{"_id":"62c735a9b1caa615fc27a261","slug":"vigilance-probe-started-in-mahoba-in-crores-of-electricity-bill-scam-jhansi-news-jhs2243680104","type":"story","status":"publish","title_hn":"महोबा में हुए करोड़ों के बिजली बिल घोटाले की विजलेंस जांच शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महोबा में हुए करोड़ों के बिजली बिल घोटाले की विजलेंस जांच शुरू
विज्ञापन
झांसी। महोबा में तीन करोड़ के बिजली बिल घोटाले की जांच सतर्कता अधिष्ठान (विजलेंस) ने शुरू कर दी है। करीब तीन वर्ष पहले विद्युत अभियंताओं की मिलीभगत से उपभोक्ताओं के जमा किए गए बिजली बिल की रकम में बंदरबांट करके उसे निकाल लिया गया। विजलेंस टीम इस घोटाले के दौरान वहां तैनात रहे अधीक्षण अभियंता, एक्सईएन समेत अन्य विद्युत अफसरों की भूमिका तलाश रही है। इन अफसरों को नोटिस भी भेजा गया है।
महोबा में वर्ष 2017 से 2019 के बीच सरकारी खजाने को तगड़ी चपत लगाई गई थी। बिजली विभाग के कैशियर, टीजी आशीष गुप्ता, जेई अजीत कुमार आदि ने उपभोक्ताओं की ओर से जमा रकम को सरकारी खजाने में न जमा करके उसे निकाल लिया। आरोपियों ने उपभोक्ताओं को फर्जी भुगतान रसीदें भी थमा दीं। इस वजह से उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं आई लेकिन, आंतरिक शिकायत के बाद इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। पूरे मामले की जांच कराई गई। पड़ताल में पॉवर कारपोरेशन के दफ्तर में रसीद और वाउचर तक नहीं मिले। जांच के दौरान यह पूरा घोटाला करीब तीन करोड़ रुपये का आंका गया। इसके बाद महोबा थाने में टीजी आशीष गुप्ता, जेई अजीत कुमार समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया था। भारी वित्तीय अनियमितता सामने आने से शासन में खलबली मच गई और पिछले दिनों यह पूरा मामला विजलेंस के हवाले कर दिया गया। अब विजलेंस ने इसकी जांच शुरू कर दी है। पॉवर कारपोरेशन के तीन साल पुराने बिल-बाउचर भी खंगाल रही है। वहीं, एसपी विजलेंस (झांसी सर्किल) आलोक शर्मा का कहना है पूरे मामले की पड़ताल शुरू करा दी गई है। उस दौरान तैनात अभियंताओं की भूमिकाएं तलाशी जाएंगी।
विज्ञापन
महोबा में वर्ष 2017 से 2019 के बीच सरकारी खजाने को तगड़ी चपत लगाई गई थी। बिजली विभाग के कैशियर, टीजी आशीष गुप्ता, जेई अजीत कुमार आदि ने उपभोक्ताओं की ओर से जमा रकम को सरकारी खजाने में न जमा करके उसे निकाल लिया। आरोपियों ने उपभोक्ताओं को फर्जी भुगतान रसीदें भी थमा दीं। इस वजह से उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं आई लेकिन, आंतरिक शिकायत के बाद इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। पूरे मामले की जांच कराई गई। पड़ताल में पॉवर कारपोरेशन के दफ्तर में रसीद और वाउचर तक नहीं मिले। जांच के दौरान यह पूरा घोटाला करीब तीन करोड़ रुपये का आंका गया। इसके बाद महोबा थाने में टीजी आशीष गुप्ता, जेई अजीत कुमार समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया था। भारी वित्तीय अनियमितता सामने आने से शासन में खलबली मच गई और पिछले दिनों यह पूरा मामला विजलेंस के हवाले कर दिया गया। अब विजलेंस ने इसकी जांच शुरू कर दी है। पॉवर कारपोरेशन के तीन साल पुराने बिल-बाउचर भी खंगाल रही है। वहीं, एसपी विजलेंस (झांसी सर्किल) आलोक शर्मा का कहना है पूरे मामले की पड़ताल शुरू करा दी गई है। उस दौरान तैनात अभियंताओं की भूमिकाएं तलाशी जाएंगी।
विज्ञापन