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बर्ड फ्लू के साथ ग्लैंडर्स को लेकर भी अलर्ट

Tue, 12 Jan 2021 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 11:33 PM IST
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Alert about glanders with bird flu
घोड़े का सैंपल लेते पशु चिकित्सक। संवाद - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। बर्ड फ्लू के साथ ही घोड़ों से ग्लैंडर्स बीमारी फैलने की आशंका है। इससे शासन ने बर्ड फ्लू के बाद ग्लैंडर्स को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। पशु चिकित्सा विभाग ने चार घोड़ों का सैंपल लिया है। सैंपल राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार( हरियाणा) भेजे जाएंगे।
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इन दिनों पक्षियों में बर्ड फ्लू की दहशत है। वहीं घोड़ों (अश्व प्रजाति)में ग्लैंडर्स बीमारी की आशंका है। ग्लैंडर्स संक्रमित घोड़े के संपर्क में आने वाले मनुष्यों को भी चपेट में ले लेता है। इस बीमारी से 24 घंटे में व्यक्ति की जान चली जाती है। वर्ष 2017 में तिर्वा कस्बे में एक घोड़े में ग्लैंडर्स संक्रमण पाया गया था। इससे घोड़ों की निगरानी कर सैंपल लिया जा रहा है। मंगलवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने 120 मुर्गी-मुर्गों, अप्रवासी- प्रवासी पक्षियों के सैंपल लिए। चार घोड़ों के भी सैंपल लिए गए हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि ग्लैंडर्स खतरनाक बीमारी है। अगर किसी भी पालक की घोड़ी, घोड़े या खच्चर में संक्रमण पाया जाता है तो उसे दर्द रहित मौत दी जाएगी। शासन की ओर से 25 हजार का मुआवजा भी दिया जाएगा।
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ये है ग्लैंडर्स बीमारी
ग्लैंडर्स जानलेवा संक्रामक रोग है। यह अश्व प्रजाति को चपेट में लेता है। इसमें घोड़े की नाक से खून बहने लगता। सांस लेने में तकलीफ होती है। शरीर सूखने लगता। शरीर पर फोड़े या गांठें हो जाती हैं। यह दूसरे पालतू पशु में भी पहुंच सकती है। यह बीमारी बरखोडेरिया मैलियाई जीवाणु से फैलती है। ऐसे में घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना पड़ता है।
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मनुष्यों को भी चपेट में ले लेती बीमारी
घोड़ों से मनुष्यों में यह बीमारी आसानी से पहुंच जाती है। घोड़ों की देखभाल या फिर उपचार करने वालों को त्वचा, नाक, मुंह और सांस के द्वारा संक्रमण हो जाता है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि मनुष्यों में इस बीमारी से मांस पेशियों में दर्द, छाती में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न, सिरदर्द और नाक से पानी निकलने लगता है।
ऐसे करें बचाव
-घोड़े या खच्चर को ताजा भोजन दें।
-ज्यादा देर तक मिट्टी-कीचड़ में न रहने दें।
-साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें।
-कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
-बीमार पशु से स्वस्थ पशु को दूरी पर बांधें।
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