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Kannauj News: इत्रनगरी में पिछले साल के मुकाबले 15.7 प्रतिशत बढ़े हादसे
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कन्नौज। सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसके बावजूद हादसों का की संख्या बढ़ती जा रही है। साल दर साल सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है। जून 2024 में कन्नौज में 51 सड़क हादसे हुए थे, जिसमें 29 लोगों की जान गई थी और 35 लोग घायल हो गए थे। इस साल जून में 59 सड़क हादसे हुए, जिसमें 31 लोगों की जान गई और 53 लोग घायल हुए। पिछले साल जून के मुकाबले हादसों की संख्या में 15.7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। हादसों की बढ़ती रफ्तार पर परिवहन आयुक्त ने चिंता जताई है और कारण सहित सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।
जनवरी से जून माह तक जिले में 305 हादसे हुए हैं, जिनमें 171 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले साल यह आंकड़ा काफी कम था। साल 2024 में 243 हादसे हुए थे, जिनमें 128 लोगाें की जान गई थी। इस तरह एक साल में ही मरने वालों का आंकड़ा 33.6 प्रतिशत तक बढ़ गया है। दोनों वर्षों में 270 लोग घायल हुए हैं। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने हर साल बढ़ रहे सड़क हादसों की संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र जारी कर हादसों के कारणों और समाधान के बारे में भी जानकारी साझा करते हुए 15 दिनों में स्पष्टीकरण भी मांगा है।
हादसों के तीन प्रमुख कारण
1. ओवरस्पीड : जनवरी से जून माह तक हुए हादसों का जब पर्यवेक्षण किया गया तो पता चला कि लोग गतिसीमा का पालन नहीं कर रहे हैं, जिले में 38.8 प्रतिशत हादसे ओवरस्पीड के कारण हुए हैं।
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2. लापरवाही : हादसों का दूसरा प्रमुख कारण है कि दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाकर नहीं चलते हैं। परिवहन विभाग ने जब हादसों का ऑडिट किया तो पता चला कि 41 प्रतिशत बाइक सवारों की जान इसलिए चली गई कि वह हेलमेट नहीं लगाए थे।
3.नशेबाजी: हादसों का सबसे बड़ा कारण है कि नशे की हालत में वाहन चलाना। यातायात प्रभारी ने रात में ब्रीथ एनलाइजर से चेकिंग की तो पता चला कि 70 प्रतिशत से अधिक चालक नशे की हालत में वाहन चला रहे थे।
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किया जा रहा सड़क सुरक्षा का ऑडिट
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी इज्या तिवारी ने बताया कि जिले में डीएम की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति बनी है, जो ऑडिट कर रही है। इसमें लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ब्लॉक स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं तो रोड इंजीनियरिंग को भी देखा जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को हेलमेट के प्रति जागरूक किया जा रहा है तो कई बाइक सवाराें को हेलमेट बांटे भी गए हैं। यातायात पुलिस द्वारा लगातार चालान भी किए जा रहे हैं। हादसों के बढ़ने का प्रमुख कारण है कि लोग अपनी जिंदगी के प्रति लापरवाह हैं।
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जनवरी से जून माह तक जिले में 305 हादसे हुए हैं, जिनमें 171 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले साल यह आंकड़ा काफी कम था। साल 2024 में 243 हादसे हुए थे, जिनमें 128 लोगाें की जान गई थी। इस तरह एक साल में ही मरने वालों का आंकड़ा 33.6 प्रतिशत तक बढ़ गया है। दोनों वर्षों में 270 लोग घायल हुए हैं। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने हर साल बढ़ रहे सड़क हादसों की संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र जारी कर हादसों के कारणों और समाधान के बारे में भी जानकारी साझा करते हुए 15 दिनों में स्पष्टीकरण भी मांगा है।
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हादसों के तीन प्रमुख कारण
1. ओवरस्पीड : जनवरी से जून माह तक हुए हादसों का जब पर्यवेक्षण किया गया तो पता चला कि लोग गतिसीमा का पालन नहीं कर रहे हैं, जिले में 38.8 प्रतिशत हादसे ओवरस्पीड के कारण हुए हैं।
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2. लापरवाही : हादसों का दूसरा प्रमुख कारण है कि दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाकर नहीं चलते हैं। परिवहन विभाग ने जब हादसों का ऑडिट किया तो पता चला कि 41 प्रतिशत बाइक सवारों की जान इसलिए चली गई कि वह हेलमेट नहीं लगाए थे।
3.नशेबाजी: हादसों का सबसे बड़ा कारण है कि नशे की हालत में वाहन चलाना। यातायात प्रभारी ने रात में ब्रीथ एनलाइजर से चेकिंग की तो पता चला कि 70 प्रतिशत से अधिक चालक नशे की हालत में वाहन चला रहे थे।
किया जा रहा सड़क सुरक्षा का ऑडिट
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी इज्या तिवारी ने बताया कि जिले में डीएम की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति बनी है, जो ऑडिट कर रही है। इसमें लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ब्लॉक स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं तो रोड इंजीनियरिंग को भी देखा जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को हेलमेट के प्रति जागरूक किया जा रहा है तो कई बाइक सवाराें को हेलमेट बांटे भी गए हैं। यातायात पुलिस द्वारा लगातार चालान भी किए जा रहे हैं। हादसों के बढ़ने का प्रमुख कारण है कि लोग अपनी जिंदगी के प्रति लापरवाह हैं।