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कर्ज में डूबे किसान ने फांसी लगाकर जान दी

Kanpur Bureau Updated Mon, 10 Sep 2018 12:09 AM IST
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नजरापुर/कन्नौज। सदर कोतवाली क्षेत्र के मक्कापुरवा में साहूकारों के कर्ज में डूबे किसान ने शनिवार को फांसी लगाकर जान दे दी। उसने बेटों की शादी और मां के इलाज के लिए कर्ज लिया था। करीब दो लाख कर्ज चुकाने के लिए साहूकार दबाव डाल रहे थे। सूचना पर शहर कोतवाली पुलिस और फारेंसिक टीम ने मौके पर जांच पड़ताल की।
सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव मक्कापुरवा निवासी राम प्रसाद (50) के नाम एक बीघा खेती है। उसने बेटों की शादी के लिए वर्ष 2002 में गदनापुर निवासी साहूकार के पास खेती 40 हजार रुपये में गिरवी रख दी थी। वह दूसरों के खेत बटाई पर लेकर खेतीबाड़ी करता था। एक बेटा मूक बधिर भी है। मूक बधिर बेटे और वर्ष 2008 में सड़क हादसे में घायल ग्राम प्रधान मां के इलाज में राम प्रसाद पर करीब दो लाख का कर्ज हो गया था।


साहूकार और अन्य देनदारकर्ज वापसी के लिए दबाव बना रहे थे। इससे राम प्रसाद परेशान रहता था। शनिवार रात को उसने दरवाजे के सामने रखे छप्पर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बेटे नीलू की सूचना पर सदर कोतवाल एके सिंह और फारेंसिक ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की। सदर एसडीएम महेंद्र कुमार ने बताया कि बैठक के चलते जनपद से बाहर हूं। लौटने पर मामले की जानकारी कर परिवार को नियमानुसार सहायता दिलवाऊंगा।


धीरे-धीरे कर्ज में फंसता गया राम प्रसाद
कन्नौज। बेटों की शादी और मां का इलाज कराने में राम प्रसाद पर कर्ज हो गया। बेटों की शादी के लिए 16 वर्ष पहले गिरवी रखे एक बीघा खेत को उसने नहीं छुड़ा पाया। मंहगाई के दौर में वह धीरे-धीरे कर्ज के भंवर में फंसता रहा। इससे तनाव में आकर उसने फांसी लगाकर जान दे दी।
सदर कोतवाली क्षेत्र के मक्कापुरवा निवासी राम प्रसाद के पांच बेटे और एक बेटी है। वर्ष 2001 में बेटी रूबी की शादी की। इसके अगले साल (2002) में दो बेटों नीलू व शीलू की एक साथ शादी की थी। बेटों की शादी के लिए ही उसने साहूकार के पास 40 हजार रुपये में एक बीघा खेत गिरवी रख दिया था। तीन अन्य बेटे धीरू, चंदन और श्याम जी हैं। मूकबधिर धीरू के इलाज में भी काफी पैसा खर्च हुआ। वर्ष 2007 में राम प्रसाद की मां पितक देवी गांव की प्रधान चुनी गईं। वर्ष 2008 में पितक देवी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं। कानपुर के निजी अस्पताल में मां का इलाज कराने के लिए फिर राम प्रसाद ने कर्ज किया लेकिन मां को बचा नहीं पाया। राम प्रसाद बटाई पर खेती करने के साथ मजदूरी भी करता था। उसके बेटे भी मजदूरी करते हैं। कर्ज में दबे रामप्रसाद 16 साल बाद भी गिरवी खेत साहूकार से छुड़ा नहीं पाया था। पत्नी रामबेटी ने बताया साहूकार पैसे लौटने का दबाव बना रहे थे। इससे पति काफी दिनों से परेशान चल रहे थे।

कर्ज में डूबे किसान ने फांसी लगाकर जान दी
बेटों की शादी के लिए गिरवी रखी थी एक बीघा जमीन
घायल मां का इलाज कराने में भी हो गया था काफी कर्ज
अमर उजाला ब्यूरो

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