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आरामगाह साबित हो रहा जिला उपभोक्ता फोरम का न्यायालय
Kannauj
Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। जागो, ग्राहक जागो का नारा सुनकर भले ही उपभोक्ताओं की धोखाधड़ी कर ठगने वाले दुकानदारों को सबक सिखाने के लिए उम्मीद जगी हो लेकिन जब वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं तो उन्हें मायूसी का सामना करना पड़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि उपभोक्ताओं को 90 दिनों में न्याय दिलाने के लिए सदर तहसील में स्थापित किया गया जिला उपभोक्ता फोरम करीब एक साल से ठप पड़ा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को जल्द न्याय मिलना तो दूर अपना परिवाद दायर करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मालूम हो कि सदर तहसील स्थित जिला उपभोक्ता विवाद परितोष फोरम में करीब एक साल से उपभोक्ताओं को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। वकील अजय कुमार यादव का कहना है कि अध्यक्ष के न होने से परिवादोें पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। उपभोक्ताओं को 90 दिनों में न्याय दिलाने का भरोसा दिलाने वाला उपभोक्ता फोरम अपने उदेश्य में सफल होता नजर नहीं आ रहा है। वकील कृष्णचंद्र शर्मा का कहना है कि परिवादों पर सुनवाई न होने से उपभोक्ताओं को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं के परिवाद भी दायर नहीं हो रहे हैं। वकील रामदेव शुक्ला का कहना है कि उपभोक्ता फोरम में उनके दो दर्जन से अधिक वाद लंबित पड़े हैं। उपभोक्ता आए दिन न्याय मिलने की आस लेकर न्यायालय आते हैं। जिन्हें मायूसी के अलावा कुछ नहीं मिलता है। वकील शशिमोहन त्रिपाठी का कहना है कि परिवादों पर सुनवाई न होने से न्यायालय में सन्नाटा पसरा रहता है। कर्मचारी न्यायालय की बेंचो व मेजों पर आराम करते रहते हैं। इसके अलावा वकीलों की बैठक भी इसी न्यायालय में होती है। दोपहर में भीषण गर्मी से बचने के लिए भी लोग न्यायालय में बैठकर समय बिताते हैं। उधर जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य किशोर कुमार दोहरे का कहना है कि न्यायालय में एक साल से अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में परिवाद लंबित पड़े हैं। इसके अलावा भी न्यायालय में महिला सदस्य, पेशकार, लिपिक के पद रिक्त चल रहे हैं। इसकी वजह से परिवादों पर सुनवाई करना भी मुश्किल होता है। कई बार राज्य उपभोक्ता फोरम को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है।
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मालूम हो कि सदर तहसील स्थित जिला उपभोक्ता विवाद परितोष फोरम में करीब एक साल से उपभोक्ताओं को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। वकील अजय कुमार यादव का कहना है कि अध्यक्ष के न होने से परिवादोें पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। उपभोक्ताओं को 90 दिनों में न्याय दिलाने का भरोसा दिलाने वाला उपभोक्ता फोरम अपने उदेश्य में सफल होता नजर नहीं आ रहा है। वकील कृष्णचंद्र शर्मा का कहना है कि परिवादों पर सुनवाई न होने से उपभोक्ताओं को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं के परिवाद भी दायर नहीं हो रहे हैं। वकील रामदेव शुक्ला का कहना है कि उपभोक्ता फोरम में उनके दो दर्जन से अधिक वाद लंबित पड़े हैं। उपभोक्ता आए दिन न्याय मिलने की आस लेकर न्यायालय आते हैं। जिन्हें मायूसी के अलावा कुछ नहीं मिलता है। वकील शशिमोहन त्रिपाठी का कहना है कि परिवादों पर सुनवाई न होने से न्यायालय में सन्नाटा पसरा रहता है। कर्मचारी न्यायालय की बेंचो व मेजों पर आराम करते रहते हैं। इसके अलावा वकीलों की बैठक भी इसी न्यायालय में होती है। दोपहर में भीषण गर्मी से बचने के लिए भी लोग न्यायालय में बैठकर समय बिताते हैं। उधर जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य किशोर कुमार दोहरे का कहना है कि न्यायालय में एक साल से अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में परिवाद लंबित पड़े हैं। इसके अलावा भी न्यायालय में महिला सदस्य, पेशकार, लिपिक के पद रिक्त चल रहे हैं। इसकी वजह से परिवादों पर सुनवाई करना भी मुश्किल होता है। कई बार राज्य उपभोक्ता फोरम को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है।
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