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शैली ने दो दिन पहले ही मां से कह दिया था पदक जीतूंगी
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झांसी। मां अहमदाबाद में चल रहे राष्ट्रीय खेल के दौरान सोमवार को लंबी कूद का फाइनल मुकाबला होना है। इसके लिए मैंने जमकर प्रैक्टिस की है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार फिर पदक जीतूंगी। आत्मविश्वास से लबरेज एथलीट शैली सिंह ने दो दिन पहले मां से हुई फोन पर बातचीत के दौरान ये बात कही थी।
पारीछा की रहने वाली शैली की मां विनीता सिंह ने बताया कि सोमवार को शाम से लंबी कूद का फाइनल मैच शुरू होना था। वैसे तो वह रोज ही पूजा करती हैं मगर अष्टमी पर बेटी की सफलता के लिए उन्होंने विशेष पूजा अर्चना की। ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी बेटी पदक जीतने में कामयाब हो जाए। मां की दुआओं का असर यूं हुआ कि शैली ने 6.28 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम कर लिया। पदक जीतने के बाद सबसे पहले शैली ने मां को फोन करके इसकी जानकारी दी। मां ने जैसे ही शैली की जीत की खबर सुनी तो खुशी के आंसू छलक पड़े।
मां की साड़ी को रस्सी बनाकर खेतों में कूदती थी शैली
शैली सिंह का शुरू से ही खेल के प्रति रुझान था। मगर बचपन बहुत परेशानियों में गुजरा। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने से मां ने कपड़े सिलकर शैली समेत तीन बच्चों को पाला। गांव में खेल मैदान नहीं था तो शैली ने खेत पर ही प्रैक्टिस की। परिवार के लोगों ने बताया कि खेत पर जिस जगह वह कूदने की प्रैक्टिस करती थी वहां खेत को समतल भी खुद ने ही किया था। उसके पास शुरूआत में तो रस्सी भी नहीं थी। मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती रही। 2019 में बंगलूरू में एथलीट रहीं अंजू बॉबी जॉर्ज की एकेडमी में प्रैक्टिस शुरू कर दी। पिछले साल अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शैली ने रजत पदक जीतकर देश के नाम रोशन कर दिया।
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पारीछा की रहने वाली शैली की मां विनीता सिंह ने बताया कि सोमवार को शाम से लंबी कूद का फाइनल मैच शुरू होना था। वैसे तो वह रोज ही पूजा करती हैं मगर अष्टमी पर बेटी की सफलता के लिए उन्होंने विशेष पूजा अर्चना की। ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी बेटी पदक जीतने में कामयाब हो जाए। मां की दुआओं का असर यूं हुआ कि शैली ने 6.28 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम कर लिया। पदक जीतने के बाद सबसे पहले शैली ने मां को फोन करके इसकी जानकारी दी। मां ने जैसे ही शैली की जीत की खबर सुनी तो खुशी के आंसू छलक पड़े।
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मां की साड़ी को रस्सी बनाकर खेतों में कूदती थी शैली
शैली सिंह का शुरू से ही खेल के प्रति रुझान था। मगर बचपन बहुत परेशानियों में गुजरा। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने से मां ने कपड़े सिलकर शैली समेत तीन बच्चों को पाला। गांव में खेल मैदान नहीं था तो शैली ने खेत पर ही प्रैक्टिस की। परिवार के लोगों ने बताया कि खेत पर जिस जगह वह कूदने की प्रैक्टिस करती थी वहां खेत को समतल भी खुद ने ही किया था। उसके पास शुरूआत में तो रस्सी भी नहीं थी। मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती रही। 2019 में बंगलूरू में एथलीट रहीं अंजू बॉबी जॉर्ज की एकेडमी में प्रैक्टिस शुरू कर दी। पिछले साल अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शैली ने रजत पदक जीतकर देश के नाम रोशन कर दिया।
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