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Kannauj News: अर्पिता त्रिवेदी व व्यादिशा यादव को मिला अवार्ड
Sun, 31 Dec 2023 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sun, 31 Dec 2023 12:31 AM IST
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छिबरामऊ। शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र या पुरस्कार तक ही सीमित नहीं है बल्कि नैतिक मूल्यों को सहेजना, नैतिकता, ईमानदारी व शुचिता बनाना भी है। शिखर पर पहुंचकर सम्मान लेना कठिन नहीं है बल्कि शिखर पर बने रहना मुश्किल है। समय की पाबंदी, कठिन परिश्रम और अनुशासन ही जीवन में छात्र को सफलता की ओर ले जाता है।
नगर के एक निजी गेस्ट हाउस में डाॅ. अजिता त्रिपाठी स्मृति अवार्ड समारोह में यह बात उच्च शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. रामेंद्र बाबू चतुर्वेदी ने कही। उन्होंने कहा कि अजिता त्रिपाठी अवस्थी बचपन से ही मेधावी थीं। अपने सरल स्वभाव और मेधावी प्रतिभा से उन्होंने शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बेटे को ऐसे संस्कार दिए, जिससे वह अपनी मां की प्रतिभा को समाज में सबके सामने आती हैं। नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य व पूर्व सांसद डाॅ. रामबख्श सिंह वर्मा ने अजिता त्रिपाठी अवस्थी के छात्र जीवन से लेकर सहकर्मी होने तक के अपने अनुभव साझा किए और उनके प्राचार्य के कार्यकाल को भी सराहा। मेरठ इंजीनियरिंग में बायो टेक्नोलॉजी की विभागाध्यक्ष डाॅ. शुभा द्विवेदी ने डाॅ. अजिता त्रिपाठी ने रचनाओं का पाठ किया। उनकी किताब वरिष्ठ कवि डाॅ. हरिओम पवार की समीक्षा भी पढ़कर सुनाई। नेहरू महाविद्यालय में बीएससी में सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा अर्पिता त्रिवेदी व प्रतियोगी परीक्षा पास कर सिविल जज बनीं व्यादिशा यादव की मां डाॅ. बबिता यादव को पुरस्कृत किया गया। वरिष्ठ कवि डाॅ. ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात के संचालन में हुए कार्यक्रम में शुभम अवस्थी, केके चतुर्वेदी, डाॅ. एपी तिवारी, नारायन सिंह सेंगर, केएल शर्मा, डाॅ. आत्माराम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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नगर के एक निजी गेस्ट हाउस में डाॅ. अजिता त्रिपाठी स्मृति अवार्ड समारोह में यह बात उच्च शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. रामेंद्र बाबू चतुर्वेदी ने कही। उन्होंने कहा कि अजिता त्रिपाठी अवस्थी बचपन से ही मेधावी थीं। अपने सरल स्वभाव और मेधावी प्रतिभा से उन्होंने शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बेटे को ऐसे संस्कार दिए, जिससे वह अपनी मां की प्रतिभा को समाज में सबके सामने आती हैं। नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य व पूर्व सांसद डाॅ. रामबख्श सिंह वर्मा ने अजिता त्रिपाठी अवस्थी के छात्र जीवन से लेकर सहकर्मी होने तक के अपने अनुभव साझा किए और उनके प्राचार्य के कार्यकाल को भी सराहा। मेरठ इंजीनियरिंग में बायो टेक्नोलॉजी की विभागाध्यक्ष डाॅ. शुभा द्विवेदी ने डाॅ. अजिता त्रिपाठी ने रचनाओं का पाठ किया। उनकी किताब वरिष्ठ कवि डाॅ. हरिओम पवार की समीक्षा भी पढ़कर सुनाई। नेहरू महाविद्यालय में बीएससी में सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा अर्पिता त्रिवेदी व प्रतियोगी परीक्षा पास कर सिविल जज बनीं व्यादिशा यादव की मां डाॅ. बबिता यादव को पुरस्कृत किया गया। वरिष्ठ कवि डाॅ. ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात के संचालन में हुए कार्यक्रम में शुभम अवस्थी, केके चतुर्वेदी, डाॅ. एपी तिवारी, नारायन सिंह सेंगर, केएल शर्मा, डाॅ. आत्माराम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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