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Kannauj News: वीर गाथा व सैनिक सम्मान में 65 पूर्व सैनिक, 20 वीर नारियां सम्मानित
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कन्नौज। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र कार्यालय प्रांगण में शुक्रवार को वीर गाथा एवं सैनिक सम्मान और पुनर्मिलन समारोह का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इसकी शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और शहीदों को नमन के साथ की गई। कार्यक्रम में 65 पूर्व सैनिक और 20 वीर नारियों को सम्मानित किया गया।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल रोहित भटारा ने कहा कि सीमा पर खड़ा सैनिक केवल सीमा की नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के विश्वास और भविष्य की रक्षा करता है। उन्होंने 1947 के जम्मू-कश्मीर युद्ध, ऑपरेशन पोलो 1948, ऑपरेशन विजय गोवा 1961, भारत-चीन युद्ध 1962, भारत-पाक युद्ध 1965, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पवन 1987-90, ऑपरेशन कैक्टस 1988, कारगिल युद्ध 1999, ऑपरेशन पराक्रम 2001-02, उत्तराखंड आपदा राहत 2013, सर्जिकल स्ट्राइक 2016 और गलवान संघर्ष 2020 की विजय गाथा बताई।
ब्रिगेडियर अतुल कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों की सभी योजनाओं के भत्तों को दोगुना कर दिया है। राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के बारे में जानकारी दी और पूर्व सैनिकों के कार्यों को शीघ्र निपटाने का आश्वासन दिया। मुख्य अतिथि पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एके मिश्रा ने कहा कि उनके सेवाकाल में ही इस कार्यालय की स्थापना हुई थी। सेवानिवृत्ति के बाद यह उनका पहला भ्रमण है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से अपने बच्चों की पढ़ाई और रोजगार पर ध्यान देने और सेहत का ख्याल रखने को कहा। इस अवसर पर विंग कमांडर अंकित सक्सेना, कर्नल बीडी कुमार, पूर्व सैनिक संघ जिलाध्यक्ष शिवकुमार सिंह चंदेल सहित करीब 200 पूर्व सैनिक, सिखलाई रेजीमेंट के जवान और एनसीसी कैडेट मौजूद रहे।
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85 लोगों को मिला सम्मान
मुख्य अतिथि ने वीर नारी हंसमुखी देवी, उमा देवी, शांति देवी, रामवती, कमला देवी सहित 20 वीर नारियों को सम्मानित किया। वहीं कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले ऑनरेरी कैप्टन रवींद्र कुमार सेना मेडल, कर्नल एएस चौहान, हवलदार शेर सिंह सहित 1962, 1965 और 1971 की लड़ाई में भाग लेने वाले 65 पूर्व सैनिकों को शॉल, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल रोहित भटारा ने कहा कि सीमा पर खड़ा सैनिक केवल सीमा की नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के विश्वास और भविष्य की रक्षा करता है। उन्होंने 1947 के जम्मू-कश्मीर युद्ध, ऑपरेशन पोलो 1948, ऑपरेशन विजय गोवा 1961, भारत-चीन युद्ध 1962, भारत-पाक युद्ध 1965, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पवन 1987-90, ऑपरेशन कैक्टस 1988, कारगिल युद्ध 1999, ऑपरेशन पराक्रम 2001-02, उत्तराखंड आपदा राहत 2013, सर्जिकल स्ट्राइक 2016 और गलवान संघर्ष 2020 की विजय गाथा बताई।
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ब्रिगेडियर अतुल कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों की सभी योजनाओं के भत्तों को दोगुना कर दिया है। राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के बारे में जानकारी दी और पूर्व सैनिकों के कार्यों को शीघ्र निपटाने का आश्वासन दिया। मुख्य अतिथि पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एके मिश्रा ने कहा कि उनके सेवाकाल में ही इस कार्यालय की स्थापना हुई थी। सेवानिवृत्ति के बाद यह उनका पहला भ्रमण है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से अपने बच्चों की पढ़ाई और रोजगार पर ध्यान देने और सेहत का ख्याल रखने को कहा। इस अवसर पर विंग कमांडर अंकित सक्सेना, कर्नल बीडी कुमार, पूर्व सैनिक संघ जिलाध्यक्ष शिवकुमार सिंह चंदेल सहित करीब 200 पूर्व सैनिक, सिखलाई रेजीमेंट के जवान और एनसीसी कैडेट मौजूद रहे।
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85 लोगों को मिला सम्मान
मुख्य अतिथि ने वीर नारी हंसमुखी देवी, उमा देवी, शांति देवी, रामवती, कमला देवी सहित 20 वीर नारियों को सम्मानित किया। वहीं कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले ऑनरेरी कैप्टन रवींद्र कुमार सेना मेडल, कर्नल एएस चौहान, हवलदार शेर सिंह सहित 1962, 1965 और 1971 की लड़ाई में भाग लेने वाले 65 पूर्व सैनिकों को शॉल, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।