‘हफ्ते भर में तीस तक का पहाड़ा याद कर लें’

Kannauj Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
कन्नौज। परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर को ढर्रे पर लाने के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर काम शुरू हो गया है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को तीस तक का पहाड़ा याद करना अनिवार्य होगा। बीएसए के निरीक्षण के दौरान पहाड़ा न सुना पाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होना तय है। इतना ही नहीं स्कूलों में शिक्षण कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसा जाएगा।
बेसिक शिक्षाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि निरीक्षण के दौरान पाया जा रहा है कि स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए नियुक्त शिक्षक-शिक्षिकाओं को तीस तक का पहाड़ा ही याद नहीं है। जब उनको खुद ही पहाड़ा याद नहीं है, तो वह बच्चों को कैसे पहाड़ा याद कराएंगे। बीएसए ने सभी शिक्षकों को चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के अंदर तीस तक का पहाड़ा याद कर लें। बीएसए ने कहा कि शिक्षण कार्य से बचने के लिए तमाम शिक्षकों ने संकुल प्रभारी के पद पर न्याय पंचायतों में नियुक्त करा लिया है। संकुल प्रभारी भी अपने दायित्वों का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं। न्याय पंचायतों में बैठने की बजाए ज्यादातर संकुल प्रभारियों की बाइक अन्य कार्यों में इधर-उधर फर्राटा भरती नजर आती है। ऐसे सभी संकुल प्रभारी अपने कार्यों में बदलाव लाएं, अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी। बीएसए ने समस्त एबीएसए को निर्देश दिया कि वे दिन के अंदर सभी स्कूलों में नए हैंडपंप, खराब हैंडपंप, रिबोर, विद्युत कनेक्शन सहित अन्य सूचनाओं को एकत्र कर कार्यालय को उपलब्ध कराएं। ताकि जो भी कमियां स्कूलों में हैं, उनको दुरुस्त कराया जा सके। बीएसए ने कहा कि संज्ञान में आया है कि मान्यता प्राप्त जूनियर विद्यालयों के प्रबंधकों ने छात्रवृत्ति हड़पने के लिए अपने विद्यालय में तीन से चार सौ तक फर्जी छात्रों का पंजीकरण दिखा रखा है। उक्त विद्यालयों के छात्रों का सत्यापन के बाद ही वजीफा वितरित होगा।
संकुल प्रभारी की नियुक्ति न्याय पंचायत स्तर पर होती है। इनकी नियुक्ति बीएसए द्वारा की जाती है। संकुल प्रभारी बनाने के लिए प्रावधान है, उक्त शिक्षक उसी न्याय पंचायत के जूनियर विद्यालय का वरिष्ठ प्रधानाध्यापक हो, लेकिन जिले में लगभग एक दर्जन से अधिक ऐसे संकुल प्रभारी हैं, जो शिक्षक संघ की धौंस व बीएसए की परिक्रमा लगाकर संकुल प्रभारी बनकर बैठे हुए हैं। उक्त संकुल प्रभारी अपनी न्याय पंचायत को छोड़कर ब्लाक संसाधन केंद्र पर बैठते हैं। इनको पढ़ाई-लिखाई से लेना देना नहीं है, जबकि संकुल प्रभारियों को पढ़ाई-लिखाई से विभाग की ओर से मुक्त नहीं किया गया है। इनको शिक्षण कार्य करने के साथ ही विभाग की योजनाओं का संचालन कराना है, और विभाग को न्याय पंचायत से संबंधित समस्याओं रूबरू कराना है।

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