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- बारिश से फसलों को नुकसान
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झांसी। अगस्त माह में कुदरत की मार झेल चुके जिले के किसानों पर बीते दिनों रविवार और सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने वज्रपात किया है। जिले के कई हिस्सों में उड़द, मूंग और धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से किसानों को हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। बावजूद, किसानों में निराशा है। उनका कहना है कि पहले हुई क्षति का अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। अगर यही स्थिति रही तो उनके लिए आगामी रबी सीजन में बुवाई करना तक मुश्किल हो जाएगा।
कुदरत की बेरुखी की वजह से चालू खरीफ सीजन किसानों पर भारी गुजरा है। मुनाफा तो दूर की बात, लागत निकालने तक के लाले पड़े हुए हैं। चूंकि, इस बार मानसून देरी से आया था। लिहाजा, बुवाई में भी देरी हुई। अन्नदाताओं ने जैसे-तैसे फसलें तैयार की, लेकिन अगस्त माह में बारिश आफत बनकर खेतों पर टूट पड़ी थी। मूसलाधार बारिश की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। राजस्व विभाग द्वारा किए गए सर्वे में एक लाख 82 हजार किसान प्रभावित पाए गए हैं, जिन्हें 95 करोड़ 71 लाख रुपये की क्षति हुई है। प्रशासन की ओर से इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। लेकिन, अब तक किसानों के हाथ मुआवजा राशि नहीं आई है। कुदरत की इस मार के बाद एक बार फिर किसान अपनी बचीखुची फसलों को सहेजने में जुट गए थे, लेकिन मानसूनी सीजन के विदा हो जाने के बाद अचानक रविवार को एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया। रविवार की रात आठ बजे मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जो सोमवार की सुबह 10 बजे तक जारी रही। इसके बाद भी बारिश नहीं थमी। सोमवार को दिन में कई बार भारी बारिश हुई। इससे फसलें बुरी तरह से बर्बाद हो गईं।
फसलों को अनुमानित नुकसान
--------------------------
फसल बुवाई क्षेत्रफल (हेक्टेअर में) नुकसान
उड़द 71,250 80 प्रतिशत
मूंग 4,820 60 प्रतिशत
धान 4,650 70 प्रतिशत
तिल 98,500 90 प्रतिशत
मूंगफली 25,500 30 प्रतिशत
इतने किसानों को हुआ नुकसान
तहसील किसान नुकसान
----------------------------------------
झांसी 30,800 16.66 करोड़
मोंठ 27,000 13.93 करोड़
मऊरानीपुर 46,000 21.18 करोड़
गरौठा 41,000 15 करोड़
टहरौली 36,000 28 करोड़
आगामी सीजन के लिए सरसों व मटर की बुवाई कर ली गई थी। लेकिन, दो दिन की बारिश में सब साफ हो गया। किसानों को शत प्रतिशत नुकसान हुआ है।
- जगराम सिंह, अस्ता
जल्द बुवाई की वजह से धान की फसल काट ली थी, जो खलिहान में रखी हुई थी। मौसम साफ बना हुआ था। लेकिन, अचानक हुई बारिश की वजह से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
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- प्रशांत यादव, पिपरा
मूंगफली की फसल पर बारिश भारी गुजरी है। मूंगफली काली पड़ गई है। जबकि, कटी रखी फसल अंकुरित हो गई है, जो अब किसी काम की नहीं रही है।
- मानसिंह चौहान, बामौर
पहले अगस्त में फसलें बर्बाद हो गईं थीं। बचीखुची फसलों को पिछले दो दिनों की बारिश ने नष्ट कर दिया है। मुनाफा तो दूर की बात लागत तक निकलने के लाले पड़े हुए हैं।
- जितेंद्र प्रताप सिंह पटेल, भड़ोखर
बारिश के साथ आंधी चलने की वजह से धान की फसल खेतों में बिछ गई है। महीनों की मेहनत पर दो दिन की बारिश ने पानी फेर दिया है। भारी नुकसान हुआ है।
- अविनाश भार्गव, गढ़मऊ
किसानों की मेहनत पर तो अगस्त माह में ही पानी फिर गया था। तिल पूरी तरह से खत्म हो गई थी। लेकिन, अब उड़द, मूंग की फसल भी बर्बाद हो गई है।
- रविंद्र राजपूत, गोरारी
इस बार मानसूनी काफी देरी से आया था। ऐसे में किसानों ने खरीफ की बुवाई भी देरी से की थी। फसल देर से तैयार हुई और उसकी कटाई भी देरी से हुई। इन्हीं सब कारणों की वजह से बीते दो दिन हुई मूसलाधार बारिश किसानों पर भारी गुजरी है। उड़द, मूंग अगस्त की बारिश में ही खासी प्रभावित हो गईं थीं। कसर बीते दो दिनों की बारिश ने पूरी कर दी। इसके अलावा तिल तो लगभग पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। हालांकि, आगामी रबी सीजन के लिहाज से ये बारिश लाभदायक साबित होगी। पलेवा करने में डीजल की भारी बचत होगी। रबी में चने-सरसों के लिए तो ये बारिश वरदान साबित होगी।
- प्रो. अरविंद कुमार, कुलपति - रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी।
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कुदरत की बेरुखी की वजह से चालू खरीफ सीजन किसानों पर भारी गुजरा है। मुनाफा तो दूर की बात, लागत निकालने तक के लाले पड़े हुए हैं। चूंकि, इस बार मानसून देरी से आया था। लिहाजा, बुवाई में भी देरी हुई। अन्नदाताओं ने जैसे-तैसे फसलें तैयार की, लेकिन अगस्त माह में बारिश आफत बनकर खेतों पर टूट पड़ी थी। मूसलाधार बारिश की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। राजस्व विभाग द्वारा किए गए सर्वे में एक लाख 82 हजार किसान प्रभावित पाए गए हैं, जिन्हें 95 करोड़ 71 लाख रुपये की क्षति हुई है। प्रशासन की ओर से इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। लेकिन, अब तक किसानों के हाथ मुआवजा राशि नहीं आई है। कुदरत की इस मार के बाद एक बार फिर किसान अपनी बचीखुची फसलों को सहेजने में जुट गए थे, लेकिन मानसूनी सीजन के विदा हो जाने के बाद अचानक रविवार को एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया। रविवार की रात आठ बजे मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जो सोमवार की सुबह 10 बजे तक जारी रही। इसके बाद भी बारिश नहीं थमी। सोमवार को दिन में कई बार भारी बारिश हुई। इससे फसलें बुरी तरह से बर्बाद हो गईं।
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फसलों को अनुमानित नुकसान
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फसल बुवाई क्षेत्रफल (हेक्टेअर में) नुकसान
उड़द 71,250 80 प्रतिशत
मूंग 4,820 60 प्रतिशत
धान 4,650 70 प्रतिशत
तिल 98,500 90 प्रतिशत
मूंगफली 25,500 30 प्रतिशत
इतने किसानों को हुआ नुकसान
तहसील किसान नुकसान
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झांसी 30,800 16.66 करोड़
मोंठ 27,000 13.93 करोड़
मऊरानीपुर 46,000 21.18 करोड़
गरौठा 41,000 15 करोड़
टहरौली 36,000 28 करोड़
आगामी सीजन के लिए सरसों व मटर की बुवाई कर ली गई थी। लेकिन, दो दिन की बारिश में सब साफ हो गया। किसानों को शत प्रतिशत नुकसान हुआ है।
- जगराम सिंह, अस्ता
जल्द बुवाई की वजह से धान की फसल काट ली थी, जो खलिहान में रखी हुई थी। मौसम साफ बना हुआ था। लेकिन, अचानक हुई बारिश की वजह से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
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- प्रशांत यादव, पिपरा
मूंगफली की फसल पर बारिश भारी गुजरी है। मूंगफली काली पड़ गई है। जबकि, कटी रखी फसल अंकुरित हो गई है, जो अब किसी काम की नहीं रही है।
- मानसिंह चौहान, बामौर
पहले अगस्त में फसलें बर्बाद हो गईं थीं। बचीखुची फसलों को पिछले दो दिनों की बारिश ने नष्ट कर दिया है। मुनाफा तो दूर की बात लागत तक निकलने के लाले पड़े हुए हैं।
- जितेंद्र प्रताप सिंह पटेल, भड़ोखर
बारिश के साथ आंधी चलने की वजह से धान की फसल खेतों में बिछ गई है। महीनों की मेहनत पर दो दिन की बारिश ने पानी फेर दिया है। भारी नुकसान हुआ है।
- अविनाश भार्गव, गढ़मऊ
किसानों की मेहनत पर तो अगस्त माह में ही पानी फिर गया था। तिल पूरी तरह से खत्म हो गई थी। लेकिन, अब उड़द, मूंग की फसल भी बर्बाद हो गई है।
- रविंद्र राजपूत, गोरारी
इस बार मानसूनी काफी देरी से आया था। ऐसे में किसानों ने खरीफ की बुवाई भी देरी से की थी। फसल देर से तैयार हुई और उसकी कटाई भी देरी से हुई। इन्हीं सब कारणों की वजह से बीते दो दिन हुई मूसलाधार बारिश किसानों पर भारी गुजरी है। उड़द, मूंग अगस्त की बारिश में ही खासी प्रभावित हो गईं थीं। कसर बीते दो दिनों की बारिश ने पूरी कर दी। इसके अलावा तिल तो लगभग पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। हालांकि, आगामी रबी सीजन के लिहाज से ये बारिश लाभदायक साबित होगी। पलेवा करने में डीजल की भारी बचत होगी। रबी में चने-सरसों के लिए तो ये बारिश वरदान साबित होगी।
- प्रो. अरविंद कुमार, कुलपति - रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी।