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तेल की आड़ में हर दिन खजाने को 35 हजार की चपत
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झांसी। डीजल-पेट्रोल की आड़ में नगर निगम खजाने को हर दिन करीब 35 हजार रुपये की तगड़ी चपत लगाई जा रही है। कार्यकारिणी बैठक के दौरान पार्षदों ने इस गड़बड़ी का खुलासा किया। पार्षदों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़े लेकिन, निगम अफसरों के पास कोई जवाब नहीं था। वाहनों की लॉक बुक मांगी गई। अफसर इसे भी नहीं दिखा सके। पार्षदों ने यह लॉकबुक भी सदन के पटल पर रख दी। इसके बाद कार्यकारिणी ने ईंधन के मद में पांच करोड़ रुपये बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को नामंजूर करके सिर्फ तीन करोड़ रुपये का ही इजाफा किया।
नगर निगम ने पुनरीक्षित बजट में पेट्रोल, डीजल के मद में पांच करोड़ को बढ़ाकर दस करोड़ करने का प्रावधान किया। पार्षद महेश गौतम समेत अन्य पार्षदों ने इस पर एतराज जताते हुए इसका विरोध करने लगे। पार्षदों का कहना था कि स्मार्ट सिटी मिशन की गाड़ियों से 26 अगस्त से कूड़ा उठवाया जा रहा। अधिकांश वार्डों में नगर निगम की गाड़ियां नहीं जा रहीं। ऐसे में बढ़ोत्तरी के बजाए पेट्रोल-डीजल की खपत कम होनी चाहिए। पार्षदों का कहना था नगर आयुक्त की रोक के बावजूद जेसीबी को कागज में दो बार चलाया जा रहा है। एक जेसीबी पर रोजाना साठ लीटर डीजल की खपत दिखाई जा रही जबकि एक जेसीबी सिर्फ एक घंटे में पांच लीटर खपत करती है। ऐसे में 12 घंटे रोजाना झांसी की किस जगह पर जेसीबी काम कर रही है। इसका जवाब निगम अफसरों के पास नहीं था।
पार्षदों ने लॉक बुक की मांग की लेकिन, निगम अफसर उसको भी सामने नहीं ला सके। लॉकबुक की प्रति पार्षदों ने ही सदन के सामने रख दी। महापौर रामतीर्थ सिंघल ने भी गहरी नाराजगी जताते हुए गड़बड़ी पर अफसरों को फटकार लगाई। महापौर ने कहाकि जब बजट मेें 500 लाख का प्रावधान था, तब किसकी इजाजत से 540.93 लाख खर्च किए गए। निगम अफसरों के पास कोई जवाब न होने से कार्यकारिणी ने डीजल-पेट्रोल की बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को ठुकराकर उसमें कटौती कर दी।
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नगर निगम ने पुनरीक्षित बजट में पेट्रोल, डीजल के मद में पांच करोड़ को बढ़ाकर दस करोड़ करने का प्रावधान किया। पार्षद महेश गौतम समेत अन्य पार्षदों ने इस पर एतराज जताते हुए इसका विरोध करने लगे। पार्षदों का कहना था कि स्मार्ट सिटी मिशन की गाड़ियों से 26 अगस्त से कूड़ा उठवाया जा रहा। अधिकांश वार्डों में नगर निगम की गाड़ियां नहीं जा रहीं। ऐसे में बढ़ोत्तरी के बजाए पेट्रोल-डीजल की खपत कम होनी चाहिए। पार्षदों का कहना था नगर आयुक्त की रोक के बावजूद जेसीबी को कागज में दो बार चलाया जा रहा है। एक जेसीबी पर रोजाना साठ लीटर डीजल की खपत दिखाई जा रही जबकि एक जेसीबी सिर्फ एक घंटे में पांच लीटर खपत करती है। ऐसे में 12 घंटे रोजाना झांसी की किस जगह पर जेसीबी काम कर रही है। इसका जवाब निगम अफसरों के पास नहीं था।
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पार्षदों ने लॉक बुक की मांग की लेकिन, निगम अफसर उसको भी सामने नहीं ला सके। लॉकबुक की प्रति पार्षदों ने ही सदन के सामने रख दी। महापौर रामतीर्थ सिंघल ने भी गहरी नाराजगी जताते हुए गड़बड़ी पर अफसरों को फटकार लगाई। महापौर ने कहाकि जब बजट मेें 500 लाख का प्रावधान था, तब किसकी इजाजत से 540.93 लाख खर्च किए गए। निगम अफसरों के पास कोई जवाब न होने से कार्यकारिणी ने डीजल-पेट्रोल की बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को ठुकराकर उसमें कटौती कर दी।
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