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भूमिगत केबल डालने में मानकों से खिलवाड़, 65 करोड़ की योजना, साल 2016 में शुरू हुआ था काम

Fri, 26 Feb 2021 11:20 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2021 11:20 PM IST
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bhoomigat kebal daalane mein maanakon se khilavaad, 65 karod kee yojana, saal 2016 mein shuroo hua tha kaam
मकरंदनगर में जीटी रोड किनारे खुला पड़ा बिजली केबल। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। शहर में करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड बिजली केबल में मानकों से खिलवाड़ किया गया। कई घरों में बिना पाइप के केबल डाल दिया गया। चार इंच प्लास्टिक पाइप की भी बचत की गई। इस पाइप से ही केबल गुजारना था। अंडरग्राउंड (भूमिगत)केबल बिछाने के लिए पक्की नाली बनाने में भी गुणवत्ता की अनदेखी की गई। जानकारों के मुताबिक तकरीबन छह करोड़ के घपले का अनुमान है। वहीं कई मोहल्ले इस योजना केे लाभ से अभी भी छूटे हैं। यहां के कनेक्शनधारकों को पोल के सहारे बिजली मिल रही है।
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शहर की बिजली व्यवस्था बेहतर करने के लिए सपा शासन में अंडरग्राउंड केबल डालने की स्वीकृति मिली थी। साल 2016 में काम शुरू हुआ। योजना की लागत 54 करोड़ 58 लाख रुपये रखी गई। बाद में 65 करोड़ बजट कर दिया गया। कार्यदायी संस्था राज कारपोरेशन लिमिटेड ने काम शुरू किया। शहर के कई मोहल्लों में खुदाई की गई। करीब तीन सौ किलोमीटर केबल डाला गया। पूरे शहर में इसके जरिए आपूर्ति अब भी शुरू नहीं हो पाई। कुछ मोहल्लों को ही लाभ मिल रहा है। कार्यदायी संस्था ने अब काम बंद कर दिया है। इसकी वजह विभाग को भी नहीं पता। बदइंतजामी से अक्सर फाल्ट हो रहे हैं। इससे कई-कई घंटे बिजली गुल रहती है।
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जानकारों के मुताबिक हाईटेंशन लाइन में पाइप डालने के औसत में 2900 रुपये प्रति मीटर की दर से 110 किलोमीटर में दो करोड़ नब्बे लाख रुपये का गोलमाल हुआ है। वहीं 210 किलोमीटर मेें करीब तीन करोड़ रुपये बचा लिए गए। ईंट, बालू में घपले को जोड़कर छह से सात करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है।
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एक नहीं, हर स्तर पर हुई अनदेखी
भूमिगत केबल डालने से पहले पक्की ईंटों की नाली बनाई जाती है। इसमें बालू डालकर पाइप डाला जाता है। इसी पाइप के अंदर केबल पड़ता है। इससे फाल्ट होने पर खुदाई करने की जरूरत नहीं होती है। फाल्ट को मशीन से पता कर केबल को निकाल कर दुरुस्त कर दिया जाता है। फाल्ट ठीक होने के बाद केबल को दोबारा पाइप में डाल दिया जाता है। सभी जगह ऐसा नहीं किया गया। वहीं कुछ घरों में ही पाइप में केबल डाला गया। ज्यादातर जगह ऐसे ही केेबल पहुंचा दिया गया। बिना पाइप के मीटर से केबल बांध दिया गया। शहर में जगह-जगह केबल को खुला छोड़ दिया गया। इससे हादसों का खतरा बना रहता है।
फैक्ट फाइल
- भूमिगत केबल डालने का बजट 65 करोड़।
- हाईटेंशन लाइन की लंबाई 110 किलोमीटर।
- लो-टेंशन लाइन की लंबाई करीब 210 किलोमीटर।
-एक जनवरी 2016 से शुरू हुआ था काम।
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