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जो देगा व्यापारियों पर ध्यान, उसी को करेंगे मतदान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2017 11:28 PM IST
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au samvad
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को ‘अमर उजाला संवाद’ का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापारियों ने विभिन्न मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अतिक्रमण और पार्किंग स्थलों के अभाव को बाजारों की बड़ी समस्या बताया। कारोबारियों ने कहा कि विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशियों को स्थानीय स्तर पर घोषणा पत्र जारी करना चाहिए, जिसमें वह बताएं कि व्यापारी व कारोबार के हित में क्या काम करेंगे?
ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित अमर उजाला के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कारोबारियों ने कहा कि सरकारों ने उन्हें पैसा कमाने की मशीन भर समझ रखा है। करों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापार के विकास या बाजारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते हैं। चुनाव दर चुनाव गुजरते जा रहे हैं, परंतु बाजारों में समस्याएं दशकों से जस की तस बनी हैं। औद्योगिक विकास की योजनाएं फाइलों में ही कैद होकर रह गईं हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से सरकार में इसकी पैरवी नहीं की जा रही है। और तो और व्यापारियों की जिन छोटी-मोटी समस्याओं का आसानी से समाधान हो सकता है, उनकी भी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने एक सुर में कहा कि इस विधानसभा चुनाव में वोट उसी को जाएगा, जो कारोबार के हित की बात करेगा। इसके लिए प्रत्याशियों को स्थानीय स्तर पर अपना घोषणा पत्र जारी करना होगा।
सुविधा के नाम पर पार्किंग तक नहीं
सुभाष गंज जिले के कारोबार का प्रमुख केंद्र है। बावजूद, यहां सुविधा के नाम पर पार्किंग तक नहीं है। व्यापारी बद से बदतर हालातों में कारोबार को मजबूर हैं। राजनीतिक दलों की बाजार पर नजर नहीं है और स्थानीय नेता बाजार की समस्याओं से कन्नी काटे हुए हैं। बाजार के हालातों में सुधार के लिए कोई योजना तक नहीं है, क्रियान्वयन तो दूर की बात है।
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- प्रमोद किलपन, महामंत्री- सुभाष गंज व्यापार मंडल
गुम हो गया मैन्युफैक्चरिंग जोन
बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास के लिए 2014 में यहां नेशनल मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की योजना बनाई गई थी। इसके लिए गरौठा व टहरौली तहसील में साढ़े पांच हजार हेक्टेअर जमीन भी चिह्नित की गई थी। शुरुआती तेजी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सरकार ने ध्यान नहीं दिया और जनप्रतिनिधियों ने पैरवी नहीं की। यह क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए जरूरी है।
- सीएस सक्सेना, अधिशासी अधिकारी - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स
वृद्धावस्था में व्यापारियों को मिले पेंशन
कारोबारी ताउम्र सरकार को टैक्स अदा करते हैं, लेकिन सरकार उनका ख्याल नहीं रखती। कर्मचारियों को तो सरकार वृद्धावस्था पेंशन देती है, परंतु कारोबारियों को कुछ नहीं दिया जाता। सरकार को कारोबारियों के लिए पेंशन का प्रावधान करना चाहिए। इसके अलावा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लोकवाणी केंद्र की तरह केंद्र खोले जाने चाहिए।
- विजय गुप्ता, अध्यक्ष - डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन
घोषणा पत्रों में व्यापारी उपेक्षित
राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में रोजगार सृजन की बात तो कर रहे हैं, लेकिन रोजगार कहां से आएंगे, यह नहीं बता रहे हैं। जबकि, रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र व्यापार उपेक्षित पड़ा है। छोटे व्यापारियों व व्यापार के विकास के लिए पार्टियों के पास कोई नीति नहीं है। व्यापारियों के हित की बात करने वाले को ही विधानसभा चुनाव में वोट जाएगा।
- मनोज विजय, अध्यक्ष - छावनी व्यापार मंडल
स्थानीय घोषणा पत्र जारी करें नेता
राजनीतिक दलों द्वारा केंद्रीय स्तर पर जारी किए जाने वाले घोषणा पत्रों में स्थानीय मुद्दे नहीं शामिल किए जाते हैं। स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी है कि विभिन्न दलों को प्रत्याशी स्थानीय स्तर पर अपने घोषणा पत्र जारी करें और उनमें बताएं कि वह व्यापार व बाजार के हित में क्या काम करेंगे? जो प्रत्याशी यह पहल करेगा, कारोबारियों का वोट उसी को जाएगा।
- अतुल जैन, अध्यक्ष - मानिक चौक व्यापार मंडल
बाजार में हावी है अफसरशाही
बाजार में अफसरशाही हावी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मावा का कारोबार पूरे साल होता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग छापामारी दिवाली, होली पर ही करता है, जबकि यह समय कारोबार का पीक सीजन होता है। अब ऐसे में व्यापारी कारोबार करें या छापेमारी की औपचारिकताओं को पूरा करें। इस स्थिति में व्यापारियों की मदद कोई नहीं करता है।
- राजेश बिरथरे, संरक्षक - बड़ाबाजार व्यापार मंडल
ओवरब्रिज से बाजार का बेड़ागर्क
सीपरी बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण अपनी तय समय सीमा से एक साल ज्यादा हो गया है। इससे कारोबार धरातल पर पहुंच गया है। आवागमन बड़ी समस्या बन गई है। सांसद-विधायक भी यहां से गुजरते हैं, लेकिन उन्हें समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रहता है। जबकि, जनप्रतिनिधियों को आम आदमी की तकलीफों को समझते हुए उससे निजात दिलाने का काम करना चाहिए।
- चौधरी फिरोज, महामंत्री- सीपरी बाजार व्यापार मंडल
विधान परिषद में मिले प्रतिनिधित्व
शिक्षक विधायक की तर्ज पर विधान परिषद के लिए व्यापारी विधायक भी चुना जाना चाहिए, ताकि वह व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को सदन में रख सके। इसके अलावा व्यापारियों से संबंधित विभागों के कार्यालय एक ही स्थान पर खोले जाने चाहिए। बाजारों को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए सरकारी विभागों की जवाबदेयी तय की जानी चाहिए।
- संतोष साहू, अध्यक्ष - सीपरी बाजार व्यापार मंडल
बगैर पैसे के नहीं होता काम
व्यापारी सरकार का खजाना तो भरते ही हैं, साथ ही सरकारी अफसर व कर्मचारी भी अपनी जेबें व्यापारियों के पैसे से गर्म करते हैं। व्यापारियों का कोई भी काम बगैर लेनदेन के नहीं होता है। पता होने के बावजूद भी जनप्रतिनिधि व्यापारियों को इस भ्रष्टाचार से मुक्त कराने की कोशिश नहीं करते हैं। इससे व्यापारी आक्रोशित हैं। नेताओं को अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी।
- डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, सचिव - केमिस्ट एसोसिएशन
छोटे दुकानदारों पर न हो कार्रवाई
किसी कंपनी का गलत सामान पकड़े जाने पर फुटकर कारोबारी कार्रवाई का शिकार हो जाता है। इसकी बानगी मैगी से देखी जा सकती है, जिसके लिए कई छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की गई। जबकि, कार्रवाई कंपनियों पर होनी चाहिए। नियमों में बदलाव जरूरी है। इसके लिए राजनीतिक दलों व नेताओं को पहल करनी चाहिए, तभी व्यापार सुगमता से संचालित किया जा सकेगा।
- केदारनाथ राय, प्रभारी - प्रेमनगर व्यापार मंडल
कंधे से कंधा मिलाकर चलें प्रतिनिधि
व्यापारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद को मजबूत करना होगा। जनप्रतिनिधि ऐसा चुना जाए, जो व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। इसके लिए आत्ममंथन की जरूरत है। बाजारों की दशा में सुधार के लिए ट्रांसपोर्ट नगर शहर से बाहर बनाना चाहिए। इतना ही नहीं, शहर में ऑटो की बढ़ती संख्या के नियंत्रण के उपाय भी किए जाने चाहिए।
- राजीव बब्बर, अध्यक्ष- पेट्रोल डीलर एसोसिएशन
विवाह घर ही निशाने पर क्यों?
शादियों के सीजन में सड़कों पर लगने वाले जाम के लिए विवाह घरों को दोषी ठहराया जाता है, जबकि इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार बारातें होती हैं। बारातों पर अंकुश के प्रबंध किए जाने चाहिए। साथ ही विवाह घरों के बाहर सड़कों पर खड़ी होने वाली गाड़ियों पर चालान होना चाहिए, लेकिन सरकारी तंत्र जिम्मेदारी से बचने के लिए विवाह घरों पर कार्रवाई कर रहा है।
- विकास कुशवाहा, कोषाध्यक्ष - विवाह स्थल एसोसिएशन
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- पर्यटन का विकास हो, ताकि बाहरी लोग आएं और व्यापार बढ़े
- सरल हो सरकारी विभागों की कार्यशैली
- वाणिज्य कर जैसे सरकारी विभागों का दुरुस्त हो सिस्टम, आए दिन बैठ जाता है सर्वर
- व्यापारियों और बाजारों की सुरक्षा के हों पुख्ता बंदोबस्त
- बाजारों को स्मार्ट बनाने की दिशा में हो काम
- व्यापारियों की समस्याओं के समाधान को विभाग जारी करें गोपनीय नंबर
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ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित अमर उजाला के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कारोबारियों ने कहा कि सरकारों ने उन्हें पैसा कमाने की मशीन भर समझ रखा है। करों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापार के विकास या बाजारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते हैं। चुनाव दर चुनाव गुजरते जा रहे हैं, परंतु बाजारों में समस्याएं दशकों से जस की तस बनी हैं। औद्योगिक विकास की योजनाएं फाइलों में ही कैद होकर रह गईं हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से सरकार में इसकी पैरवी नहीं की जा रही है। और तो और व्यापारियों की जिन छोटी-मोटी समस्याओं का आसानी से समाधान हो सकता है, उनकी भी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने एक सुर में कहा कि इस विधानसभा चुनाव में वोट उसी को जाएगा, जो कारोबार के हित की बात करेगा। इसके लिए प्रत्याशियों को स्थानीय स्तर पर अपना घोषणा पत्र जारी करना होगा।
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सुविधा के नाम पर पार्किंग तक नहीं
सुभाष गंज जिले के कारोबार का प्रमुख केंद्र है। बावजूद, यहां सुविधा के नाम पर पार्किंग तक नहीं है। व्यापारी बद से बदतर हालातों में कारोबार को मजबूर हैं। राजनीतिक दलों की बाजार पर नजर नहीं है और स्थानीय नेता बाजार की समस्याओं से कन्नी काटे हुए हैं। बाजार के हालातों में सुधार के लिए कोई योजना तक नहीं है, क्रियान्वयन तो दूर की बात है।
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गुम हो गया मैन्युफैक्चरिंग जोन
बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास के लिए 2014 में यहां नेशनल मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की योजना बनाई गई थी। इसके लिए गरौठा व टहरौली तहसील में साढ़े पांच हजार हेक्टेअर जमीन भी चिह्नित की गई थी। शुरुआती तेजी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सरकार ने ध्यान नहीं दिया और जनप्रतिनिधियों ने पैरवी नहीं की। यह क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए जरूरी है।
- सीएस सक्सेना, अधिशासी अधिकारी - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स
वृद्धावस्था में व्यापारियों को मिले पेंशन
कारोबारी ताउम्र सरकार को टैक्स अदा करते हैं, लेकिन सरकार उनका ख्याल नहीं रखती। कर्मचारियों को तो सरकार वृद्धावस्था पेंशन देती है, परंतु कारोबारियों को कुछ नहीं दिया जाता। सरकार को कारोबारियों के लिए पेंशन का प्रावधान करना चाहिए। इसके अलावा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लोकवाणी केंद्र की तरह केंद्र खोले जाने चाहिए।
- विजय गुप्ता, अध्यक्ष - डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन
घोषणा पत्रों में व्यापारी उपेक्षित
राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में रोजगार सृजन की बात तो कर रहे हैं, लेकिन रोजगार कहां से आएंगे, यह नहीं बता रहे हैं। जबकि, रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र व्यापार उपेक्षित पड़ा है। छोटे व्यापारियों व व्यापार के विकास के लिए पार्टियों के पास कोई नीति नहीं है। व्यापारियों के हित की बात करने वाले को ही विधानसभा चुनाव में वोट जाएगा।
- मनोज विजय, अध्यक्ष - छावनी व्यापार मंडल
स्थानीय घोषणा पत्र जारी करें नेता
राजनीतिक दलों द्वारा केंद्रीय स्तर पर जारी किए जाने वाले घोषणा पत्रों में स्थानीय मुद्दे नहीं शामिल किए जाते हैं। स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी है कि विभिन्न दलों को प्रत्याशी स्थानीय स्तर पर अपने घोषणा पत्र जारी करें और उनमें बताएं कि वह व्यापार व बाजार के हित में क्या काम करेंगे? जो प्रत्याशी यह पहल करेगा, कारोबारियों का वोट उसी को जाएगा।
- अतुल जैन, अध्यक्ष - मानिक चौक व्यापार मंडल
बाजार में हावी है अफसरशाही
बाजार में अफसरशाही हावी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मावा का कारोबार पूरे साल होता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग छापामारी दिवाली, होली पर ही करता है, जबकि यह समय कारोबार का पीक सीजन होता है। अब ऐसे में व्यापारी कारोबार करें या छापेमारी की औपचारिकताओं को पूरा करें। इस स्थिति में व्यापारियों की मदद कोई नहीं करता है।
- राजेश बिरथरे, संरक्षक - बड़ाबाजार व्यापार मंडल
ओवरब्रिज से बाजार का बेड़ागर्क
सीपरी बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण अपनी तय समय सीमा से एक साल ज्यादा हो गया है। इससे कारोबार धरातल पर पहुंच गया है। आवागमन बड़ी समस्या बन गई है। सांसद-विधायक भी यहां से गुजरते हैं, लेकिन उन्हें समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रहता है। जबकि, जनप्रतिनिधियों को आम आदमी की तकलीफों को समझते हुए उससे निजात दिलाने का काम करना चाहिए।
- चौधरी फिरोज, महामंत्री- सीपरी बाजार व्यापार मंडल
विधान परिषद में मिले प्रतिनिधित्व
शिक्षक विधायक की तर्ज पर विधान परिषद के लिए व्यापारी विधायक भी चुना जाना चाहिए, ताकि वह व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को सदन में रख सके। इसके अलावा व्यापारियों से संबंधित विभागों के कार्यालय एक ही स्थान पर खोले जाने चाहिए। बाजारों को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए सरकारी विभागों की जवाबदेयी तय की जानी चाहिए।
- संतोष साहू, अध्यक्ष - सीपरी बाजार व्यापार मंडल
बगैर पैसे के नहीं होता काम
व्यापारी सरकार का खजाना तो भरते ही हैं, साथ ही सरकारी अफसर व कर्मचारी भी अपनी जेबें व्यापारियों के पैसे से गर्म करते हैं। व्यापारियों का कोई भी काम बगैर लेनदेन के नहीं होता है। पता होने के बावजूद भी जनप्रतिनिधि व्यापारियों को इस भ्रष्टाचार से मुक्त कराने की कोशिश नहीं करते हैं। इससे व्यापारी आक्रोशित हैं। नेताओं को अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी।
- डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, सचिव - केमिस्ट एसोसिएशन
छोटे दुकानदारों पर न हो कार्रवाई
किसी कंपनी का गलत सामान पकड़े जाने पर फुटकर कारोबारी कार्रवाई का शिकार हो जाता है। इसकी बानगी मैगी से देखी जा सकती है, जिसके लिए कई छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की गई। जबकि, कार्रवाई कंपनियों पर होनी चाहिए। नियमों में बदलाव जरूरी है। इसके लिए राजनीतिक दलों व नेताओं को पहल करनी चाहिए, तभी व्यापार सुगमता से संचालित किया जा सकेगा।
- केदारनाथ राय, प्रभारी - प्रेमनगर व्यापार मंडल
कंधे से कंधा मिलाकर चलें प्रतिनिधि
व्यापारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद को मजबूत करना होगा। जनप्रतिनिधि ऐसा चुना जाए, जो व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। इसके लिए आत्ममंथन की जरूरत है। बाजारों की दशा में सुधार के लिए ट्रांसपोर्ट नगर शहर से बाहर बनाना चाहिए। इतना ही नहीं, शहर में ऑटो की बढ़ती संख्या के नियंत्रण के उपाय भी किए जाने चाहिए।
- राजीव बब्बर, अध्यक्ष- पेट्रोल डीलर एसोसिएशन
विवाह घर ही निशाने पर क्यों?
शादियों के सीजन में सड़कों पर लगने वाले जाम के लिए विवाह घरों को दोषी ठहराया जाता है, जबकि इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार बारातें होती हैं। बारातों पर अंकुश के प्रबंध किए जाने चाहिए। साथ ही विवाह घरों के बाहर सड़कों पर खड़ी होने वाली गाड़ियों पर चालान होना चाहिए, लेकिन सरकारी तंत्र जिम्मेदारी से बचने के लिए विवाह घरों पर कार्रवाई कर रहा है।
- विकास कुशवाहा, कोषाध्यक्ष - विवाह स्थल एसोसिएशन
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- पर्यटन का विकास हो, ताकि बाहरी लोग आएं और व्यापार बढ़े
- सरल हो सरकारी विभागों की कार्यशैली
- वाणिज्य कर जैसे सरकारी विभागों का दुरुस्त हो सिस्टम, आए दिन बैठ जाता है सर्वर
- व्यापारियों और बाजारों की सुरक्षा के हों पुख्ता बंदोबस्त
- बाजारों को स्मार्ट बनाने की दिशा में हो काम
- व्यापारियों की समस्याओं के समाधान को विभाग जारी करें गोपनीय नंबर