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झांसी में भी कचहरी की सुरक्षा में हैं छेद ही छेद

Tue, 19 Oct 2021 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 12:30 AM IST
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There are holes in the security of the court in Jhansi too
झांसी। देश और प्रदेश की कचहरी सुरक्षित नहीं है। एक महीने पहले दिल्ली की एक अदालत में दो लोेगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि, सोमवार को शाहजहांपुर के कचहरी परिसर में एक वकील की हत्या कर दी गई। ऐसे में झांसी में भी कचहरी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि झांसी कचहरी में सुरक्षा के इंतजाम तो कई किए गए हैं, लेकिन ये केवल दिखावे तक ही सीमित नजर आते हैं। कचहरी में तैनात पुलिस किसी को भी आने-जाने से रोकती या टोकती नहीं है। पुलिस के जवान मेटल डिटेक्टर की बीप-बीप की आवाज की भी अनदेखी कर देते हैं। इतना ही नहीं, कचहरी में लगे स्कैनर का भी यदा-कदा उपयोग होता ही नजर आता है। धड़ल्ले से बैग या अन्य सामान के साथ लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इसे लेकर अधिवक्ताओं में भी रोष है।
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समय: शाम 4.05 बजे
जजी के गेट से नदारद थे पुलिस कर्मी
कचहरी की सुरक्षा के इंतजामों को परखने पहुंची अमर उजाला की टीम को जजी का मुख्य द्वार खुला मिला। लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। गाड़ियां भी धड़ल्ले से अंदर-बाहर हो रहीं थीं। लेकिन, पुलिस कर्मी नदारद मिले। जानकारी करने पर बताया गया कि बारिश की वजह से पुलिस कर्मी पास में ही एक शेड के नीचे बैठ गए हैं। जबकि, यहां पुलिस कर्मियों के लिए अलग से शेड होना चाहिए था।
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समय: शाम 4.13 बजे
नहीं सुनी जा रही थी मेटल डिटेक्टर की आवाज
जजी बिल्डिंग के मुख्य द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगा हुआ है, जिसकी स्क्रीन व आवाज बता रही थी कि ये उपकरण पूरी तरह से दुरुस्त भी है। पास में ही दो सशस्त्र पुलिस के जवान बैठे हुए थे। वैसे तो ज्यादातर लोग मेटल डिटेक्टर के बीच से न गुजरकर उसके पास से निकल रहे थे। कुछ लोग ही मेटल डिटेक्टर के बीच से गुजर रहे थे। कई बार मेटल डिटेक्टर से बीप-बीप की आवाज आई, लेकिन उसकी अनसुनी कर दी गई। जांच की जहमत किसी ने नहीं उठाई। लोगों की धड़ल्ले से आवाजाही बनी रही।
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समय: शाम 4.15 बजे
बिल्डिंग के भीतर नहीं हो रही थी निगरानी
कचहरी के मुख्य भवन के ऊपर लोगों की बेधड़क आवाजाही बनी हुई थी। भूतल व उसके ऊपरी तलों पर बनीं अदालतों के गलियारों के बीच तमाम लोग यहां से वहां हो रहे थे। वहां उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था। अलग-अलग तलों का पूरा चक्कर काटने के बाद भी किसी ने ध्यान तक नहीं दिया।
समय: शाम 4.25 बजे
खाली पड़ा था स्कैनर, बैग लेकर निकल रहे थे लोग
कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के अलावा कई वादकारी भी अक्सर बैग में अपनी फाइलें व अन्य दस्तावेज लेकर आते हैं। बैग में रखकर किसी संदिग्ध वस्तु को कचहरी में न लाया जा सके, इसके लिए जजी के मुख्य द्वार के दाहिने ओर बनी केबिन में स्कैनर लगाया गया है। यहां पुरुष और महिला पुलिस कर्मचारी तैनात थे। लेकिन, पास से ही बेरोकटोक लोग बैग लेकर निकल रहे थे। उनके सामान की जांच नहीं की जा रही थी।

फोन पर बातें करते देखें जाते हैं पेशी पर आने वाले कैदी
झांसी। जेल से पेशी पर कचहरी आने वाले कैदियों से मिलने अक्सर उनके परिजन व अन्य पहचान वाले पहुंच जाते हैं। कचहरी परिसर में बैठकर वे तसल्ली से घंटों बातचीत करते रहते हैं। उनके साथ लाए हुए मोबाइल से अक्सर कैदी बातें करते देखे जाते हैं। वीडियो कॉल तक कर लेते हैं। जबकि, पूर्व में इस तरह कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें विभिन्न अपराधों में जेल में निरुद्ध कैदियों ने लोगों को धमकाया। पड़ताल में सामने आया कि उन्होंने कॉल कचहरी से की थी। अक्सर आपराधिक मामलों के वादी और प्रतिवादी आमने-सामने भी आ जाते हैं।
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