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खादी ग्रामोद्योग की 36 सहकारी समितियां बंद, बजट का अभाव, टेंडर नहीं उठने से खुले में पड़े पशुओं के मृत शवों का नहीं होता निस्तारण
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तिर्वा-कन्नौज रोड स्थित खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का कार्यालय।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। बजट न मिलने से खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की जिले में संचालित आदर्श औद्योगिक उत्पादन सहकारी समितियां बंद हो गई हैं। इससे जिले में सार्वजनिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के मृत शवों का निस्तारण नहीं हो रहा है। समिति से जुड़े लोगों का चर्म, रस्सी, माचिस, बढ़ईगीरी, साबुन और तेल का कारोबार भी छिन गया।
जिले के लोग स्वरोजगार से जुड़ सकें, इसके लिए 1959 में उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड के जरिए आदर्श पशु शव छेदन औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति, आदर्श तेल औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति से लेकर माचिस, रस्सी, फर्नीचर, साबुन और रोजमर्रा की कई वस्तुओं के लिए ऋण देकर कारोबार शुरू कराने समितियों का गठन किया गया था। जिले में 36 समितियों को शुरू किया गया था।
जिला पंचायत कार्यालय से मृत पशुओं को उठाने का टेंडर पास होता था। टेंडर पाने वाले व्यक्ति को समिति से जोड़कर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड पशुओं की खाल और हड्डी का कारोबार कराता था। इसी तरह अन्य कारोबार होते थे। 1996 से बोर्ड को शासन से बजट नहीं मिला। इससे जिले की आदर्श औद्योगिक उत्पादन सहकारी समितियां बंद हो गईं। मृत पशुओं के शवों का निस्तारण रुक गया। समितियों से रस्सी, फर्नीचर, साबुन, माचिस का उत्पादन भी ठप है। समितियों से पांच हजार से ज्यादा लोगों को काम मिला हुआ था। अब यह बेरोजगार हैं।
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माटी कला रोजगार योजना भी नहीं चढ़ सकी परवान
माटी कला बोर्ड उत्तर प्रदेश की ओर से हाल में माटी कला रोजगार योजना शुरू की गई है। इसकी जिम्मेदारी खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को मिली। जिले में महाराजा दक्ष आदर्श माटी कला औद्योगिक उत्पादन समिति गोपालपुर, छिबरामऊ और कुम्हारी कला आदर्श औद्योगिक उत्पादन समिति मलिकापुर का गठन कराया गया। कुछ दिन मिट्टी के बर्तन बनाए गए। संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में दोनों समितियां बंद हो गईं।
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जिले के लोग स्वरोजगार से जुड़ सकें, इसके लिए 1959 में उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड के जरिए आदर्श पशु शव छेदन औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति, आदर्श तेल औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति से लेकर माचिस, रस्सी, फर्नीचर, साबुन और रोजमर्रा की कई वस्तुओं के लिए ऋण देकर कारोबार शुरू कराने समितियों का गठन किया गया था। जिले में 36 समितियों को शुरू किया गया था।
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जिला पंचायत कार्यालय से मृत पशुओं को उठाने का टेंडर पास होता था। टेंडर पाने वाले व्यक्ति को समिति से जोड़कर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड पशुओं की खाल और हड्डी का कारोबार कराता था। इसी तरह अन्य कारोबार होते थे। 1996 से बोर्ड को शासन से बजट नहीं मिला। इससे जिले की आदर्श औद्योगिक उत्पादन सहकारी समितियां बंद हो गईं। मृत पशुओं के शवों का निस्तारण रुक गया। समितियों से रस्सी, फर्नीचर, साबुन, माचिस का उत्पादन भी ठप है। समितियों से पांच हजार से ज्यादा लोगों को काम मिला हुआ था। अब यह बेरोजगार हैं।
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माटी कला रोजगार योजना भी नहीं चढ़ सकी परवान
माटी कला बोर्ड उत्तर प्रदेश की ओर से हाल में माटी कला रोजगार योजना शुरू की गई है। इसकी जिम्मेदारी खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को मिली। जिले में महाराजा दक्ष आदर्श माटी कला औद्योगिक उत्पादन समिति गोपालपुर, छिबरामऊ और कुम्हारी कला आदर्श औद्योगिक उत्पादन समिति मलिकापुर का गठन कराया गया। कुछ दिन मिट्टी के बर्तन बनाए गए। संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में दोनों समितियां बंद हो गईं।