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सेहत की सवारी से है इनकी यारी
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झांसी। कहीं आने और जाने के लिए बड़ी-बड़ी कार हैं, लेकिन सेहत की सवारी साइकिल से इनकी यारी है। ये कवायद ऊर्जा बचाने और सेहत बनाने के साथ अधीनस्थों और समाज को जागरूक करने के लिए है। जिले में तीन ऐसे अधिकारी हैं, जिनका साइकिलिंग का जुनून लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा है। वे चाहें तो अपनी फिटनेस को दुरुस्त रखने के लिए अन्य उपाय भी कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए साइकिलिंग को चुना है। रोज कई किलोमीटर साइकिलिंग का उनका सफर जब तक पूरा नहीं होता, तब तक उनको दिनचर्या अधूरी सी लगती है। इसके साथ ही जिले के युवाओं में भी तेजी से साइकिलिंग का क्रेज बढ़ा है। एक दौर में जहां साइकिल गरीब वर्ग का वाहन होती थी। वहीं अब फिटनेस के तौर पर धनाढ्य वर्ग की भी सवारी बन रही है।
डीआईजी और उनकी पत्नी साइकिलिंग के शौकीन
बात जब फिटनेस को दुरुस्त रखने की हो तो इसमें अधिकारी वर्ग भी पीछे नहीं है। अपनी सेहत के ठीक रखने के लिए झांसी के डीआईजी जोगेंद्र कुमार और उनकी पत्नी सुमन पुनिया भी साइकिल चलाते हैं। रोज सुबह दंपती अपने आवासीय परिसर में करीब 10-15 किमी साइकिल चलाते हैं। डीआईजी के पास रोड बाइक साइकिल है। इसके साथ ही योग और ध्यान भी करते हैं। वे बताते हैं कि साइकिल चलाने से सेहत ठीक रहती है। उनको यह शौक प्रशासनिक सेवा में आने से पहले से है। डीआईजी तो एक बार साइकिल से सीपरी बाजार थाने का निरीक्षण करने भी पहुंच गए थे।
नगर आयुक्त को पसंद है साइकिल चलाना
साइकिल चलाकर अपने फिटनेस को मजबूत करने में नगर आयुक्त अवनीश राय भी पीछे नहीं हैं। वे रोज करीब 50 किमी साइकिल चलाते हैं। उनके पास स्पोर्ट्स साइकिल है। रोज सुबह जल्दी उठकर वे साइकिल लेकर निकल पड़ते हैं। कभी ओरछा तो कभी गढ़मऊ तक जाते हैं। उनका कहना है कि अच्छी फिटनेस के लिए साइकिल जरूरी है। साइकिल चलाने से मांसपेशियों की कसरत होने के साथ ही दिमागी कसरत भी हो जाती है।
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सीडीओ भी रोज चलाते हैं साइकिल
जिले के एक और अधिकारी भी साइकिलिंग करने के शौकीन है। सीडीओ शैलेष कुमार भी अपनी फिटनेस के लिए रोज करीब 50 किमी साइकिल चलाते हैं। अपनी रेंजर साइकिल से रोज सुबह वे भी घर से गढ़मऊ तक का सफर तय करते हैं। साइकिलिंग के दौरान वे शहर का हाल भी जान लेते हैं। उनका कहना है कि साइकिल चलाने के अनेक फायदे हैं। खुद को सेहतमंद रखने के साथ ही शहर और देश के पर्यावरण को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।
कोरोना काल के बाद बढ़ा साइकिलिंग का क्रेज
जिले में कोरोना काल के बाद साइकिलिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है। शहर में साइकिल की करीब 10-12 दुकानें हैं। इन दुकानों पर कोरोना काल के बाद साइकिल की खरीद बढ़ गई है। साइकिल विक्रेता वीरेंद्र साहू बताते हैं कि जिले में हर महीने एक से डेढ़ हजार साइकिलें बिक जाती हैं। इनमें स्पोर्ट्स, फैड बाइक, हॉपर साइकिल, रेंजर साइकिल की मांग सबसे अधिक है। मौजूदा समय में युवा वर्ग फिटनेस के लिए स्पोर्ट्स साइकिल को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जिसकी कीमत छह हजार से 15 हजार रुपये तक है। साइकिल विक्रेता अशोक साहू का कहना है कि दो साल पहले साइकिल की मांग इस हद तक कम हो गई थी कि एक साइकिल कंपनी पर ताला पड़ गया। अब कोरोना काल के बाद से साइकिल की मांग में इजाफा हुआ है। अधिकारी, चिकित्सक और युवा वर्ग साइकिल को लेकर दीवाना है।
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डीआईजी और उनकी पत्नी साइकिलिंग के शौकीन
बात जब फिटनेस को दुरुस्त रखने की हो तो इसमें अधिकारी वर्ग भी पीछे नहीं है। अपनी सेहत के ठीक रखने के लिए झांसी के डीआईजी जोगेंद्र कुमार और उनकी पत्नी सुमन पुनिया भी साइकिल चलाते हैं। रोज सुबह दंपती अपने आवासीय परिसर में करीब 10-15 किमी साइकिल चलाते हैं। डीआईजी के पास रोड बाइक साइकिल है। इसके साथ ही योग और ध्यान भी करते हैं। वे बताते हैं कि साइकिल चलाने से सेहत ठीक रहती है। उनको यह शौक प्रशासनिक सेवा में आने से पहले से है। डीआईजी तो एक बार साइकिल से सीपरी बाजार थाने का निरीक्षण करने भी पहुंच गए थे।
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नगर आयुक्त को पसंद है साइकिल चलाना
साइकिल चलाकर अपने फिटनेस को मजबूत करने में नगर आयुक्त अवनीश राय भी पीछे नहीं हैं। वे रोज करीब 50 किमी साइकिल चलाते हैं। उनके पास स्पोर्ट्स साइकिल है। रोज सुबह जल्दी उठकर वे साइकिल लेकर निकल पड़ते हैं। कभी ओरछा तो कभी गढ़मऊ तक जाते हैं। उनका कहना है कि अच्छी फिटनेस के लिए साइकिल जरूरी है। साइकिल चलाने से मांसपेशियों की कसरत होने के साथ ही दिमागी कसरत भी हो जाती है।
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सीडीओ भी रोज चलाते हैं साइकिल
जिले के एक और अधिकारी भी साइकिलिंग करने के शौकीन है। सीडीओ शैलेष कुमार भी अपनी फिटनेस के लिए रोज करीब 50 किमी साइकिल चलाते हैं। अपनी रेंजर साइकिल से रोज सुबह वे भी घर से गढ़मऊ तक का सफर तय करते हैं। साइकिलिंग के दौरान वे शहर का हाल भी जान लेते हैं। उनका कहना है कि साइकिल चलाने के अनेक फायदे हैं। खुद को सेहतमंद रखने के साथ ही शहर और देश के पर्यावरण को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।
कोरोना काल के बाद बढ़ा साइकिलिंग का क्रेज
जिले में कोरोना काल के बाद साइकिलिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है। शहर में साइकिल की करीब 10-12 दुकानें हैं। इन दुकानों पर कोरोना काल के बाद साइकिल की खरीद बढ़ गई है। साइकिल विक्रेता वीरेंद्र साहू बताते हैं कि जिले में हर महीने एक से डेढ़ हजार साइकिलें बिक जाती हैं। इनमें स्पोर्ट्स, फैड बाइक, हॉपर साइकिल, रेंजर साइकिल की मांग सबसे अधिक है। मौजूदा समय में युवा वर्ग फिटनेस के लिए स्पोर्ट्स साइकिल को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जिसकी कीमत छह हजार से 15 हजार रुपये तक है। साइकिल विक्रेता अशोक साहू का कहना है कि दो साल पहले साइकिल की मांग इस हद तक कम हो गई थी कि एक साइकिल कंपनी पर ताला पड़ गया। अब कोरोना काल के बाद से साइकिल की मांग में इजाफा हुआ है। अधिकारी, चिकित्सक और युवा वर्ग साइकिल को लेकर दीवाना है।