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बांधों को मध्य प्रदेश में बारिश का इंतजार
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बांधों को मध्य प्रदेश में बारिश का इंतजार
झांसी। झांसी और ललितपुर में सिंचाई व पेयजल के सबसे बड़े स्रोत राजघाट और माताटीला बांध खाली पड़े हैं। इन दोनों बांधों का जलस्तर मध्य प्रदेश के भोपाल और आसपास क्षेत्रों में बारिश होने के बाद ही बढ़ता है। मगर, मध्य प्रदेश में अभी भी बारिश थमी हुई है, जिससे ये बांध खाली पड़े हैं।
मध्य प्रदेश के भोपाल से उद्गम होकर आने वाली बेतवा नदी का पानी सबसे पहले ललितपुर क्षेत्र में स्थित राजघाट बांध में रोका जाता है। इस बांध से छूटा पानी माताटीला बांध को भरता है। माताटीला बांध से छोड़ा गया पानी सुकुवां-ढुकुवां व पारीछा बांध से होता हुआ उरई, जालौन, हमीरपुर तक नहर के जरिये सिंचाई के लिए पहुंचता है। माताटीला बांध के पानी से ही झांसी महानगर व बबीना से झांसी मार्ग पर स्थित क्षेत्रों को जलापूर्ति होती है। अगर पूरे साल सिंचाई व पेयजल के लिए पर्याप्त पानी चाहिए तो राजघाट बांध का भरना जरूरी है। राजघाट बांध भरने के लिए मध्य प्रदेश में बारिश होना जरूरी है।
जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी मध्यप्रदेश के भोपाल व आसपास क्षेत्रों में झमाझम बारिश न होने से राजघाट और माताटीला बांध का जलस्तर नहीं बढ़ पा रहा है। राजघाट बांध की संपूर्ण भंडारण क्षमता 371 मीटर है, जबकि बांध अभी दस मीटर (करीब 32 फीट) खाली पड़ा है। इसी तरह, माताटीला बांध की कुल भंडारण क्षमता 308.40 मीटर है, जबकि यह बांध सात मीटर (करीब 23 फीट) खाली है।
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यह बांध भी खाली
सुकुवां-ढुकुवां बांध का 273.71 मीटर की तुलना में 271.21 मीटर, पारीछा बांध 194.65 मीटर की तुलना में 192.03 मीटर भरा हुआ है। इधर, झांसी जनपद में हुई अब तक वर्षा से धसान नदी पर बने पहाड़ी बांध का जलस्तर 195.93 मीटर की तुलना में 194.82 मीटर, लहचूरा बांध का 182.27 मीटर की तुलना में 182.46 मीटर पहुंच गया है। मऊरानीपुर के निकट सपरार नदी पर बने सपरार बांध का जलस्तर 224.64 मीटर व 216.52 मीटर पर पहुंच गया है।
38 प्रतिशत हुई बारिश
झांसी जनपद में 825 मिलीमीटर औसत बारिश होती है। अभी तक यहां 321 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी है। इस हिसाब से 38.91 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मालूम हो कि जनपद में 2013 में 543 मिलीमीटर, 2014 में 543 मिलीमीटर, 2015 में 787 मिलीमीटर, 2016 में 476 मिलीमीटर, 2017 में 503 मिलीमीटर व 2018 में 702 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई थी।
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झांसी। झांसी और ललितपुर में सिंचाई व पेयजल के सबसे बड़े स्रोत राजघाट और माताटीला बांध खाली पड़े हैं। इन दोनों बांधों का जलस्तर मध्य प्रदेश के भोपाल और आसपास क्षेत्रों में बारिश होने के बाद ही बढ़ता है। मगर, मध्य प्रदेश में अभी भी बारिश थमी हुई है, जिससे ये बांध खाली पड़े हैं।
मध्य प्रदेश के भोपाल से उद्गम होकर आने वाली बेतवा नदी का पानी सबसे पहले ललितपुर क्षेत्र में स्थित राजघाट बांध में रोका जाता है। इस बांध से छूटा पानी माताटीला बांध को भरता है। माताटीला बांध से छोड़ा गया पानी सुकुवां-ढुकुवां व पारीछा बांध से होता हुआ उरई, जालौन, हमीरपुर तक नहर के जरिये सिंचाई के लिए पहुंचता है। माताटीला बांध के पानी से ही झांसी महानगर व बबीना से झांसी मार्ग पर स्थित क्षेत्रों को जलापूर्ति होती है। अगर पूरे साल सिंचाई व पेयजल के लिए पर्याप्त पानी चाहिए तो राजघाट बांध का भरना जरूरी है। राजघाट बांध भरने के लिए मध्य प्रदेश में बारिश होना जरूरी है।
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जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी मध्यप्रदेश के भोपाल व आसपास क्षेत्रों में झमाझम बारिश न होने से राजघाट और माताटीला बांध का जलस्तर नहीं बढ़ पा रहा है। राजघाट बांध की संपूर्ण भंडारण क्षमता 371 मीटर है, जबकि बांध अभी दस मीटर (करीब 32 फीट) खाली पड़ा है। इसी तरह, माताटीला बांध की कुल भंडारण क्षमता 308.40 मीटर है, जबकि यह बांध सात मीटर (करीब 23 फीट) खाली है।
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यह बांध भी खाली
सुकुवां-ढुकुवां बांध का 273.71 मीटर की तुलना में 271.21 मीटर, पारीछा बांध 194.65 मीटर की तुलना में 192.03 मीटर भरा हुआ है। इधर, झांसी जनपद में हुई अब तक वर्षा से धसान नदी पर बने पहाड़ी बांध का जलस्तर 195.93 मीटर की तुलना में 194.82 मीटर, लहचूरा बांध का 182.27 मीटर की तुलना में 182.46 मीटर पहुंच गया है। मऊरानीपुर के निकट सपरार नदी पर बने सपरार बांध का जलस्तर 224.64 मीटर व 216.52 मीटर पर पहुंच गया है।
38 प्रतिशत हुई बारिश
झांसी जनपद में 825 मिलीमीटर औसत बारिश होती है। अभी तक यहां 321 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी है। इस हिसाब से 38.91 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मालूम हो कि जनपद में 2013 में 543 मिलीमीटर, 2014 में 543 मिलीमीटर, 2015 में 787 मिलीमीटर, 2016 में 476 मिलीमीटर, 2017 में 503 मिलीमीटर व 2018 में 702 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई थी।