{"_id":"6876a2d16a5671dd6602ea5a","slug":"70-thousand-women-have-vehicles-in-their-names-33-thousand-have-licenses-kannauj-news-c-214-1-knj1005-134165-2025-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: 70 हजार महिलाओं के नाम वाहन, लाइसेंस 33 हजार के पास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: 70 हजार महिलाओं के नाम वाहन, लाइसेंस 33 हजार के पास
विज्ञापन
कन्नौज। महिलाएं वाहनों को खरीदने में तो सबसे आगे है पर लाइसेंस बनवाने में काफी पीछे हैं। जिले में महिलाओं के नाम 70 हजार वाहन हैं परड्राइविंग लाइसेंस 33 हजार के पास ही हैं।
महिलाओं के नाम पर वाहन खरीदने पर कंपनियां छूट देती हैं। इस कारण लोग पत्नी, बेटी और बहन के नाम खरीद लेते हैं। कभी-कभी अतिरिक्त सुविधाएं भी महिला वाहन स्वामियों को मिल जाती हैं। यही वजह है कि लोग महिलाओं के नाम पर वाहन खरीदते हैं। वाहन न चला पाने के कारण महिलाओं का लाइसेंस नहीं बन पाता है।
कई महिलाएं एआरटीओ कार्यालय की दौड़ न लगाने के कारण लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंचती हैं। हालांकि, ऑनलाइन प्रक्रिया काफी आसान है, लेकिन महिलाएं इसमें रुचि नहीं ले रहीं। यही कारण है कि जिले में 2.80 लाख वाहनों में स्वामी महिलाएं हैं और सिर्फ 33 महिलाओं ने ही लाइसेंस बनवाए हैं। एआरटीओ इज्या तिवारी का कहना है कि सभी वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी है। उचित लाइसेंस के साथ ही वाहन चलाएं। यह वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। घटना-दुघर्टना के समय वैध लाइसेंस से वाहन चालक को कानूनी कार्रवाई में बड़ी राहत मिलती है।
विज्ञापन
2.80 लाख वाहनों में 70 हजार महिलाओं के नाम
जिले की आबादी 19 लाख है, जिनमें जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 2.80 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से 70 हजार महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं। पुरुषों के नाम 2.10 लाख हजार वाहन हैं।
1.72 लाख में से 33,133 महिलाओं के लाइसेंस
जनपद में 1.72 लाख लोगों के पास वाहन चलाने का लाइसेंस हैं, जिनमें से 33,133 महिलाएं हैं। इससे स्पष्ट है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लाइसेंस काफी कम हैं। साथ ही पंजीकृत वाहनों के सापेक्ष लाइसेंस धारकों की संख्या भी कम है।
विज्ञापन
महिलाओं के नाम पर वाहन खरीदने पर कंपनियां छूट देती हैं। इस कारण लोग पत्नी, बेटी और बहन के नाम खरीद लेते हैं। कभी-कभी अतिरिक्त सुविधाएं भी महिला वाहन स्वामियों को मिल जाती हैं। यही वजह है कि लोग महिलाओं के नाम पर वाहन खरीदते हैं। वाहन न चला पाने के कारण महिलाओं का लाइसेंस नहीं बन पाता है।
विज्ञापन
कई महिलाएं एआरटीओ कार्यालय की दौड़ न लगाने के कारण लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंचती हैं। हालांकि, ऑनलाइन प्रक्रिया काफी आसान है, लेकिन महिलाएं इसमें रुचि नहीं ले रहीं। यही कारण है कि जिले में 2.80 लाख वाहनों में स्वामी महिलाएं हैं और सिर्फ 33 महिलाओं ने ही लाइसेंस बनवाए हैं। एआरटीओ इज्या तिवारी का कहना है कि सभी वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी है। उचित लाइसेंस के साथ ही वाहन चलाएं। यह वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। घटना-दुघर्टना के समय वैध लाइसेंस से वाहन चालक को कानूनी कार्रवाई में बड़ी राहत मिलती है।
विज्ञापन
2.80 लाख वाहनों में 70 हजार महिलाओं के नाम
जिले की आबादी 19 लाख है, जिनमें जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 2.80 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से 70 हजार महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं। पुरुषों के नाम 2.10 लाख हजार वाहन हैं।
1.72 लाख में से 33,133 महिलाओं के लाइसेंस
जनपद में 1.72 लाख लोगों के पास वाहन चलाने का लाइसेंस हैं, जिनमें से 33,133 महिलाएं हैं। इससे स्पष्ट है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लाइसेंस काफी कम हैं। साथ ही पंजीकृत वाहनों के सापेक्ष लाइसेंस धारकों की संख्या भी कम है।