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राशन बरामदगी के मामले में पूर्ति विभाग पर भी उठे सवाल
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
तिर्वा(कन्नौज)। कोतवाली क्षेत्र के हंसापुर गांव में एक गल्ला आढ़ती की गोदाम में शनिवार की देर शाम एसडीएम शालिनी प्रभाकर के मारे गए छापे के दौरान अभी तक तिर्वा तहसील की सबसे बड़ी काला बाजारी का मामला सामने आया है। छापे के दौरान सरकारी राशन की 2710 बोरियां गेहूं व चावल से भरी हुई बरामद हुई थी। इतनी बड़ी बरामदगी ने तिर्वा तहसील की राशन वितरण प्रणाली की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है।
राशन वितरण प्रणाली की व्यवस्था को मौजूद जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद ने चौकस बनाने के लिए राशन उठान व वितरण के दौरान सत्यापन के लिए एसडीएम, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी को लगाया था। इन अफसरों के सत्यापन के बाद ही गोदाम से राशन कोटेदारों को वितरण किया जाता है। कोटेदारों के भी राशन वितरण के दौरान क्षेत्रीय लेखपालों की टीम के अलावा ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव वितरण का सत्यापन करते हैं।
इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर आखिर कोेटे का राशन गल्ला आढ़तियों के पास कैसे पहुंच रहा है, यह प्रश्न आम जनमानस के गले नहीं उतर रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान तिर्वा मंडी मे ही दो जगह छापे मारे गए थे। दोनो स्थानों पर राशन का माल मिला था। बड़ी मात्रा में हंसापुर में मिले सरकारी राशन से पूर्ति विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहा है। वितरण का सत्यापन करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के तर्क को सही मान लिया जाए तो सवाल उठता है कि आखिर कोटेदार किस तरह से राशन को ब्लैक में गल्ला आढ़तियों को बिक्री कर रहा है। जब एसडीएम शालिनी प्रभाकर से सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि राशन कोटेदारों व पूर्ति विभाग की कार्य प्रणाली को लेकर भी जांच कराई जाएगी। मामले में जो भी कर्मचारी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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- उठान से लेकर वितरण तक अफसर व कर्मचारी रजिस्टरों का करते हैं सत्यापन
- सत्यापन के बावजूद भी ब्लैक हो जाता सरकारी राशन
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तिर्वा(कन्नौज)। कोतवाली क्षेत्र के हंसापुर गांव में एक गल्ला आढ़ती की गोदाम में शनिवार की देर शाम एसडीएम शालिनी प्रभाकर के मारे गए छापे के दौरान अभी तक तिर्वा तहसील की सबसे बड़ी काला बाजारी का मामला सामने आया है। छापे के दौरान सरकारी राशन की 2710 बोरियां गेहूं व चावल से भरी हुई बरामद हुई थी। इतनी बड़ी बरामदगी ने तिर्वा तहसील की राशन वितरण प्रणाली की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है।
राशन वितरण प्रणाली की व्यवस्था को मौजूद जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद ने चौकस बनाने के लिए राशन उठान व वितरण के दौरान सत्यापन के लिए एसडीएम, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी को लगाया था। इन अफसरों के सत्यापन के बाद ही गोदाम से राशन कोटेदारों को वितरण किया जाता है। कोटेदारों के भी राशन वितरण के दौरान क्षेत्रीय लेखपालों की टीम के अलावा ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव वितरण का सत्यापन करते हैं।
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इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर आखिर कोेटे का राशन गल्ला आढ़तियों के पास कैसे पहुंच रहा है, यह प्रश्न आम जनमानस के गले नहीं उतर रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान तिर्वा मंडी मे ही दो जगह छापे मारे गए थे। दोनो स्थानों पर राशन का माल मिला था। बड़ी मात्रा में हंसापुर में मिले सरकारी राशन से पूर्ति विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहा है। वितरण का सत्यापन करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के तर्क को सही मान लिया जाए तो सवाल उठता है कि आखिर कोटेदार किस तरह से राशन को ब्लैक में गल्ला आढ़तियों को बिक्री कर रहा है। जब एसडीएम शालिनी प्रभाकर से सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि राशन कोटेदारों व पूर्ति विभाग की कार्य प्रणाली को लेकर भी जांच कराई जाएगी। मामले में जो भी कर्मचारी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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- सत्यापन के बावजूद भी ब्लैक हो जाता सरकारी राशन