फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   The martyrs of the Thona-Luhari firing incident have been forgotten.

Jhansi News: बिसरा दिया थोना लुहारी गोलीकांड के शहीदों को

Fri, 14 Aug 2026 02:08 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:08 AM IST
विज्ञापन
The martyrs of the Thona-Luhari firing incident have been forgotten.
--- जरा याद करो कुर्बानी का लोगो लगाएं---
विज्ञापन

मनोज कुमार


लुहारी। झांसी का थोना लुहारी गांव स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और बलिदान का गवाह रहा है। आठ फरवरी 1939 को यहां अंग्रेजी शासन के खिलाफ तिरंगा फहराने निकले निहत्थे सत्याग्रहियों पर अंग्रेजी हुकूमत ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी। इसमें कई सत्याग्रही शहीद हुए थे, जबकि अनेक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ग्रामीणों की मांग है कि गोलीकांड स्थल पर शहीद स्थल बनाया जाए और शहीदों की स्मृति में थोना लुहारी गोलीकांड शहीद स्मृति द्वार का निर्माण कराया जाए।
अंग्रेजों की ओर से बर्बरता से चलाई गईं गोलियों से सत्याग्रही दीवान सिंह लुहारी, जवार कोरी, दम्मू लाल, गोपाल दास, मुन्नालाल, भगवान दास यादव, बेनी प्रसाद गुप्ता सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ग्रामीणों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति इतनी गंभीर थी कि वे जीवनभर चल नहीं सके। भगवान दास यादव के सिर में गोली लगने से उनकी खोपड़ी तक अलग हो गई थी। स्वतंत्रता के इस आंदोलन से जुड़े लोगों के संघर्ष और साहस की कहानी आज भी गांव में सुनाई जाती है। (संवाद)
विज्ञापन

0000
क्रांतिकारियों के अज्ञातवास का गवाह रहा गांव
क्रांतिकारियों के अज्ञातवास का भी गांव गवाह रहा है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र सिंह बताते हैं कि आजादी की लड़ाई में पुरुषों के साथ महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह सहित कई क्रांतिकारी अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में रहे थे। यहां स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कई रणनीतियां भी बनाई गईं। ग्रामीण महिलाओं ने क्रांतिकारियों तक भोजन और जरूरत का सामान पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजादी की लड़ाई में थोना लुहारी और आसपास के गांवों के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी क्रांतिकारियों की मदद की।
विज्ञापन
विज्ञापन

0000
आजादी की दीवानगी से नाम हो गया दीवान सिंह
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दीवान सिंह लुहारी के पुत्र इंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनके पिता का वास्तविक नाम सरदार सिंह था। आजादी के आंदोलन में तन-मन-धन से समर्पित होने के कारण लोग उन्हें आजादी का दीवाना कहा जाने लगा था, जिससे उनका नाम दीवान सिंह पड़ गया। इंद्रपाल सिंह ने बताया कि गोलीकांड के दिन सत्याग्रही अंग्रेजी दफ्तरों से अंग्रेजी हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा फहरा रहे थे। तभी लाठीचार्ज के बाद गोली चला दी गई। गोली लगने के बाद अंग्रेज दीवान सिंह को मरा हुआ समझकर छोड़ गए थे। साथियों ने उन्हें मऊरानीपुर अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के बाद उन्हें चरखारी जेल भेज दिया गया। जेल में उन्होंने बहुत यातनाएं दी गईं थीं। ग्रामीणों को मलाल है कि जिस धरती पर सत्याग्रहियों का खून बहा, वहां आज तक शहीद स्मारक नहीं बन सका है। इसके अलावा थोना लुहारी गोलीकांड शहीद स्मृति द्वार का निर्माण भी कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद रख सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed