{"_id":"64554591a52086d40a0a1917","slug":"city-of-fragrance-did-not-get-perfume-park-kannauj-news-c-12-1-217914-2023-05-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: खुशबू के शहर को नहीं मिला इत्र पार्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: खुशबू के शहर को नहीं मिला इत्र पार्क
Fri, 05 May 2023 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Fri, 05 May 2023 11:36 PM IST
विज्ञापन
कन्नौज। खुशबू के अनोखे काम के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले कन्नौज को एक अदद इत्र पार्क नहीं मिल सका है। पिछले सात साल से इस पर खूब सियासत होती रही है। हर बार इसे पूरा करने और शुरू करने की दुहाई दी जाती है। कागज पर काम तेजी से चलता है पर धरातल पर मामला सिफर है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान इस पर सियासत करने वाले नगर पालिका चुनाव में इस पर खामोश हैं।
खुशबू के कारोबार के लिए दुनिया में दो ही शहर मशहूर हैं। एक है फ्रांस का ग्रासे शहर, जहां परफ्यूम बनता है। दूसरा है भारत में कन्नौज शहर जहां इत्र बनता है। फ्रांस के ग्रासे में तैयार होने वाली खुशबू में रसायन और अल्कोहल का इस्तेमाल होता है, वहीं कन्नौज में तैयार होने वाला इत्र पूरी तरह से प्राकृतिक होता है। इसी खासियत की वजह कर इसे शरीर में लगाने के साथ ही खाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। शहर में छोटे-बड़े 300 से ज्यादा कारखाना होने के बावजूद कोई ऐसा ठिकाना नहीं है, जहां पर कारोबारी अपने उत्पाद को लोगों को दिखा सकें। बाहर से आने वाले ग्राहकों के लिए भी यहां कोई एक अदद प्लेटफार्म नहीं है, जहां उन्हें इत्र कारोबार की बुनियादी जानकारी के साथ ही उसे बाजार तक पहुंचाने की जानकारी बारीकी से मिल सके।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
सपा शासन में बना था खाका
समाजवादी पार्टी के शासनकाल में यहां वर्ष 2016 में परफ्यूम पार्क बनाने का खाका तैयार हुआ था। शहर और आसपास पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर इसे एक्सप्रेसवे किनारे ठठिया के पास बनाना तय हुआ था। उस जमाने में 100 एकड़ से ज्यादा जमीन चिन्हित की जा चुकी थी। काम भी शुरू हो गया था। बाद में मामला अटक गया। सरकार बदली तो मामला ठंडे बस्ते में चला गया। भाजपा के पहले पांच साल के कार्यकाल में मामला पूरी तरह से ठप रहा। दूसरी बार फिर से भाजपा का शासन आया तो परफ्यूम पार्क को लेकर जरूर हलचल हुई। उसे इत्र पार्क नाम दिया गया। 100 एकड़ जमीन की जगह 30 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ। हालांकि वहां काम शुरू कराया तो गया, लेकिन अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। जबकि अलग-अलग समय पर अलग-अलग तारीख का ऐलान करके उसे शुरू कराने की कई घोषणा हो चुकी है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -
बुनियादी सहूलियत की कमी से जी चुरा रहे इत्र कारोबारी
इत्र पार्क बनने की राह में सबसे बड़ी अड़चन इत्र कारोबारियों की दिलचस्पी का न होना है। इसके पीछे भी अहम वजह यह है कि प्रस्तावित इत्र पार्क में सिर्फ जमीन मुहैया कराने की बात है। इत्र तैयार करने के लिए सबसे अहम गैस पाइप लाइन और इत्र तैयार होने के बाद वाटर डिस्चार्ज को लेकर किसी तरह का खाका तैयार न होना है। जब भी इसे लेकर कोई बैठक होती है, इत्र कारोबारी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं, लेकिन मामला आश्वासन से आगे नहीं बढ़ता है। जब तक इत्र बनाने से जुड़ी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, वह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तो वहां कारोबार शिफ्ट करना जोखिम भरा और खर्चीला है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
इंडस्ट्रियल एरिया में भी सुविधा नदारद
शहर के पश्चिमी इलाके में जीटी रोड किनारे इंडस्ट्रियल एरिया है। वहां कई बड़े कारखानों में इत्र और एसेंसिशयल आयल बनाने का काम होता है। लेकिन वहां भी बुनियादी सुविधा नदरद है। न तो वहां की कोई सड़क बेहतर है, न ही जल निकासी की व्यवस्था है। गैस पाइप लाइन की सुविधा न होने से कारोबारी लकड़ी और कंडे को ही ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह काफी खर्चीला है।
-- -- -- -- -- -- -- -
एक नजर में कन्नौज का इत्र कारोबार
-350 से ज्यादा कारखाने हैं कन्नौज में
-25 बड़ी इंडस्ट्री में होता है इत्र बनाने का काम
-250-300 हैं इत्र के माइक्रो कारखाने
-60 से ज्यादा देशों में होता है इत्र का निर्यात
-30 फीसदी से ज्यादा का कारोबार विदेशी बाजार में
-20 हजार से ज्यादा किसान करते हैं फूलों की खेती
-5000 से ज्यादा कारीगर जुटे हैं कारखानों में
विज्ञापन
खुशबू के कारोबार के लिए दुनिया में दो ही शहर मशहूर हैं। एक है फ्रांस का ग्रासे शहर, जहां परफ्यूम बनता है। दूसरा है भारत में कन्नौज शहर जहां इत्र बनता है। फ्रांस के ग्रासे में तैयार होने वाली खुशबू में रसायन और अल्कोहल का इस्तेमाल होता है, वहीं कन्नौज में तैयार होने वाला इत्र पूरी तरह से प्राकृतिक होता है। इसी खासियत की वजह कर इसे शरीर में लगाने के साथ ही खाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। शहर में छोटे-बड़े 300 से ज्यादा कारखाना होने के बावजूद कोई ऐसा ठिकाना नहीं है, जहां पर कारोबारी अपने उत्पाद को लोगों को दिखा सकें। बाहर से आने वाले ग्राहकों के लिए भी यहां कोई एक अदद प्लेटफार्म नहीं है, जहां उन्हें इत्र कारोबार की बुनियादी जानकारी के साथ ही उसे बाजार तक पहुंचाने की जानकारी बारीकी से मिल सके।
विज्ञापन
सपा शासन में बना था खाका
समाजवादी पार्टी के शासनकाल में यहां वर्ष 2016 में परफ्यूम पार्क बनाने का खाका तैयार हुआ था। शहर और आसपास पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर इसे एक्सप्रेसवे किनारे ठठिया के पास बनाना तय हुआ था। उस जमाने में 100 एकड़ से ज्यादा जमीन चिन्हित की जा चुकी थी। काम भी शुरू हो गया था। बाद में मामला अटक गया। सरकार बदली तो मामला ठंडे बस्ते में चला गया। भाजपा के पहले पांच साल के कार्यकाल में मामला पूरी तरह से ठप रहा। दूसरी बार फिर से भाजपा का शासन आया तो परफ्यूम पार्क को लेकर जरूर हलचल हुई। उसे इत्र पार्क नाम दिया गया। 100 एकड़ जमीन की जगह 30 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ। हालांकि वहां काम शुरू कराया तो गया, लेकिन अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। जबकि अलग-अलग समय पर अलग-अलग तारीख का ऐलान करके उसे शुरू कराने की कई घोषणा हो चुकी है।
विज्ञापन
बुनियादी सहूलियत की कमी से जी चुरा रहे इत्र कारोबारी
इत्र पार्क बनने की राह में सबसे बड़ी अड़चन इत्र कारोबारियों की दिलचस्पी का न होना है। इसके पीछे भी अहम वजह यह है कि प्रस्तावित इत्र पार्क में सिर्फ जमीन मुहैया कराने की बात है। इत्र तैयार करने के लिए सबसे अहम गैस पाइप लाइन और इत्र तैयार होने के बाद वाटर डिस्चार्ज को लेकर किसी तरह का खाका तैयार न होना है। जब भी इसे लेकर कोई बैठक होती है, इत्र कारोबारी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं, लेकिन मामला आश्वासन से आगे नहीं बढ़ता है। जब तक इत्र बनाने से जुड़ी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, वह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तो वहां कारोबार शिफ्ट करना जोखिम भरा और खर्चीला है।
इंडस्ट्रियल एरिया में भी सुविधा नदारद
शहर के पश्चिमी इलाके में जीटी रोड किनारे इंडस्ट्रियल एरिया है। वहां कई बड़े कारखानों में इत्र और एसेंसिशयल आयल बनाने का काम होता है। लेकिन वहां भी बुनियादी सुविधा नदरद है। न तो वहां की कोई सड़क बेहतर है, न ही जल निकासी की व्यवस्था है। गैस पाइप लाइन की सुविधा न होने से कारोबारी लकड़ी और कंडे को ही ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह काफी खर्चीला है।
एक नजर में कन्नौज का इत्र कारोबार
-350 से ज्यादा कारखाने हैं कन्नौज में
-25 बड़ी इंडस्ट्री में होता है इत्र बनाने का काम
-250-300 हैं इत्र के माइक्रो कारखाने
-60 से ज्यादा देशों में होता है इत्र का निर्यात
-30 फीसदी से ज्यादा का कारोबार विदेशी बाजार में
-20 हजार से ज्यादा किसान करते हैं फूलों की खेती
-5000 से ज्यादा कारीगर जुटे हैं कारखानों में