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पढ़ते - पढ़ते फांसी के फंदे पर झूल गया किशोर

Wed, 28 Aug 2019 10:09 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Aug 2019 10:09 PM IST
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While studying teenager suicides
पढ़ते - पढ़ते फांसी के फंदे पर झूल गया किशोर
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झांसी। थाना प्रेमनगर इलाके में रहने वाले ध्रुव साहू (15) ने कमरे में पढ़ते समय अचानक रस्सी के सहारे कुुंदे पर लटकरकर जान दे दी। घटना के समय घर पर परिजन नहीं थे। घर लौटे पिता फंदे पर ध्रुव का शव लटका देख घबरा गए। चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसी आ गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कोे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। देर रात पुलिस घटना की जांच में लगी रही। घटना का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। परिजन भी कुछ नहीं बता सके।
थाना प्रेमनगर के हरदौल मोहल्ला निवासी किशन साहू का पुत्र ध्रुव साहू इलाके के एक स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। किशन साहू रेलवे के कैरिज एंड वैैगन में तैनात हैं। बुधवार सुबह वह स्कूल जाने के बाद दोपहर करीब 12 बजे घर लौैटा। इस दौरान घर पर उसकी मां मीनू और बहनें मौजूद थीं। कुछ देर बाद ध्रुव के खाना खाने के बाद कमरे में पलंग पर पढ़ने बैठ गया। इसके बाद सभी महावीरपुरा में रिश्तेदारी में चले गए। इसी दौरान घर में अकेले ध्रुव ने पलंग के सहारे कुंदे पर रस्सी डालकर फांसी लगा दी। दोपहर करीब र्ढाई बजे पिता किशन साहू जैसे ही मुख्य द्वार पर लगा शटर खोलकर कमरे में पहुंचे तो ध्रुव को फांसी पर लटका देख उनकी चीख निकल गई। चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसी भी आ गए। वह भी ध्रुव को देखकर घबरा गए। खबर मिलते ही ध्रुव की मां व बहनें भी पहुंच गईं। शव देखकर घर में कोहराम मच गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर कब्जे में लिया। देर रात पुलिस घटना के कारणों को जानने में लगी, लेकिन पता नहीं चल सका। परिजन भी कुछ नहीं बता सके।
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कूलर पर रखी थी रस्सी
जिस कमरे में ध्रुव ने फांसी लगाई है, उसके बाहर रखे कूलर पर ही रस्सी रखी थी। पिता के अनुसार कई दिनों से रस्सी रखी थी, लेकिन उनको क्या पता था कि यह उनके पुत्र के लिए काल बन जाएगी।
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इकलौैता था ध्रुव
किशन साहू का पुत्र ध्रुव तीन बहनों में सबसे छोटा था। ध्रुव को अपनी तीनोें बहनों से पढ़ाई में बहुत सहारा मिलता था। आज सुबह भी स्कूल जाने से पहले वह छोटी बहन से पढ़कर गया था। अधिकांशत: बहनें ही स्कूल का होमवर्क कराती थीं। इस घटना ने पूरे घर को हिलाकर रख दिया है। पड़ोसी व रिश्तेदार ढांढस बंधाने में लगे रहे।

बच्चों का चेहरा पढ़ें अभिभावक
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि पंद्रह साल की उम्र में आत्महत्या करने का कोई गंभीर कारण तो रहा नहीं होगा। लेकिन, हो सकता है कि उस बच्चे को कोई छोटी सी बात भी गंभीर लग रही हो, जिससे उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक अपने बच्चे के चेहरे को पढ़ें। उसके चेहरे पर उदासी है, तो उसका कारण जानें। खुश है तो उसके पीछे की वजह भी अभिभावकों को पता होनी चाहिए। बच्चों के दोस्तों के संपर्क में भी रहे। स्कूल की गतिविधियों की भी जानकारी लेते रहें। किसी भी प्रकार का मनोविकार समझ में आने पर तत्काल मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
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