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प्रभु के स्मरण मात्र से होता जीव का कल्याण
Kannauj
Updated Thu, 18 Apr 2013 05:30 AM IST
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छिबरामऊ (कन्नौज)। सौरिख रोड स्थित सिद्धपीठ मां कालिका देवी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत महा पुराण की कथा में आचार्य पं.संजीव कृष्ण जी दुबे ने चंदवंश में अवतरित हुए भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की सारगर्भित कथा का विस्तार से वर्णन किया।
आचार्य जी ने कहा कि जीव पर जब प्रभु श्रीहरि की कृपा बरसती है तो जीव के सारे बंधन छूट जाते हैं और परमात्मा से आत्मा का मिलन हो जाता है। जिससे जीव का कल्याण होता है। आचार्य पं.संजीवकृष्ण दुबे ने कहा कि कृष्ण के अवतरित होते ही वसुदेव जी के माया बंधन छूट गए तथा जीवन में आनंद भरता गया और कल्याण हुआ। गोकुल में मंगल बधाइयां गाई गई. इस दौरान आचार्य जी ने कई बधाई गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में तो भगवान का स्मरण मात्र ही उसके कल्याण का रास्ता खोल देता है। वैसे भी भगवान भाव के भूखे हैं। श्रद्धा से उन्हें जो स्मरण करता है भगवान उसकी सभी विघ्न बाधाएं हर लेते हैं। अंत में परीक्षित गोपाल दीक्षित ने आरती कर प्रसाद वितरण किया।
भागवत कथा में वीरेंद्रकुमार चतुर्वेदी, श्यामू, देवेंद्र यादव, अनिल वर्मा, सदन चतुर्वेदी, विक्कू चतुर्वेदी, राजेश चौबे, गोपाल चौबे व गुड्डू पांडेय आदि तमाम भक्तगण मौजूद रहे।
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आचार्य जी ने कहा कि जीव पर जब प्रभु श्रीहरि की कृपा बरसती है तो जीव के सारे बंधन छूट जाते हैं और परमात्मा से आत्मा का मिलन हो जाता है। जिससे जीव का कल्याण होता है। आचार्य पं.संजीवकृष्ण दुबे ने कहा कि कृष्ण के अवतरित होते ही वसुदेव जी के माया बंधन छूट गए तथा जीवन में आनंद भरता गया और कल्याण हुआ। गोकुल में मंगल बधाइयां गाई गई. इस दौरान आचार्य जी ने कई बधाई गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में तो भगवान का स्मरण मात्र ही उसके कल्याण का रास्ता खोल देता है। वैसे भी भगवान भाव के भूखे हैं। श्रद्धा से उन्हें जो स्मरण करता है भगवान उसकी सभी विघ्न बाधाएं हर लेते हैं। अंत में परीक्षित गोपाल दीक्षित ने आरती कर प्रसाद वितरण किया।
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भागवत कथा में वीरेंद्रकुमार चतुर्वेदी, श्यामू, देवेंद्र यादव, अनिल वर्मा, सदन चतुर्वेदी, विक्कू चतुर्वेदी, राजेश चौबे, गोपाल चौबे व गुड्डू पांडेय आदि तमाम भक्तगण मौजूद रहे।
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