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Kannauj News: मिट्टी से बनी गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति के साथ कुबेर की मांग
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छिबरामऊ। दीपावली पर पूजन के लिए मिट्टी से बने गणेश लक्ष्मी की मूर्ति के साथ कुबेर व धन्वंतरि की मांग रही। बाजार में 150 से 2000 रुपये की मिट्टी से बने गणेश लक्ष्मी की मूर्ति मौजूद थीं। साथ ही खील खिलौने व झाड़ू की भी बिक्री हुई।
दीपावली पर खील, खिलौना व गट्टा 80 रुपये किलोग्राम में बिका। वहीं फूल झाड़ू 80 से 120, प्लास्टिक की झाड़ू 120 से 200 रुपये, नारियल झाड़ू 50 से 80 रुपये में बिक्री हुई। महंगाई केवल फूलों की लड़ियों पर थी। एक किलोग्राम गेंदा के फूलों की लड़ी 180 से 250 रुपये किलो में बिका। सोमवार को बड़ी दीपावली पर इसके दाम और अधिक बढ़ने के आसार हैं। सजावटी सामान की दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं व युवतियां की खासी भीड़ रहीं। मूर्ति विक्रेता सीताराम गुप्ता व मनोज बाथम ने बताया कि इस बार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की बजाय मिट्टी से बनी गणेश लक्ष्मी की मूर्ति की ज्यादा मांग रही। साथ ही कुबेर जी व धन्वंतरि की भी मूर्ति खूब बिकी।
डिजायनर दीपकों ने लुभाया
प्रकाश पर्व पर दीपकों को खासा महत्व है। इस बार बिक्री के लिए देशी दीयों के साथ पग पग पर डिजायनर दीपकों की दुकानें सजाई गई थीं। अकबरपुर निवासी कुंभकार राजकिशोर प्रजापति ने बताया कि हस्तनिर्मित देशी दीया व डिजायनर दीयों के समान रेट पर होने के कारण लोगों को डिजायनर दिए ज्यादा रास आए। ऐसी स्थिति में देशी दीपकों की दुकानें सजाए कुंभकारों को ग्राहकों का इंतजार करना पड़ा।
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दीपावली पर खील, खिलौना व गट्टा 80 रुपये किलोग्राम में बिका। वहीं फूल झाड़ू 80 से 120, प्लास्टिक की झाड़ू 120 से 200 रुपये, नारियल झाड़ू 50 से 80 रुपये में बिक्री हुई। महंगाई केवल फूलों की लड़ियों पर थी। एक किलोग्राम गेंदा के फूलों की लड़ी 180 से 250 रुपये किलो में बिका। सोमवार को बड़ी दीपावली पर इसके दाम और अधिक बढ़ने के आसार हैं। सजावटी सामान की दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं व युवतियां की खासी भीड़ रहीं। मूर्ति विक्रेता सीताराम गुप्ता व मनोज बाथम ने बताया कि इस बार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की बजाय मिट्टी से बनी गणेश लक्ष्मी की मूर्ति की ज्यादा मांग रही। साथ ही कुबेर जी व धन्वंतरि की भी मूर्ति खूब बिकी।
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डिजायनर दीपकों ने लुभाया
प्रकाश पर्व पर दीपकों को खासा महत्व है। इस बार बिक्री के लिए देशी दीयों के साथ पग पग पर डिजायनर दीपकों की दुकानें सजाई गई थीं। अकबरपुर निवासी कुंभकार राजकिशोर प्रजापति ने बताया कि हस्तनिर्मित देशी दीया व डिजायनर दीयों के समान रेट पर होने के कारण लोगों को डिजायनर दिए ज्यादा रास आए। ऐसी स्थिति में देशी दीपकों की दुकानें सजाए कुंभकारों को ग्राहकों का इंतजार करना पड़ा।
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