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तीसरी रेल लाइन बढ़ाएगी ट्रेनों की गति
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:52 AM IST
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train, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। मथुरा- झांसी- बीना के बीच तीसरी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ेगी। सफर का समय बचेगा और ट्रेनों की लेटलतीफी पर अंकुश लगेगा। इसके बाद कुछ और नई ट्रेनों को भी चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने मथुरा से झांसी के बीच 273.80 किलोमीटर और झांसी से बीना के बीच 152.25 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन को मंजूरी दे दी। इसका प्रस्ताव दो साल पहले बना था। तीसरी नई रेल लाइन बिछाने में मथुरा- झांसी के बीच 4,377 करोड़ और झांसी- बीना के मध्य 2,274 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अब रेल विकास निगम लिमिटेड शीघ्र ही इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। अगले छह महीने के भीतर नई रेल लाइन पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि झांसी रेल मंडल की दो लाइनों पर लगातार यात्री, मालगाड़ियों की संख्या और संचालन बढ़ने से लोड बढ़ गया है। इस कारण आए दिन रेल ट्रैफिक बाधित हो जाता है। महत्वपूर्ण ट्रेनों को रास्ता देने के लिए कुछ ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या फिर उन्हें रोकना पड़ता है। पिछले 16 साल के भीतर झांसी रेल मंडल में 46 प्रतिशत गाड़ियों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में झांसी-बीना बाइस प्रतिशत और आगरा-झांसी सेक्शन में बारह फीसदी ओवर ट्रैफिक है। अब तीसरी लाइन बिछने के बाद समस्या का समाधान किसी हद तक हो जाएगा।
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‘ट्रैफिक लोड को देखते हुए तीसरी रेल लाइन बिछना बहुत आवश्यक हो गया है। सीसीईए से मंजूरी मिलने से अब तीसरी लाइन का रास्ता साफ हो गया है। शीघ्र ही काम शुरू होगा।’
गिरीश कंचन, जनसंपर्क अधिकारी।
अभी ये समस्याएं
- मथुरा- झांसी- बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है।
-आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं। क्योंकि लोड अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है।
-लोड के कारण कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- इन रूटों पर लोड को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। लेकिन दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं।
- पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन लेकर बंद करना पड़ता है। इसके लिए कभी-कभी लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है।
अब मिलेगी राहत
- इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
- मालगाड़ियों के लिए एक बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी।
- नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा
- मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा।
- दुर्घटना पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।
देखें हालात
झांसी रेल मंडल में रोज करीब सवा सौ यात्री ट्रेन और एक सौ मालगाड़ियों का संचालन होता है। इसमें ग्वालियर से झांसी 56, बीना से झांसी 65, कानपुर से झांसी 26, झांसी से कानपुर 26, इलाहाबाद से झांसी 11 और झांसी से इलाहाबाद 11 गाड़ियों का संचालन होता है। इनमें तीस साप्ताहिक और सप्ताह में दो या तीन दिन चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। सबसे अधिक ट्रैफिक आगरा- भोपाल मेन लाइन पर है। इस लाइन पर हर पांच से दस मिनट में सवारी या मालगाड़ी दौड़ती रहती है।
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बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने मथुरा से झांसी के बीच 273.80 किलोमीटर और झांसी से बीना के बीच 152.25 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन को मंजूरी दे दी। इसका प्रस्ताव दो साल पहले बना था। तीसरी नई रेल लाइन बिछाने में मथुरा- झांसी के बीच 4,377 करोड़ और झांसी- बीना के मध्य 2,274 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अब रेल विकास निगम लिमिटेड शीघ्र ही इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। अगले छह महीने के भीतर नई रेल लाइन पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
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गौरतलब है कि झांसी रेल मंडल की दो लाइनों पर लगातार यात्री, मालगाड़ियों की संख्या और संचालन बढ़ने से लोड बढ़ गया है। इस कारण आए दिन रेल ट्रैफिक बाधित हो जाता है। महत्वपूर्ण ट्रेनों को रास्ता देने के लिए कुछ ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या फिर उन्हें रोकना पड़ता है। पिछले 16 साल के भीतर झांसी रेल मंडल में 46 प्रतिशत गाड़ियों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में झांसी-बीना बाइस प्रतिशत और आगरा-झांसी सेक्शन में बारह फीसदी ओवर ट्रैफिक है। अब तीसरी लाइन बिछने के बाद समस्या का समाधान किसी हद तक हो जाएगा।
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‘ट्रैफिक लोड को देखते हुए तीसरी रेल लाइन बिछना बहुत आवश्यक हो गया है। सीसीईए से मंजूरी मिलने से अब तीसरी लाइन का रास्ता साफ हो गया है। शीघ्र ही काम शुरू होगा।’
गिरीश कंचन, जनसंपर्क अधिकारी।
अभी ये समस्याएं
- मथुरा- झांसी- बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है।
-आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं। क्योंकि लोड अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है।
-लोड के कारण कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- इन रूटों पर लोड को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। लेकिन दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं।
- पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन लेकर बंद करना पड़ता है। इसके लिए कभी-कभी लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है।
अब मिलेगी राहत
- इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
- मालगाड़ियों के लिए एक बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी।
- नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा
- मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा।
- दुर्घटना पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।
देखें हालात
झांसी रेल मंडल में रोज करीब सवा सौ यात्री ट्रेन और एक सौ मालगाड़ियों का संचालन होता है। इसमें ग्वालियर से झांसी 56, बीना से झांसी 65, कानपुर से झांसी 26, झांसी से कानपुर 26, इलाहाबाद से झांसी 11 और झांसी से इलाहाबाद 11 गाड़ियों का संचालन होता है। इनमें तीस साप्ताहिक और सप्ताह में दो या तीन दिन चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। सबसे अधिक ट्रैफिक आगरा- भोपाल मेन लाइन पर है। इस लाइन पर हर पांच से दस मिनट में सवारी या मालगाड़ी दौड़ती रहती है।