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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   World Voice Day today:  virtual life snatching Voice 

विश्व आवाज दिवस आज : वर्चुअल लाइफ छीन रही आवाज, गुम हो रही शहद सी मीठी बोली की मिठास

Sat, 16 Apr 2022 02:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 16 Apr 2022 02:22 AM IST
सार

आज लोगों की आवाज की मिठास कहीं गुम होती जा रही है। मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि वर्चुअल सोशल लाइफ पर अपने आप को सबसे बेहतर दिखाने की होड़ और लोगों का ध्यान आकर्षितकरने के अलावा भागमभाग भरी लाइफ का तनाव लोगों को कर्कश बना रहा है।

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World Voice Day today:  virtual life snatching Voice 
Voice Modulation - फोटो : Pixabay

विस्तार

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए... कबीर का यह दोहा सिर्फ किताबों की इबारत बनकर रह गया है। आज लोगों की आवाज की मिठास कहीं गुम होती जा रही है। मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि वर्चुअल सोशल लाइफ पर अपने आप को सबसे बेहतर दिखाने की होड़ और लोगों का ध्यान आकर्षितकरने के अलावा भागमभाग भरी लाइफ का तनाव लोगों को कर्कश बना रहा है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र  झांसी में आई-क्यू परीक्षण (इंटेलीजेंस क्वोशन्ट-बुद्धि लब्धि) के लिए आने वाले 10 केसों में से 4 केस ई-क्यू (इमोशनल क्वोशन्ट-भावनात्मक लब्धि) के मिलते हैं। इनका भावनात्मक स्तर बहुत कमजोर होता है। ये बात-बात पर झगड़ पड़ते हैं। इससे आवाज पर खासा असर पड़ता है।

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मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष बताते हैं कि जरा सी बात पर आपा खो देने से लोगों की आवाज पर असर पड़ा रहा है। बार-बार तीखा बोलने और लड़ने-झगड़ने से आवाज कर्कश होती जा रही है। ऐसे कई केस आते हैं जहां लोग बताते हैं कि उनकी आवाज में तीखापन आ रहा है। स्वभाव चिड़चिड़ा हो रहा है। मनमाफिक काम न होने से उन्हें तुरंत गुस्सा आ जाता है। रास्ते में ट्रैफिक भी मिल जाए और किसी से टक्कर हो जाए तो वह लड़ने पर उतारू हो जाते हैं। वह खुद को रोक नहीं पाते और तेज आवाज में झगड़ने लगते हैं। 
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डॉ. मनीष बताते हैं कि ऐसे लोगों का भावनात्मक स्तर बहुत कमजोर होता है। इसके पीछे वर्चुअल लाइफ में जीना, काम का तनाव, घर से दूर रहना या अपनों का सहयोग न मिलना जैसे कई कारण सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि अभी केंद्र में किसी का भावनात्मक स्तर जानने के लिए परीक्षण की सुविधा नहीं है लेकिन काउंसलिंग के दौरान कारण समझ में आ जाते हैं। इनकी काउंसलिंग बेहद जरूरी है। आने वाले केसों में किशोरों और 35 साल तक के युवाओं की संख्या अधिक है।
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छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने से कर्कश हो रही आवाज
आजकल युवाओं और किशोरों को तेज म्यूजिक सुनने, प्रेशर हॉर्न का प्रयोग, स्पीड में बाइक चलाने और खुद को साबित करने के लिए तेज आवाज में बोलने की आदत पड़ रही है। एकल परिवार में रहने से लोगों में भावनात्मक जुड़ाव की भी कमी हो रही है। इससे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने की प्रवृत्ति भी बढ़ने लगी है। इन सबका असर लोगों की आवाज पर भी साफ दिखाई दे रहा। आवाज में कर्कशपन आने लगा है।

-डॉ. मनीष, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र 

बात करने का स्टाइल बदल रहा है, तीखापन आ रहा
किशोरों और युवाओं में दिखावे की आदत पड़ रही है। पढ़ाई और कॅरियर का तनाव, वर्चुअल लाइफ और अकेले दूसरे शहरों में रहने जैसे कई कारणों से वह लाइफ में बहुत जल्दी आगे बढ़ना चाह रहे हैं। माता-पिता भी सारी जरूरत पूरी करते हैं। ऐसे में उनके बात करने का स्टाइल भी बदल रहा है। वह अपनी हर बात मनवाने के जुनून में रहते हैं, इससे आवाज में भी तीखापन आने लगा है। 
-डॉ. दीपशिखा मित्तल, एसोसिएट प्रोफेसर बीकेडी कॉलेज मनोविज्ञान विभाग

मनोवैज्ञानिकों की सलाह

  • अपना गुस्सा या भड़ास निकालने के लिए शीशे के सामने खड़े हों और जो मन में आए वह बोलें, रोना चाहते हैं तो रो लें। 
  • मन में जो भी भावनाएं हैं उसे किसी अपने के सामने जरूर प्रकट करें, किसी भी इमोशन न दबाएं।
  • व्यक्तिगत मित्र बनाएं, परिवार के साथ बैठें, दिन भर ऑफिस या बाहर जो भी हो उसे शेयर करें। इससे तेज और तीखा बोलना कम होगा। 
  • काम का तनाव कम करने के लिए लाफिंग एक्सरसाइज करें। गलती पर सॉरी बोलना शुरू करें। 
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