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दवा से एक हजार बीघा में नहीं उगा आलू
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फोटो:11- इसवापुर गांव में आलू बीज उखाड़कर देखते किसान घसीटेलाल। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। सूखा, बारिश से तबाह हुए किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो रहीं हैं। किसानों को आलू की फसल से आस थी, लेकिन उसमें फिर से नुकसान हो गया। बीज शोधन के लिए खरीदकर लगाई दवा नुकसान कर गई और खेतों में आलू उगा ही नहीं। करीब एक हजार बीघा से अधिक रकबे में आलू न उगने से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान किसानों को हुआ है। हालांकि अधिकारियों की जांच में लागत और रकबा और भी बढ़ सकता है।
ब्लॉक सदर क्षेत्र के गांव रामपुर मुडेरी काजिम हुसैन निवासी राजू सक्सेना ने बताया कि उन्होंने करीब 20 दिन पहले ढाई बीघा रकबे में आलू बीज की गढ़ाई की थी। अब तक मिट्टी के बाहर किल्ला नहीं फूटा है। गांव में करीब दो सौ बीघा ऐसी फसल होगी, जिसमें नुकसान हुआ है।
राजू का तर्क है कि आसपास के कई गांवों में 1600 बीघा फसल को नुकसान हुआ होगा। मानीमऊ के दुकानदार ने 80 लीटर दवा ऐसी बिक्री की थी, जिसका इस्तेमाल आठ हजार बोरी आलू बीज में किया गया है। एक बीघा जमीन में पांच से छह बोरी आलू बीज का इस्तेमाल होता है।
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राजू का कहना है कि रामपुर मुडेरी राजा, गुखरू, कपूरापुर, नेरा, बंसरामऊ, तिखवा, इसवापुर, जुराखनपुर्वा व दंदौराखुर्द आदि गांवों के कई किसानों ने नुकसान होने वाली दवा का प्रयोग किया है। किसान प्रेमचंद्र ने बताया कि तीन बीघा जमीन में लगा आलू न उगने से 45 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। हरिशरन का कहना है कि साढ़े आठ बीघा में 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। इसी तरह रजनीश ने बताया कि पांच बीघा जमीन पर आलू न उगने से काफी नुकसान हुआ है।
जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह ने बताया कि चार-पांच किसान कार्यालय आए थे। उन्होंने आलू फसल न होने की शिकायत की है। वह किसानों के गांव में जांच करने जा रहे हैं। लिखित शिकायत, दवा खरीदने के बिल देने पर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
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ब्लॉक सदर क्षेत्र के गांव रामपुर मुडेरी काजिम हुसैन निवासी राजू सक्सेना ने बताया कि उन्होंने करीब 20 दिन पहले ढाई बीघा रकबे में आलू बीज की गढ़ाई की थी। अब तक मिट्टी के बाहर किल्ला नहीं फूटा है। गांव में करीब दो सौ बीघा ऐसी फसल होगी, जिसमें नुकसान हुआ है।
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राजू का तर्क है कि आसपास के कई गांवों में 1600 बीघा फसल को नुकसान हुआ होगा। मानीमऊ के दुकानदार ने 80 लीटर दवा ऐसी बिक्री की थी, जिसका इस्तेमाल आठ हजार बोरी आलू बीज में किया गया है। एक बीघा जमीन में पांच से छह बोरी आलू बीज का इस्तेमाल होता है।
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राजू का कहना है कि रामपुर मुडेरी राजा, गुखरू, कपूरापुर, नेरा, बंसरामऊ, तिखवा, इसवापुर, जुराखनपुर्वा व दंदौराखुर्द आदि गांवों के कई किसानों ने नुकसान होने वाली दवा का प्रयोग किया है। किसान प्रेमचंद्र ने बताया कि तीन बीघा जमीन में लगा आलू न उगने से 45 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। हरिशरन का कहना है कि साढ़े आठ बीघा में 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। इसी तरह रजनीश ने बताया कि पांच बीघा जमीन पर आलू न उगने से काफी नुकसान हुआ है।
जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह ने बताया कि चार-पांच किसान कार्यालय आए थे। उन्होंने आलू फसल न होने की शिकायत की है। वह किसानों के गांव में जांच करने जा रहे हैं। लिखित शिकायत, दवा खरीदने के बिल देने पर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।