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आम सहमति से चकबंदी का विरोध
Kannauj
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। जनपद के 34 गांवों के किसान अभिलेखों के चले होने के चलते तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं। विगत तीन वर्ष पहले चकबंदी आयुक्त द्वारा जले अभिलेखों से प्रभावित छिबरामऊ तहसील के 29 व तिर्वा तहसील के 5 गांवाें को चकबंदी प्रकिया से अलग कर दिया गया था। इसके चलते किसान न तो अपनी भूमि की पैमाइश करा सकते हैं और न ही कृषकों के हितों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसको लेकर कई बार प्रभावित किसानों, राजस्व व चकबंदी वकीलों ने आंदोलन भी कर चुकेे हैं। प्रदेश में सपा सरकार आते ही किसानों को एक बार फिर न्याय की आस जगी है। इसी के चलते विगत माह कलेक्ट्रेट परिसर में लायर्स बार एसोसियेशन के बैनर तले वकीलों व किसानों ने धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा था। प्रशासन द्वारा आम सहमति से चकबंदी कराए जाने की कवायद शुरू किए जाने की जानकारी मिलते ही वकीलों में आक्रोश व्याप्त है। वकीलों ने सदर तहसील में शशिभूषण त्रिवेदी की अध्यक्षता में बैठक कर इस प्रक्रिया का विरोध करने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए लायर्स बार एसोसियेशन के अध्यक्ष शिवकुमार सिंह सिसौदिया ने बताया कि प्रशासन के इस निर्णय की जानकारी मिलने पर किसान व वकील भौचक हैं। प्रभावित गांवों में धारा 6 को लागू किया जा चुका है। इससे माना जाता है कि चकबंदी प्रक्रिया समाप्त हो गयी है। धारा 6 को वापस लिए बिना प्रशासन की यह कवायद पीड़ित किसानों के साथ धोखा है। उन्होने जले अभिलेखों से प्रभावित जिले के सभी 34 गांवों में धारा 6 को वापस लेकर वहीं से कार्रवाही शुरू कराए जाने की मांग की जहां तीन वर्ष पहले काम रोका गया था। प्रशासन ने ऐसा न किया तो वकील इसके खिलाफ उच्च न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे। इस मौके पर मो. नाजिम अख्तर, शिवओम गुप्ता, राजीव दुबे, रामबाबू राठौर, राजीव श्रीवास्तव, शशिमोहन त्रिपाठी, अजय कुमार सिंह यादव मौजूद रहे।
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