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समय के साथ नई सामग्री जोड़ने को तैयार रहें
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झांसी। शनिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शैक्षणिक कौशल और व्यक्तित्व विकास विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में शिक्षाविद् व एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक प्रो. जेएस राजपूत ने कहा कि व्यक्ति को व्यक्तित्व में बदलना ही शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षा के लिए हमें किसे पढ़ना है, क्या और कैसे पढ़ना है और कौन पढ़ाएगा इस संबंध में स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए। समय के साथ नई सामग्री को जोड़ने व पुरानी को छोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। कहा कि, आज देश ब्लैक बोर्ड से स्मार्ट और इंटरेक्टिव बोर्ड की ओर बढ़ चुका है।
उन्होंने लियो टॉल्सटॉय की किताब ‘ऑन टु द लास्ट’ का संदर्भ देते हुए बताया कि सभी मनुष्यों का कार्य बराबर है। कोई भी कर्म किसी से श्रेष्ठ नहीं है। रवींद्र नाथ टैगोर का जिक्र करते हुए कहा कि ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को विचार, संकल्पना, सृजनात्मकता एवं जिज्ञासा की शक्ति प्रदान की है। शिक्षक का कार्य उसे प्रोत्साहित करना एवं संवारना है। महाऋषि अरविंदो का संदर्भ देते हुए बोले कि कुछ भी पढ़ाया नहीं जा सकता। विद्यार्थी के मन में जो है, उसे ही आगे बढ़ाने की जरूरत है। शिक्षा का उद्देश्य सीमाओं में बांधना नहीं, बल्कि इन बंधनों को खोलना है। उन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में जानने के लिए सीखना, सृजन करना, अपने व्यक्तित्व का विकास करना और साथ रहने की कला को विकसित करना ही शिक्षा का उद्देश्य होगा। उन्होंने जापान से राष्ट्रभावना का निर्माण एवं समय पालन और फिनलैंड से शिक्षकों का सम्मान सीखने के लिए उत्प्रेरित किया।
कुलपति प्रोफेसर जेवी वैशम्पायन ने कहा कि शिक्षा ग्रहण करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। जरूरी नहीं उसमें फिल्म की तरह हर पल कुछ हंसी-मजाक या रोमांच हों। बोले कि वर्तमान में हमारी स्कूल स्तर की शिक्षा में कुछ खामियां हैं, जिसके चलते बीयू को अच्छे छात्र नहीं मिल पा रहे हैं। इससे यूनिवर्सिटी समाज में अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। विश्वविद्यालय का कार्य सिर्फ ज्ञान बांटना नहीं बल्कि नए ज्ञान का निर्माण करना भी है। हमें नए विचार, सुझाव, आलोचना, संवाद एवं चर्चा को महत्व देने की जरूरत है। शिक्षण संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र सूचना तकनीक के क्षेत्र में हो रहे नित नए बदलावों से गुजर रहा है। इस कारण हमें शिक्षण कार्य में प्रचलित माध्यमों की समीक्षा की जरूरत है। सेमिनार के विषय की रूपरेखा संगोष्ठी की संयोजक डॉ. काव्या दुबे ने प्रस्तुत की। आभार डॉ. जितेंद्र प्रताप व संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिवेदी ने किया।
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इस दौरान प्रो. सीबी सिंह, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. आरके सैनी, प्रो. जेएल वर्मा, डॉ. बीबी त्रिपाठी, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. धीरेंद्र यादव, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. अंजू लता, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. रेखा लगरखा, डॉ. किशन यादव, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अचला पांडेय, बीएस मस्तान्या व दीप्ति कुमारी मौजूद रहीं।
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उन्होंने लियो टॉल्सटॉय की किताब ‘ऑन टु द लास्ट’ का संदर्भ देते हुए बताया कि सभी मनुष्यों का कार्य बराबर है। कोई भी कर्म किसी से श्रेष्ठ नहीं है। रवींद्र नाथ टैगोर का जिक्र करते हुए कहा कि ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को विचार, संकल्पना, सृजनात्मकता एवं जिज्ञासा की शक्ति प्रदान की है। शिक्षक का कार्य उसे प्रोत्साहित करना एवं संवारना है। महाऋषि अरविंदो का संदर्भ देते हुए बोले कि कुछ भी पढ़ाया नहीं जा सकता। विद्यार्थी के मन में जो है, उसे ही आगे बढ़ाने की जरूरत है। शिक्षा का उद्देश्य सीमाओं में बांधना नहीं, बल्कि इन बंधनों को खोलना है। उन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में जानने के लिए सीखना, सृजन करना, अपने व्यक्तित्व का विकास करना और साथ रहने की कला को विकसित करना ही शिक्षा का उद्देश्य होगा। उन्होंने जापान से राष्ट्रभावना का निर्माण एवं समय पालन और फिनलैंड से शिक्षकों का सम्मान सीखने के लिए उत्प्रेरित किया।
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कुलपति प्रोफेसर जेवी वैशम्पायन ने कहा कि शिक्षा ग्रहण करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। जरूरी नहीं उसमें फिल्म की तरह हर पल कुछ हंसी-मजाक या रोमांच हों। बोले कि वर्तमान में हमारी स्कूल स्तर की शिक्षा में कुछ खामियां हैं, जिसके चलते बीयू को अच्छे छात्र नहीं मिल पा रहे हैं। इससे यूनिवर्सिटी समाज में अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। विश्वविद्यालय का कार्य सिर्फ ज्ञान बांटना नहीं बल्कि नए ज्ञान का निर्माण करना भी है। हमें नए विचार, सुझाव, आलोचना, संवाद एवं चर्चा को महत्व देने की जरूरत है। शिक्षण संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र सूचना तकनीक के क्षेत्र में हो रहे नित नए बदलावों से गुजर रहा है। इस कारण हमें शिक्षण कार्य में प्रचलित माध्यमों की समीक्षा की जरूरत है। सेमिनार के विषय की रूपरेखा संगोष्ठी की संयोजक डॉ. काव्या दुबे ने प्रस्तुत की। आभार डॉ. जितेंद्र प्रताप व संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिवेदी ने किया।
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इस दौरान प्रो. सीबी सिंह, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. आरके सैनी, प्रो. जेएल वर्मा, डॉ. बीबी त्रिपाठी, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. धीरेंद्र यादव, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. अंजू लता, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. रेखा लगरखा, डॉ. किशन यादव, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अचला पांडेय, बीएस मस्तान्या व दीप्ति कुमारी मौजूद रहीं।