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टिकट बुकिंग केंद्र पाने को नहीं दिखी रुचि
झांसी / ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2015 12:25 AM IST
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इस बार रेल मंडल के अलग-अलग 150 स्थानों के लिए अनारक्षित टिकट बुकिंग सेवा केंद्र (जेटीबीएस) खोलने के लिए आवेदन मांगे गए थे। मगर 43 स्थानों के लिए ही लोगों ने आवेदन करने में रुचि दिखाई। इससे रेलवे की स्टेशन के बाहर प्राइवेट स्थानों पर काउंटर खोलने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
पिछले माह उत्तर मध्य रेलवे के झांसी रेल मंडल के विभिन्न नगरों में यात्रियों की सुविधा के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा के अंतर्गत आवेदन मांगे गए थे। इस बार 29 स्टेशनों के 150 स्थानों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इनमें झांसी में 14, ग्वालियर में 18, बांदा में 12, मुरैना, चित्रकूट धाम कर्वी, महोबा, ललितपुर व उरई में नौ-नौ तथा अतर्रा व बबीना में सात-सात, दतिया व डबरा में छह-छह, खजुराहो व मानिकपुर में पांच-पांच, एट, भिंड, बिरलानगर, भरूआसुमेरपुर, बेलाताल, डभौरा, घाटमपुर, हमीरपुर, कुलपहाड़ व कालपी में दो-दो तथा मऊरानीपुर, पुखरायां, रागौल, शंकरगढ़ व तालबेहट में एक-एक स्थान के लिए आवेदन मांगे गए थे। अंतिम तिथि 28 जुलाई तक मात्र 43 आवेदन ही जमा किए गए। जांच के उपरांत 43 आवेदनों में सबसे अधिक दस लोगों ने झांसी व आठ ने ग्वालियर के लिए आवेदन जमा किए।
मालूम हो कि रेल प्रशासन इससे पूर्व भी कई बार जेटीबीएस के लिए आवेदन मांग चुका है। मगर अब तक ग्वालियर, ललितपुर, बांदा, महोबा, हरपालपुर, चित्रकूट, मानिकपुर, उरई, डबरा, झांसी में कुल 56 स्थानों पर जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक नियुक्त किए जा सके हैं। इसमें झांसी में मात्र पांच ही स्थानों पर जेटीबीएस खुल सके हैं।
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यह है योजना
रेलवे ने वर्ष 2009 में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन से दूर शहर व कस्बों में अनारक्षित टिकट उपलब्ध कराने के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। इस सेवा के लिए रेलवे से लाइसेंस लेने के बाद संबंधित ठेकेदार अपना ढांचा तैयार कर काम करता है। ठेकेदार को काउंटर खोलने की जगह, उपकरण, बिजली, इंटरनेट का कनेक्शन, कर्मचारी आदि सुविधाएं स्वयं जुटाने होते हैं। रेलवे प्रत्येक यात्री पर एक रुपये कमीशन देता है।
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पिछले माह उत्तर मध्य रेलवे के झांसी रेल मंडल के विभिन्न नगरों में यात्रियों की सुविधा के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा के अंतर्गत आवेदन मांगे गए थे। इस बार 29 स्टेशनों के 150 स्थानों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इनमें झांसी में 14, ग्वालियर में 18, बांदा में 12, मुरैना, चित्रकूट धाम कर्वी, महोबा, ललितपुर व उरई में नौ-नौ तथा अतर्रा व बबीना में सात-सात, दतिया व डबरा में छह-छह, खजुराहो व मानिकपुर में पांच-पांच, एट, भिंड, बिरलानगर, भरूआसुमेरपुर, बेलाताल, डभौरा, घाटमपुर, हमीरपुर, कुलपहाड़ व कालपी में दो-दो तथा मऊरानीपुर, पुखरायां, रागौल, शंकरगढ़ व तालबेहट में एक-एक स्थान के लिए आवेदन मांगे गए थे। अंतिम तिथि 28 जुलाई तक मात्र 43 आवेदन ही जमा किए गए। जांच के उपरांत 43 आवेदनों में सबसे अधिक दस लोगों ने झांसी व आठ ने ग्वालियर के लिए आवेदन जमा किए।
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मालूम हो कि रेल प्रशासन इससे पूर्व भी कई बार जेटीबीएस के लिए आवेदन मांग चुका है। मगर अब तक ग्वालियर, ललितपुर, बांदा, महोबा, हरपालपुर, चित्रकूट, मानिकपुर, उरई, डबरा, झांसी में कुल 56 स्थानों पर जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक नियुक्त किए जा सके हैं। इसमें झांसी में मात्र पांच ही स्थानों पर जेटीबीएस खुल सके हैं।
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यह है योजना
रेलवे ने वर्ष 2009 में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन से दूर शहर व कस्बों में अनारक्षित टिकट उपलब्ध कराने के लिए जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। इस सेवा के लिए रेलवे से लाइसेंस लेने के बाद संबंधित ठेकेदार अपना ढांचा तैयार कर काम करता है। ठेकेदार को काउंटर खोलने की जगह, उपकरण, बिजली, इंटरनेट का कनेक्शन, कर्मचारी आदि सुविधाएं स्वयं जुटाने होते हैं। रेलवे प्रत्येक यात्री पर एक रुपये कमीशन देता है।