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बच्चों में कम होता है खून, डॉक्टर गैर जरूरी जांचें न कराएं : डॉ. एनसी प्रजापति

Sun, 30 Oct 2022 11:32 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 11:32 PM IST
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There is less blood in children, doctors should not conduct unnecessary tests: Dr. NC Prajapati
औरछा हुए दो दिवलीय यूपी पेडीकॉन सम्मेलन में विभिन्न स्थानों से आए चिकित्सकों को सम्मानित किया ग?
झांसी। ओरछा में बाल रोग विशेषज्ञों के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर महानिदेशक डॉ. एनसी प्रजापति ने डॉक्टरों को बच्चों की गैर जरूरी जांचें न कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में खून कम रहता है। ऐसे में जो संभावित बीमारी लग रही है, सिर्फ उसी की जांच कराएं। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जल्द ही दुर्लभ बीमारियों का निशुल्क इलाज होगा। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा जल्द ही फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में न्यू बॉर्न सिक केयर यूनिट शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि भारतीय बाल रोग अकादमी और चिकित्सा शिक्षा विभाग मिलकर राजकीय और निजी अस्पतालों में कार्यरत इंटर्न को बाल मृत्युदर रोकने के लिए हर साल प्रशिक्षण देंगे। ये देश का पहला मॉडल है। ब्यूरो
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2025 तक शिशु मृत्युदर घटा 25 प्रति हजार करना लक्ष्य : डॉ. संजय
झांसी। यूपी पीडियाट्रिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजय निरंजन ने बताया कि नवजात के जन्म के शुरूआती 28 दिनों में होने वाली मृत्यु का अहम कारण सांस लेने में परेशानी, जन्मजात बीमारियां और प्री मैच्योर डिलीवरी होती है। जबकि, एक महीने से 50 दिन के अंदर मृत होने वाले बच्चों में निमोनिया, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, जापानी इंसेफिलाइटिस, कुपोषण, टीबी समेत अन्य कारण मिलते हैं। बताया कि अभी प्रदेश में एक हजार जन्में बच्चों में शिशु मृत्युदर 59 है। जिसे 2025 तक घटाकर 25 प्रति हजार लाना है। ब्यूरो
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प्रदेश के 12 जिलों में सुधारी जा रही बच्चों की सेहत : डॉ. अलका
झांसी। प्रदेश की बाल रोग अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के 12 जिलों में बच्चों से संबंधित समस्या ज्यादा हैं। इन पर फोकस है। पहले चरण में प्रयागराज, ललितपुर, चित्रकूट, बांदा, सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी में छह गतिविधियां संचालित की जा रही है। इसके तहत स्टाफ को नवजात के पुनर्जीवनीकरण का प्रशिक्षण, कुपोषण मुक्त भारत अभियान, डायरिया से मृत्यु रोकना, बिना वजह एंटीबायोटिक दवाएं न देना आदि शामिल है। ब्यूरो
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