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मूंग, मूंगफली और मक्का की बुआई ने पकड़ी तेजी
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कन्नौज/तालग्राम। आलू की खुदाई के बाद खाली हुए खेतों में मूंग, मूंगफली और मक्का की बुआई का काम तेज हो गया है। उधर, 83 फीसदी आलू शीतगृहों में भंडारित कर दिया गया है। जायद में बोई जाने वाली मक्का के रकबे में 7897 हेक्टेयर क्षेत्रफल की बढ़ोतरी हुई है। बीते वर्ष में 16521 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जायद की मक्का की बुआई हुई थी। इस बार कृषि विभाग को 24418 हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य मिला है।
तालग्राम क्षेत्र के किसान सोबरन सिंह, मेघनाथ, बादाम सिंह का कहना है कि आलू फसल के बाद खाली हुए खेतों में मार्च माह में उर्द, मूंग की बुआई का सही समय रहता है। वातावरण में अनुकूल नमी रहती है। इसके बाद की बुआई में सिंचाई की ज्यादा जरूरत पड़ती है। मूंग, उर्द की फसल को अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार निराई के बाद दो से तीन पानी में फसल तैयार हो जाती है। किसानों को अच्छा लाभ मिल जाता है। कृषि प्राविधिक सहायक विनय शर्मा का कहना है कि बुआई से पहले बीज को कार्बंडाजिम ढाई ग्राम या थीरम तीन ग्राम प्रति किलो की दर से इस्तेमाल कर शोधित कर लेना चाहिए। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। आजाद-2, शेखर -2, माश 479, नरेंद्र उर्द-1, आजाद-1, सुजाता, आईपीयू 2- 43 उर्द, मूंग की अच्छी किस्में हैं। यह अधिक उत्पादन देती हैं। यह मोजैक अवरोधी भी हैं। इस बार मूंग 2034, उर्द 438 और मूंगफली 2766 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई जा रही है।
किसान आलू की फसल के बाद जायद में बोई जाने वाली मक्का की पैदावार अधिक तादाद में करते हैं। जिले में इस बार आलू की फसल 46200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई गई थी। जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि करीब 83 प्रतिशत किसान आलू शीतगृहों में भंडारित कर चुके हैं। जीटी रोड पर स्थित शीतगृह लगभग फुल हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र व नए खुले कुछ शीतगृह अभी पूरी तौर पर नहीं भर पाए हैं। वहीं किसान जायद की मक्का की बुआई में तेजी से जुटे हैं। हालांकि इस बार उम्मीद थी कि अन्ना जानवरों से परेशान किसान मक्का फसल की बुआई कम तादाद में करेंगे। पिछले करीब तीन माह से अन्ना जानवरों को शासन के निर्देश पर काफी हद तक अस्थायी गोशालाओं में बंद कर दिया है। इससे किसानों के चेहरे पर फिर रंगत दौड़ी है। इसका नतीजा है कि मक्का की फसल का रकवा बढ़ा है।
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बेहतर पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिकों का लें सहारा
किसान मूंग, उर्द, मूंगफली और सब्जियों के साथ ही सूरजमुखी की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों का सहारा लें। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के प्रभारी डॉ. वीके कनौजिया ने कही। कहा कि यदि किसान बुआई से पहले और बाद में समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों से फसल के बारे में जानकारी लेते रहें तो फसल न सिर्फ ज्यादा होगी बल्कि ज्यादा आमदनी भी की जा सकेगी।
मूंग, मूंगफली और मक्का की बुआई ने पकड़ी तेजी
आलू की खुदाई से खेत हुए खाली, कोल्ड स्टोरेज में 83 फीसदी भंडारण
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तालग्राम क्षेत्र के किसान सोबरन सिंह, मेघनाथ, बादाम सिंह का कहना है कि आलू फसल के बाद खाली हुए खेतों में मार्च माह में उर्द, मूंग की बुआई का सही समय रहता है। वातावरण में अनुकूल नमी रहती है। इसके बाद की बुआई में सिंचाई की ज्यादा जरूरत पड़ती है। मूंग, उर्द की फसल को अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। एक बार निराई के बाद दो से तीन पानी में फसल तैयार हो जाती है। किसानों को अच्छा लाभ मिल जाता है। कृषि प्राविधिक सहायक विनय शर्मा का कहना है कि बुआई से पहले बीज को कार्बंडाजिम ढाई ग्राम या थीरम तीन ग्राम प्रति किलो की दर से इस्तेमाल कर शोधित कर लेना चाहिए। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। आजाद-2, शेखर -2, माश 479, नरेंद्र उर्द-1, आजाद-1, सुजाता, आईपीयू 2- 43 उर्द, मूंग की अच्छी किस्में हैं। यह अधिक उत्पादन देती हैं। यह मोजैक अवरोधी भी हैं। इस बार मूंग 2034, उर्द 438 और मूंगफली 2766 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई जा रही है।
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किसान आलू की फसल के बाद जायद में बोई जाने वाली मक्का की पैदावार अधिक तादाद में करते हैं। जिले में इस बार आलू की फसल 46200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई गई थी। जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि करीब 83 प्रतिशत किसान आलू शीतगृहों में भंडारित कर चुके हैं। जीटी रोड पर स्थित शीतगृह लगभग फुल हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र व नए खुले कुछ शीतगृह अभी पूरी तौर पर नहीं भर पाए हैं। वहीं किसान जायद की मक्का की बुआई में तेजी से जुटे हैं। हालांकि इस बार उम्मीद थी कि अन्ना जानवरों से परेशान किसान मक्का फसल की बुआई कम तादाद में करेंगे। पिछले करीब तीन माह से अन्ना जानवरों को शासन के निर्देश पर काफी हद तक अस्थायी गोशालाओं में बंद कर दिया है। इससे किसानों के चेहरे पर फिर रंगत दौड़ी है। इसका नतीजा है कि मक्का की फसल का रकवा बढ़ा है।
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बेहतर पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिकों का लें सहारा
किसान मूंग, उर्द, मूंगफली और सब्जियों के साथ ही सूरजमुखी की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों का सहारा लें। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के प्रभारी डॉ. वीके कनौजिया ने कही। कहा कि यदि किसान बुआई से पहले और बाद में समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों से फसल के बारे में जानकारी लेते रहें तो फसल न सिर्फ ज्यादा होगी बल्कि ज्यादा आमदनी भी की जा सकेगी।
मूंग, मूंगफली और मक्का की बुआई ने पकड़ी तेजी
आलू की खुदाई से खेत हुए खाली, कोल्ड स्टोरेज में 83 फीसदी भंडारण