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UGC: इक्विटी कानून के विरोध में आए बीजेपी के पूर्व मंत्री, कहा- इसे वापस नहीं लिया तो दे दूंगा त्यागपत्र
Tue, 27 Jan 2026 12:53 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 27 Jan 2026 12:53 PM IST
सार
पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने सोशल मीडिया के माध्यम से यूजीसी के नए कानून पर विराेध जताया है। उन्होंने लिखा कि यूजीसी के प्रावधानों का मैं खुला विरोध करता हूं और प्रधानमंत्री से निवेदन करता हूं कि इसे वापस कराएं।
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पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए इक्विटी कानून के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं किया गया तो वह भाजपा से त्यागपत्र दे देंगे।
वंदेमातरम लागू करने पर 27 साल पहले गंवा दी थी कुर्सी
कल्याण सिंह सरकार में रवींद्र शुक्ल बेसिक शिक्षा मंत्री थे। सत्ता में रहने के दौरान वंदेमातरम गीत को उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में अनिवार्य किए जाने पर 27 साल पहले उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। केंद्र की साझा सरकार में शामिल दलों के दबाव में प्रदेश सरकार को यह आदेश भी वापस लेना पड़ा था। अब यूजीसी की ओर से लागू नए इक्विटी कानून पर भी पूर्व मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
जातिगत खाई गहरी होगी- पूर्व मंत्री
वहीं, अमर उजाला से बातचीत में पूर्व मंत्री बोले कि यूजीसी का नया नियम जातीय संघर्ष का प्रेरक बनेगा। इससे जातिगत खाई गहरी होगी। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के परिसर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे। रोज लड़ाई और प्राथमिकी दर्ज होगी। ये सब किस सीमा तक जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक तरफ कहा जा रहा है कि सारे हिंदू समाज को बचाने के लिए जातिवाद समाप्त होना चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि जातिगत खाई बढ़े नहीं, बल्कि घटे। इसलिए गहन समीक्षा करके सभी वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। सबका साथ, सबका विकास का तात्पर्य ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर को एकतरफ करके कोई निर्णय लेना और प्रताड़ित करना नहीं है। इसका तात्पर्य है कि सभी के साथ न्याय हो। बोले कि ये नियम वापस नहीं लिया गया तो भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। इस मामले में जन आक्रोश साफ दिख रहा है। फिर वह लोगों के साथ खड़े होकर इसका विरोध करेंगे।
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अमर उजाला से पूर्व मंत्री की खास बात, वीडियो...
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वंदेमातरम लागू करने पर 27 साल पहले गंवा दी थी कुर्सी
कल्याण सिंह सरकार में रवींद्र शुक्ल बेसिक शिक्षा मंत्री थे। सत्ता में रहने के दौरान वंदेमातरम गीत को उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में अनिवार्य किए जाने पर 27 साल पहले उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। केंद्र की साझा सरकार में शामिल दलों के दबाव में प्रदेश सरकार को यह आदेश भी वापस लेना पड़ा था। अब यूजीसी की ओर से लागू नए इक्विटी कानून पर भी पूर्व मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
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जातिगत खाई गहरी होगी- पूर्व मंत्री
वहीं, अमर उजाला से बातचीत में पूर्व मंत्री बोले कि यूजीसी का नया नियम जातीय संघर्ष का प्रेरक बनेगा। इससे जातिगत खाई गहरी होगी। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के परिसर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे। रोज लड़ाई और प्राथमिकी दर्ज होगी। ये सब किस सीमा तक जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक तरफ कहा जा रहा है कि सारे हिंदू समाज को बचाने के लिए जातिवाद समाप्त होना चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि जातिगत खाई बढ़े नहीं, बल्कि घटे। इसलिए गहन समीक्षा करके सभी वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। सबका साथ, सबका विकास का तात्पर्य ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर को एकतरफ करके कोई निर्णय लेना और प्रताड़ित करना नहीं है। इसका तात्पर्य है कि सभी के साथ न्याय हो। बोले कि ये नियम वापस नहीं लिया गया तो भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। इस मामले में जन आक्रोश साफ दिख रहा है। फिर वह लोगों के साथ खड़े होकर इसका विरोध करेंगे।
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अमर उजाला से पूर्व मंत्री की खास बात, वीडियो...
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पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल की फेसबुक पर पोस्ट
- फोटो : फेसबुक
सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख जताया विरोध
मंगलवार को उन्होंने एक के बाद एक तीन पोस्ट सोशल मीडिया पर किए। कहा कि यूजीसी के प्रावधानों का मैं खुला विरोध करता हूं। जन-जन के चहेते प्रधानमंत्री से निवेदन करता हूं कि इसे वापस कराएं। 15 वर्ष की आयु से केवल संघ को जी रहा हूं पर धैर्य जवाब दे रहा है। दूसरी पोस्ट में लिखा कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं किया गया तो मैं भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। फिर तीसरी पोस्ट में लिखा कि एक बार वंदेमातरम का सम्मान बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था अब सनातन समाज को जाति संघर्ष से बचाने के लिए बलिदान देने को तैयार हूं। उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर समर्थकों द्वारा जमकर शेयर/ वायरल भी की जा रही है।
मंगलवार को उन्होंने एक के बाद एक तीन पोस्ट सोशल मीडिया पर किए। कहा कि यूजीसी के प्रावधानों का मैं खुला विरोध करता हूं। जन-जन के चहेते प्रधानमंत्री से निवेदन करता हूं कि इसे वापस कराएं। 15 वर्ष की आयु से केवल संघ को जी रहा हूं पर धैर्य जवाब दे रहा है। दूसरी पोस्ट में लिखा कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं किया गया तो मैं भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। फिर तीसरी पोस्ट में लिखा कि एक बार वंदेमातरम का सम्मान बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था अब सनातन समाज को जाति संघर्ष से बचाने के लिए बलिदान देने को तैयार हूं। उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर समर्थकों द्वारा जमकर शेयर/ वायरल भी की जा रही है।