फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Two rare cases of Heterotaxy Syndrome found in Medical College

Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में मिले हेटरोटैक्सी सिंड्रोम के दो दुर्लभ मामले

Sat, 02 Aug 2025 01:29 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Aug 2025 01:29 AM IST
विज्ञापन
Two rare cases of Heterotaxy Syndrome found in Medical College
- डॉक्टर बोले- ऐसे मरीजों को फेफड़े का संक्रमण से लेकर हृदय संबंधी रोग होने का खतरा ज्यादा
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हाल में जांच के दौरान हेटरोटैक्सी सिंड्रोम के दो दुर्लभ मामले सामने आए हैं। दिल, लिवर, फेफड़े से लेकर तिल्ली, पित्ताशय तक सामान्य से बिल्कुल अलग स्थान और आकार के मिले। ये देखकर डॉक्टर भी आश्चर्यचकित रह गए। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों को बार-बार फेफड़े में संक्रमण और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।
सामान्य सा महसूस होने वाला पेट का हल्का दर्द भी शरीर की जन्मजात संरचना में छिपी जटिल असामान्यता का संकेत हो सकता है। मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रचना चौरसिया का कहना है कि हेटरोटैक्सी सिंड्रोम बहुत दुर्लभ होता है। आमतौर पर इसकी बचपन में ही पहचान हो जाती है। मगर, हाल में सामने आए 45-45 साल के महिला और पुरुष के मामलों ने साबित किया है कि वयस्कों में भी यह छिपा रह सकता है। समय पर सटीक जांच से न सिर्फ इसका पता चलता है, बल्कि भविष्य की जटिलताओं को भी रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि 25 हजार की जांच करने पर कोई एक मरीज इस सिंड्रोम का मिलता है।
विज्ञापन

चिकित्सकों ने बताया कि इन दोनों मरीजों को बार-बार पेट में हल्का दर्द और अपच की शिकायत थी। इन मरीजों का पहले अल्ट्रासाउंड किया तो रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दिल सीने के बिल्कुल बीच में था। दिल के चार चैंबर (कक्ष) होते हैं और ये अलग-अलग आकार के होते हैं। मगर, इनमें चारों कक्ष एक समान थे। दोनों का ही लिवर दोनों ओर फैला हुआ मिला। पित्ताशय दायीं ओर की जगह मध्य में था। बायीं ओर तिल्ली नहीं दिखी, लेकिन दायीं ओर तिल्ली जैसे कई छोटी-छोटी संरचनाएं नजर आईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

मरीजों के सीटी स्कैन से साफ हुआ कि आंतें गलत दिशा में मुड़ी हुई मिलीं। आंतरिक अंगों की असामान्य स्थिति सामने आई। पेट दायीं ओर और एपेंडिक्स मध्य रेखा में पाई गई। फेफड़ों में भी विसंगति दिखी। मरीजों को जरूरी जांचें और चिकित्सीय सलाह दी गई है। उन्हें बताया कि जब भी हृदय से जुड़ी परेशानी आए तो कॉर्डियोलॉजिस्ट को अपने दिल के स्थान की स्थिति के बारे में जरूर बताएं।

बच्चों में पहचान से कारगर इलाज संभव
डॉ. रचना का कहना है कि बच्चों में जन्मजात पेट की संरचनात्मक विकृतियां समय पर पहचान ली जाएं तो उनका समय पर इलाज और उसका बेहतर परिणाम आना संभव है। इन विषमताओं का पता लगाने में अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन का संयोजन अब चिकित्सीय मानक बनता जा रहा है।

क्या है हेटरोटैक्सी सिंड्रोम
यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें शरीर के आंतरिक अंग सामान्य स्थिति में नहीं होते। यह स्थिति कई बार बचपन में हृदय रोगों के रूप में सामने आती है। मगर कई बार बिना लक्षण के वयस्क अवस्था तक छिपी रहती है। इस बीमारी की जांच के लिए कॉर्डियोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक सर्जन, गैस्ट्रो एंट्रोलॉजिस्ट और संक्रमण रोकथाम विशेषज्ञ की टीम शामिल होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed