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अपने लिए दीया तो खुद ही जलाना पड़ेगा : डॉ. बबीता
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जल सहेलियों ने जल संरक्षण की शानदार पहल करके साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। ‘अंधेरों को कोसने से कुछ नहीं होता, अपने लिए दीया तो खुद ही जलाना पड़ेगा’।
रानी लक्ष्मीबाई स्वतंत्रता के लिए लड़ीं, इसलिए दुनिया याद करती है। यह बात बुधवार को बीयू के गांधी सभागार में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान ने कही।अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा सम्मानित करने से समाजसेवा करने वालों का मनोबल बढ़ता है। विवि के कई पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रचना विमल ने कहा जल सहेलियों ने मिशाल कायम की है। परमार्थ संस्था प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियां जल संरक्षण के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा व कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य महिला आयोग सदस्य अनुपमा सिंह लोधी व नीलम प्रभात ने कहा जल की एक-एक बूंद धरती को सिंचित कर वृक्षों को जीवन देती हैं। यहां जल सहेलियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. यतिंद्र मिश्र, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. मो. नईम, डॉ. नेहा मिश्रा, शिवानी सिंह, अदिति, सिद्धगोपाल सिंह आदि रहे।अमर उजाला ब्यूरो झांसी। जल सहेलियों ने जल संरक्षण की शानदार पहल करके साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। ‘अंधेरों को कोसने से कुछ नहीं होता, अपने लिए दीया तो खुद ही जलाना पड़ेगा’। रानी लक्ष्मीबाई स्वतंत्रता के लिए लड़ीं, इसलिए दुनिया याद करती है। यह बात बुधवार को बीयू के गांधी सभागार में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान ने कही।अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा सम्मानित करने से समाजसेवा करने वालों का मनोबल बढ़ता है। विवि के कई पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रचना विमल ने कहा जल सहेलियों ने मिशाल कायम की है। परमार्थ संस्था प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियां जल संरक्षण के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा व कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य महिला आयोग सदस्य अनुपमा सिंह लोधी व नीलम प्रभात ने कहा जल की एक-एक बूंद धरती को सिंचित कर वृक्षों को जीवन देती हैं। यहां जल सहेलियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. यतिंद्र मिश्र, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. मो. नईम, डॉ. नेहा मिश्रा, शिवानी सिंह, अदिति, सिद्धगोपाल सिंह आदि रहे।
झांसी। जल सहेलियों ने जल संरक्षण की शानदार पहल करके साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। ‘अंधेरों को कोसने से कुछ नहीं होता, अपने लिए दीया तो खुद ही जलाना पड़ेगा’।
रानी लक्ष्मीबाई स्वतंत्रता के लिए लड़ीं, इसलिए दुनिया याद करती है। यह बात बुधवार को बीयू के गांधी सभागार में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान ने कही।अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा सम्मानित करने से समाजसेवा करने वालों का मनोबल बढ़ता है। विवि के कई पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रचना विमल ने कहा जल सहेलियों ने मिशाल कायम की है। परमार्थ संस्था प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियां जल संरक्षण के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा व कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य महिला आयोग सदस्य अनुपमा सिंह लोधी व नीलम प्रभात ने कहा जल की एक-एक बूंद धरती को सिंचित कर वृक्षों को जीवन देती हैं। यहां जल सहेलियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. यतिंद्र मिश्र, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. मो. नईम, डॉ. नेहा मिश्रा, शिवानी सिंह, अदिति, सिद्धगोपाल सिंह आदि रहे।अमर उजाला ब्यूरो झांसी। जल सहेलियों ने जल संरक्षण की शानदार पहल करके साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। ‘अंधेरों को कोसने से कुछ नहीं होता, अपने लिए दीया तो खुद ही जलाना पड़ेगा’। रानी लक्ष्मीबाई स्वतंत्रता के लिए लड़ीं, इसलिए दुनिया याद करती है। यह बात बुधवार को बीयू के गांधी सभागार में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान ने कही।अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा सम्मानित करने से समाजसेवा करने वालों का मनोबल बढ़ता है। विवि के कई पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रचना विमल ने कहा जल सहेलियों ने मिशाल कायम की है। परमार्थ संस्था प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियां जल संरक्षण के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा व कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य महिला आयोग सदस्य अनुपमा सिंह लोधी व नीलम प्रभात ने कहा जल की एक-एक बूंद धरती को सिंचित कर वृक्षों को जीवन देती हैं। यहां जल सहेलियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. यतिंद्र मिश्र, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. मो. नईम, डॉ. नेहा मिश्रा, शिवानी सिंह, अदिति, सिद्धगोपाल सिंह आदि रहे।
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