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Jhansi News: सोते रहे अफसर, निगम के हाथ से फिसल गई 71 एकड़ जमीन
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झांसी। नगरपालिका से निगम बनाए जाने के बाद इसकी सीमा में ग्राम समाज की सैकड़ों एकड़ जमीन समाहित हुई थी, लेकिन निगम प्रशासन की लापरवाही से करोड़ों रुपये की ये बेशकीमती जमीन अतिक्रमण के साथ अवैध कब्जे की शिकार हो गई। स्थिति यह है कि करीब 71 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे चिह्नित किए जा चुके हैं। महानगर के पॉश इलाकों की बेशकीमती जमीन भी इनमें शामिल है।
7 फरवरी 2002 को नगरपालिका में 15 गांव जुड़ने के बाद उनकी जमीन नगर निगम के खाते में आ गई। उसके स्वामित्व में ग्राम समाज समेत सीलिंग की सरप्लस जमीन भी मर्ज हो गई, लेकिन अभी तक इनकी पैमाइश नहीं कराई गई। निगम अफसर इस जमीन को भुलाए बैठे रहे। इसका फायदा उठाते हुए रसूखदारों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया। सबसे अधिक गरियागांव, बिजौली और करारी में कब्जे हैं। कोछाभांवर, गरिया गांव समेत अलग-अलग जगहों पर 44 हजार स्क्वॉयर फीट भूमि पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों में 20-22 एकड़ भूमि पर कब्जे एवं अतिक्रमण चिह्नित हैं। यही हाल महानगर के भीतरी इलाकों का है।
शहर में सबसे अधिक कब्जे लहर गिर्द इलाके में हुए। यहां गाटा संख्या 170, 568, 668 आदि नगर निगम का बताया जा रहा है, लेकिन मौके पर दूसरे लोगों का कब्जा है। यहां करीब चार एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है। खालसा स्कूल के पास सिद्धबाबा पहाड़िया के आसपास करीब 15 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। पंचवटी कॉलोनी के पास गाटा संख्या 816 में भी नगर निगम की काफी जमीन है, जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।
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इसी तरह लक्ष्मी ताल के पास स्थित पहाड़िया पर भी सार्वजनिक स्थान पर दुकानें बना ली गईं। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक करीब 71 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा है। इन पर प्लाटिंग तक हो चुकी है।
00
पार्षद भी नहीं रहे पीछे
नगर निगम की जमीन पर कुछ पार्षदों ने भी कब्जे जमा रखे हैं। इनके नाम देखकर निगम प्रशासन खामोशी की चादर ओढ़ लेता है। निगम सूत्रों का कहना है कि जमीन कब्जाने के मामले में सत्तारूढ़ दल समेत विपक्षी पार्षद भी पीछे नहीं हैं।
लगवाए जाने थे तार के बाड़
निगम संपत्तियों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए उनको तार से घिरवाने एवं नामपट्टी लगवाने का प्रस्ताव निगम सदन ने कई बार पारित किया। लेकिन, अब तक सभी संपत्तियों को तार के बाड़े से नहीं घेरा जा सका है। कुछ जगहों पर नामपट्टी लगाकर छोड़ दिया गया है। इस नाम पट्टी को भी कब्जा करने वालों ने तोड़ दिया है।
सैकड़ों की संख्या में शिकायतें
नगर निगम में गंदगी के बाद दूसरी सबसे अधिक शिकायतें अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण की हैं। निगम के हेल्प डेस्क पर हर महीने पचास से अधिक शिकायतें पहुंचती हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर भी इससे संबंधित शिकायतें आती हैं, लेकिन समय पर निस्तारित नहीं होतीं।
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नगर निगम ने नियमित अभियान चलाकर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। आगे भी यह अभियान चलेगा। अतिक्रमण के जो भी स्थान चिह्नित हैं, उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
सत्य प्रकाश, नगर आयुक्त
इनसेट
सड़कों पर अतिक्रमण से लग रहा जाम
सड़कों पर अतिक्रमण से अक्सर जाम लग रहा है। सुभाषगंज, मानिक चौक, सीपरी बाजार, सदर बाजार समेत तकरीबन प्रत्येक व्यावसायिक इलाकों में सड़कों पर अतिक्रमण है। इससे रास्ता संकरा हो गया है। सदर बाजार इलाके में फुटपाथ पर भी कब्जा है।
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7 फरवरी 2002 को नगरपालिका में 15 गांव जुड़ने के बाद उनकी जमीन नगर निगम के खाते में आ गई। उसके स्वामित्व में ग्राम समाज समेत सीलिंग की सरप्लस जमीन भी मर्ज हो गई, लेकिन अभी तक इनकी पैमाइश नहीं कराई गई। निगम अफसर इस जमीन को भुलाए बैठे रहे। इसका फायदा उठाते हुए रसूखदारों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया। सबसे अधिक गरियागांव, बिजौली और करारी में कब्जे हैं। कोछाभांवर, गरिया गांव समेत अलग-अलग जगहों पर 44 हजार स्क्वॉयर फीट भूमि पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों में 20-22 एकड़ भूमि पर कब्जे एवं अतिक्रमण चिह्नित हैं। यही हाल महानगर के भीतरी इलाकों का है।
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शहर में सबसे अधिक कब्जे लहर गिर्द इलाके में हुए। यहां गाटा संख्या 170, 568, 668 आदि नगर निगम का बताया जा रहा है, लेकिन मौके पर दूसरे लोगों का कब्जा है। यहां करीब चार एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है। खालसा स्कूल के पास सिद्धबाबा पहाड़िया के आसपास करीब 15 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। पंचवटी कॉलोनी के पास गाटा संख्या 816 में भी नगर निगम की काफी जमीन है, जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।
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इसी तरह लक्ष्मी ताल के पास स्थित पहाड़िया पर भी सार्वजनिक स्थान पर दुकानें बना ली गईं। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक करीब 71 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा है। इन पर प्लाटिंग तक हो चुकी है।
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पार्षद भी नहीं रहे पीछे
नगर निगम की जमीन पर कुछ पार्षदों ने भी कब्जे जमा रखे हैं। इनके नाम देखकर निगम प्रशासन खामोशी की चादर ओढ़ लेता है। निगम सूत्रों का कहना है कि जमीन कब्जाने के मामले में सत्तारूढ़ दल समेत विपक्षी पार्षद भी पीछे नहीं हैं।
लगवाए जाने थे तार के बाड़
निगम संपत्तियों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए उनको तार से घिरवाने एवं नामपट्टी लगवाने का प्रस्ताव निगम सदन ने कई बार पारित किया। लेकिन, अब तक सभी संपत्तियों को तार के बाड़े से नहीं घेरा जा सका है। कुछ जगहों पर नामपट्टी लगाकर छोड़ दिया गया है। इस नाम पट्टी को भी कब्जा करने वालों ने तोड़ दिया है।
सैकड़ों की संख्या में शिकायतें
नगर निगम में गंदगी के बाद दूसरी सबसे अधिक शिकायतें अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण की हैं। निगम के हेल्प डेस्क पर हर महीने पचास से अधिक शिकायतें पहुंचती हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर भी इससे संबंधित शिकायतें आती हैं, लेकिन समय पर निस्तारित नहीं होतीं।
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नगर निगम ने नियमित अभियान चलाकर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। आगे भी यह अभियान चलेगा। अतिक्रमण के जो भी स्थान चिह्नित हैं, उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
सत्य प्रकाश, नगर आयुक्त
इनसेट
सड़कों पर अतिक्रमण से लग रहा जाम
सड़कों पर अतिक्रमण से अक्सर जाम लग रहा है। सुभाषगंज, मानिक चौक, सीपरी बाजार, सदर बाजार समेत तकरीबन प्रत्येक व्यावसायिक इलाकों में सड़कों पर अतिक्रमण है। इससे रास्ता संकरा हो गया है। सदर बाजार इलाके में फुटपाथ पर भी कब्जा है।