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इमरजेंसी की एक्सरे मशीन खराब, मरीज परेशान
Jhansi
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:37 AM IST
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X-ray michin
- फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में एक्सरे मशीन खराब हो गई है। ऐसे में ओपीडी में रखी एक्सरे मशीन से मरीजों को जांच करवानी पड़ रही है। वहां पर अधिक भीड़ उमड़ने से कई मरीज निजी केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं। बाहर ज्यादा पैसे खर्च कर एक्सरे कराना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ट्रामा सेंटर भी बना हुआ है। ज्यादातर सड़क हादसे के शिकार लोगों को इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है। इमरजेंसी में प्रतिदिन 50-60 एक्सरे होते हैं। पिछले 10-12 दिनों से इमरजेंसी की एक्सरे मशीन खराब हो गई है। हादसे का शिकार मरीजों को ओपीडी की एक्सरे मशीन में जाकर जांच करानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से ओपीडी तक ले जाने में काफी समस्या होती है। इमरजेंसी के मरीजों की जांच से ओपीडी की एक्सरे मशीन पर लोड बढ़ गया है। यहां मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण मरीज निजी केंद्रों पर जाकर जांच करवा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में जहां 45 रुपये में सामान्य एक्सरे हो जाता है, वहीं निजी केंद्रों में 150 से 200 रुपये फीस देनी पड़ती है।
एक सप्ताह में सुधरेगी
एक्सरे मशीन सुधरवाने के लिए संबंधित कंपनी को सूचना दे दी गई है। एक सप्ताह के अंदर इंजीनियर आकर मशीन को सुधार देगा। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।
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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ट्रामा सेंटर भी बना हुआ है। ज्यादातर सड़क हादसे के शिकार लोगों को इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है। इमरजेंसी में प्रतिदिन 50-60 एक्सरे होते हैं। पिछले 10-12 दिनों से इमरजेंसी की एक्सरे मशीन खराब हो गई है। हादसे का शिकार मरीजों को ओपीडी की एक्सरे मशीन में जाकर जांच करानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से ओपीडी तक ले जाने में काफी समस्या होती है। इमरजेंसी के मरीजों की जांच से ओपीडी की एक्सरे मशीन पर लोड बढ़ गया है। यहां मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण मरीज निजी केंद्रों पर जाकर जांच करवा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में जहां 45 रुपये में सामान्य एक्सरे हो जाता है, वहीं निजी केंद्रों में 150 से 200 रुपये फीस देनी पड़ती है।
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एक सप्ताह में सुधरेगी
एक्सरे मशीन सुधरवाने के लिए संबंधित कंपनी को सूचना दे दी गई है। एक सप्ताह के अंदर इंजीनियर आकर मशीन को सुधार देगा। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।