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Jhansi News: सिंधिया के कर्ज से बिछी थी रेल की राह, अब बीडा तक पहुंचेगा संपर्क

Tue, 13 Oct 2026 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:21 AM IST
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The railway line was laid using a loan from Scindia; now, connectivity will extend to Beeda.
प्रशांत शर्मा
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झांसी। बुंदेलखंड में रेल नेटवर्क के विस्तार की कहानी करीब डेढ़ सदी पुरानी है। तब सिंधिया रियासत ने ग्वालियर-आगरा रेल लाइन के निर्माण के लिए ब्रिटिश सरकार को 75 लाख रुपये का कर्ज दिया था। अब इसी क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है। बीडा में 38 किलोमीटर लंबी रेल लाइन प्रस्तावित है। इसके तहत पुनावली और राजापुर में रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। यहां प्रस्तावित लॉजिस्टिक पार्क को भी रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
बीडा के सीईओ संजय खत्री के मुताबिक, रेलवे अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। रेल कनेक्टिविटी से संबंधित नक्शा भी फाइनल हो गया है। रेल लाइन के संबंध में रेलवे की ओर से प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। रेल संपर्क विकसित होने से बीडा में उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों की ढुलाई को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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सिंधिया रियासत ने रेलवे के लिए दिया था कर्ज
रेलवे के ऐतिहासिक अभिलेख हिस्ट्री ऑफ इंडियन रेलवेज- कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट के अनुसार, सितंबर 1872 में सिंधिया रियासत ने ब्रिटिश सरकार को ग्वालियर से आगरा के बीच रेल लाइन बनाने के लिए 75 लाख रुपये का कर्ज देने की पेशकश की थी। जनवरी 1873 में इंदौर से नीमच के बीच रेल लाइन के लिए भी इतनी ही राशि देने की पेशकश की गई। ब्रिटिश सरकार ने इन ऋणों को स्वीकार किया था। कर्ज पर चार प्रतिशत ब्याज दिए जाने की शर्त थी।
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इस आर्थिक सहयोग ने मध्य भारत में रेल संपर्क के विस्तार की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। उस दौर में रेल लाइनें बिछाना केवल यातायात का साधन तैयार करना नहीं था, बल्कि शहरों, व्यापारिक केंद्रों और दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने की बड़ी पहल भी थी। करीब डेढ़ सौ साल पहले रेल परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने से शुरू हुआ बुंदेलखंड का रेल विस्तार अब औद्योगिक कनेक्टिविटी की नई जरूरतों से जुड़ रहा है। झांसी और आसपास के क्षेत्रों में पहले विकसित हुआ रेल नेटवर्क जहां क्षेत्र की पहचान बनाने में सहायक रहा, वहीं बीडा की प्रस्तावित रेल लाइन भविष्य के औद्योगिक परिवहन के लिए नई संभावना पेश करती है।

ग्वालियर-आगरा रेल संपर्क से झांसी तक पहुंचा नेटवर्क
ग्वालियर-आगरा रेल संपर्क अलग-अलग चरणों में विकसित हुआ। धौलपुर से आगरा कैंट तक रेल लाइन 10 जनवरी 1878 को शुरू हुई। इसके बाद ग्वालियर से हेतमपुर के बीच 20 दिसंबर 1879 और हेतमपुर से धौलपुर के बीच 15 मई 1881 को रेल सेवा शुरू हुई। आगे चलकर झांसी भी इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बना।

इंडियन मिडलैंड रेलवे ने झांसी को केंद्र में रखकर मध्य भारत और उत्तर भारत के बीच रेल संपर्क विकसित किए। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, भोपाल-झांसी और झांसी-ग्वालियर रेल खंड 1889 में शुरू हुए। झांसी-मानिकपुर रेल लाइन ने बुंदेलखंड के कई क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ा। इस मार्ग के निर्माण में बेतवा, धसान और केन नदियों पर पुल बनाना बड़ी चुनौती थी।

रेल वर्कशॉप से बनी झांसी की औद्योगिक पहचान
रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ झांसी में रेलवे से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ीं। वर्ष 1889 में झांसी रेलवे वर्कशॉप की नींव रखी गई और 25 नवंबर 1895 को इसका उद्घाटन हुआ। यह बुंदेलखंड के शुरुआती बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल थी। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, वर्ष 1909 तक यहां करीब चार हजार लोग काम कर रहे थे। वर्ष 1913 में वर्कशॉप के भीतर थर्मल पावर स्टेशन भी शुरू किया गया।

रेलवे वर्कशॉप और रेल संपर्क ने झांसी को परिवहन के साथ औद्योगिक गतिविधियों का भी केंद्र बनाने में योगदान दिया। आज बीडा में प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी को इसी क्षेत्र की औद्योगिक जरूरतों के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है।


बीडा के उद्योगों के लिए रेल संपर्क अहम
बीडा के उद्योगों को बड़े बाजारों से जोड़ने, माल की आवाजाही सुगम बनाने और परिवहन लागत को नियंत्रित करने में रेल नेटवर्क उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रगति रेलवे बोर्ड के प्रस्ताव पर निर्णय और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
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