{"_id":"6851b9445d7831cce5093926","slug":"the-innocent-kind-one-is-telling-his-grandparents-and-uncle-mom-and-dad-are-missing-go-and-find-them-jhansi-news-c-131-1-sjhs1012-137345-2025-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: दादा-दादी और चाचा से बोल रहा मासूम मेहरबान... नहीं मिल रहे मम्मी-पापा, उन्हें लाओ खोजकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: दादा-दादी और चाचा से बोल रहा मासूम मेहरबान... नहीं मिल रहे मम्मी-पापा, उन्हें लाओ खोजकर
विज्ञापन
- 15 जून को हरियाणा के गुरुग्राम में मजदूरी के दौरान गिरी दीवार से हो गई थी पति-पत्नी की मौत
- छह साल के मेहरबान और नौ साल के नीतेश के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कोतवाली महरौनी के ग्राम समोंगर में मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। पति-पत्नी की मौत से पूरे गांव में मातम छाया रहा। वहीं माता-पिता की मौत से छह साल के मेहरबान और नौ साल के नीतेश का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। नीतेश को तो दादा-दादी और चाचा ने समझा दिया। लेकिन मासूम मेहरबान के सवालों के जवाब उनके पास नहीं है। वह अपने दादा-दादी और चाचा से रोते हुए पूछ रहा..मेरे मम्मी-पापा नहीं मिल रहे, उनको ढूंढकर बुलाओ।
महरौनी थाना क्षेत्र के ग्राम समोंगर निवासी प्रसन्न कुशवाहा और उसकी पत्नी चांदनी करीब पंद्रह दिन पूर्व हरियाणा के गुरुग्राम में मजदूरी करने के लिए गए थे। यहां काम करते समय दीवार गिरने से दोनों की मौत हो गई। दोनों माता-पिता के एक साथ दुनिया से चले जाने की बात को बड़ा पुत्र नीतेश तो समझ गया। लेकिन छोटे पुत्र मेहरबान को यह बात समझ नहीं आ रही है। वह अपने मम्मी पापा के दिखाई न देने पर उन्हें खोजता है। अपने दादा लक्ष्मण कुशवाहा और दादी से आकर पूछता है कि मम्मी-पापा कहां हैं। कोई जवाब नहीं मिलता तो वह घर के कमरों में खोजता है। लेकिन जब कहीं वह दिखाई नहीं देते तो रोेने लगता है। सोमवार रात को मेहरबान को मम्मी-पापा की फिर याद आई तो वह उनके पास जाने की जिद करने लगा। परिजनों ने किसी प्रकार दिलासा देकर चुप कराया और सुला दिया था। मंगलवार की सुबह से ही मेहरबान फिर से मम्मी-पापा के पास जाने की जिद पर अड़ गया और रोने लगा। चाचा संतोष ने उसे गोदी में उठाया और पास की दुकान पर ले गया। यहां टॉफी बिस्कुट दिलाया तो वह चुप हो गया। लेकिन जब घर के बाहर मम्मी-पापा की अर्थी सजाई जाने लगी और परिजन प्रसन्न और चांदनी का अंतिम बार चेहरे देख रहे थे तो मेहरबान फिर से रोते हुए चिल्लाने लगा कि उसके मम्मी-पापा ऐसे क्यों लेटे हैं वह उठ क्यों नहीं रहे हैं। मासूम मेहरबान के इस सवाल का किसी के पास कोई जवाब नहीं, सिवाए काट खाने वाले घर को देखने और उस घड़ी को कोसने की जब उनका पुत्र व बहू मजदूरी को गुरुग्राम गए थे। वहीं, बड़ा पुत्र नीतेश गुमशुम बना हुआ है किसी से कोई बातचीत नहीं की। घर के बाहर की जा रही अंतिम संस्कार से पूर्व की क्रिया को एकटक अकेला सिर्फ निहार रहा था। उसको देखकर ऐसा लग रहा था मानों वह भगवान से पूछ रहा हो कि क्या कसूर था कि उनके मम्मी-पापा को अपने पास बुला लिया।
-- --
पति-पत्नी की एक साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव
प्रसन्न और चांदनी की मौत होने और उनके दो छोटे-छोटे बच्चों के अनाथ हो जाने पर पूरा गांव गमगीन रहा। मंगलवार की दोपहर को जब घर से एक साथ पति-पत्नी की अर्थी उठी तो पूरा गांव रो पड़ा। कभी वह लोग पति-पत्नी की अर्थी को देखते हैं तो कभी उनके अनाथ हुए दोनों बच्चों को।
विज्ञापन
विज्ञापन
- छह साल के मेहरबान और नौ साल के नीतेश के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कोतवाली महरौनी के ग्राम समोंगर में मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। पति-पत्नी की मौत से पूरे गांव में मातम छाया रहा। वहीं माता-पिता की मौत से छह साल के मेहरबान और नौ साल के नीतेश का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। नीतेश को तो दादा-दादी और चाचा ने समझा दिया। लेकिन मासूम मेहरबान के सवालों के जवाब उनके पास नहीं है। वह अपने दादा-दादी और चाचा से रोते हुए पूछ रहा..मेरे मम्मी-पापा नहीं मिल रहे, उनको ढूंढकर बुलाओ।
महरौनी थाना क्षेत्र के ग्राम समोंगर निवासी प्रसन्न कुशवाहा और उसकी पत्नी चांदनी करीब पंद्रह दिन पूर्व हरियाणा के गुरुग्राम में मजदूरी करने के लिए गए थे। यहां काम करते समय दीवार गिरने से दोनों की मौत हो गई। दोनों माता-पिता के एक साथ दुनिया से चले जाने की बात को बड़ा पुत्र नीतेश तो समझ गया। लेकिन छोटे पुत्र मेहरबान को यह बात समझ नहीं आ रही है। वह अपने मम्मी पापा के दिखाई न देने पर उन्हें खोजता है। अपने दादा लक्ष्मण कुशवाहा और दादी से आकर पूछता है कि मम्मी-पापा कहां हैं। कोई जवाब नहीं मिलता तो वह घर के कमरों में खोजता है। लेकिन जब कहीं वह दिखाई नहीं देते तो रोेने लगता है। सोमवार रात को मेहरबान को मम्मी-पापा की फिर याद आई तो वह उनके पास जाने की जिद करने लगा। परिजनों ने किसी प्रकार दिलासा देकर चुप कराया और सुला दिया था। मंगलवार की सुबह से ही मेहरबान फिर से मम्मी-पापा के पास जाने की जिद पर अड़ गया और रोने लगा। चाचा संतोष ने उसे गोदी में उठाया और पास की दुकान पर ले गया। यहां टॉफी बिस्कुट दिलाया तो वह चुप हो गया। लेकिन जब घर के बाहर मम्मी-पापा की अर्थी सजाई जाने लगी और परिजन प्रसन्न और चांदनी का अंतिम बार चेहरे देख रहे थे तो मेहरबान फिर से रोते हुए चिल्लाने लगा कि उसके मम्मी-पापा ऐसे क्यों लेटे हैं वह उठ क्यों नहीं रहे हैं। मासूम मेहरबान के इस सवाल का किसी के पास कोई जवाब नहीं, सिवाए काट खाने वाले घर को देखने और उस घड़ी को कोसने की जब उनका पुत्र व बहू मजदूरी को गुरुग्राम गए थे। वहीं, बड़ा पुत्र नीतेश गुमशुम बना हुआ है किसी से कोई बातचीत नहीं की। घर के बाहर की जा रही अंतिम संस्कार से पूर्व की क्रिया को एकटक अकेला सिर्फ निहार रहा था। उसको देखकर ऐसा लग रहा था मानों वह भगवान से पूछ रहा हो कि क्या कसूर था कि उनके मम्मी-पापा को अपने पास बुला लिया।
विज्ञापन
पति-पत्नी की एक साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव
प्रसन्न और चांदनी की मौत होने और उनके दो छोटे-छोटे बच्चों के अनाथ हो जाने पर पूरा गांव गमगीन रहा। मंगलवार की दोपहर को जब घर से एक साथ पति-पत्नी की अर्थी उठी तो पूरा गांव रो पड़ा। कभी वह लोग पति-पत्नी की अर्थी को देखते हैं तो कभी उनके अनाथ हुए दोनों बच्चों को।
विज्ञापन