले जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह ने कई बार संपर्क साधा, लेकिन अधिकारियों ने फोन पर बात तक नहीं की थी। ई-मेल का भी जवाब नहीं दिया। कई दिनों बाद कंपनी ने 50 लीटर दवा बिक्री करने की बात स्वीकार की।