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ठेंगे पर शासन और सदन का आदेश
ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2015 01:32 AM IST
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झांसी। नगर निगम प्रशासन अपने नियमों के आधार पर काम कर रहा है। वह न शासन के आदेशों को गंभीरता से ले रहा है और न ही सदन के आदेशों का पालन कर रहा है। स्थिति यह है कि नगर निगम प्रशासन ने कार्यालय और परिसंपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दे रखी है।
12 जुलाई 2012 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि सार्वजनिक उद्यमों, स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत), शैक्षणिक संस्थाओं, शासकीय तथा अर्ध शासकीय संस्थाओं में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती न की जाए।
उनके स्थान पर पीआरडी के स्वयं सेवकों की सेवाएं ली जाएं। वहीं, अगस्त 2014 में नगर निगम के सदन की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि निगम कार्यालय एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था में निजी गार्ड्स की जगह सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों जैसे पीआरडी जवान, होमगार्ड्स एवं भूतपूर्व सैनिकों को लगाया जाए।
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दोनों ही महत्वपूर्ण निर्देशों के उलट नगर निगम एवं यहां की परिसंपत्तियों की सुरक्षा का जिम्मा निजी एजेंसी के कंधों पर है। स्थिति यह है कि तय स्थानों पर सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं रहते हैं। पार्कों में भी वह घूमते नजर नहीं आते हैं, इससे पार्षदों में नाराजगी है।
पार्षद सीमा वर्मा ने महापौर को पत्र देकर सदन में पास हुए प्रस्ताव का पालन कराने की मांग करते हुए निजी सुरक्षा गार्डों के स्थान पर सरकारी एजेंसियों के सुरक्षा कर्मी लगाने की मांग की है। उनकी मांग पर महापौर किरन राजू बुकसेलर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर आदेश की अवहेलना पर नाराजगी जताई है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई तो वह शासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराएंगी।
नगर निगम की सुरक्षा में पहले पीआरडी के जवान तैनात थे, लेकिन उनकी फीस अधिक होने के कारण हटाना पड़ा। वर्तमान में जो सुरक्षा एजेंसी यहां काम कर रही हैं, वह पीआरडी की अपेक्षा सस्ती पड़ रही हैं। सुरक्षा एजेंसी के लिए नियमानुसार टेंडर निकाल कर काम दिया जाता है।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
नगर निगम सरकारी संस्था है और पीआरडी भी सरकार का ही अंग है। नगर निगम व अन्य सरकारी संस्थाओं को चाहिए कि वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पीआरडी जवानों को प्राथमिकता दें, जिससे सरकार की लोगों को नियमित रोजगार देने की मंशा पूरी हो सके।
- धर्मेंद्र कुमार, कमांडेंट, पीआरडी, झांसी।
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12 जुलाई 2012 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि सार्वजनिक उद्यमों, स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत), शैक्षणिक संस्थाओं, शासकीय तथा अर्ध शासकीय संस्थाओं में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती न की जाए।
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उनके स्थान पर पीआरडी के स्वयं सेवकों की सेवाएं ली जाएं। वहीं, अगस्त 2014 में नगर निगम के सदन की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि निगम कार्यालय एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था में निजी गार्ड्स की जगह सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों जैसे पीआरडी जवान, होमगार्ड्स एवं भूतपूर्व सैनिकों को लगाया जाए।
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दोनों ही महत्वपूर्ण निर्देशों के उलट नगर निगम एवं यहां की परिसंपत्तियों की सुरक्षा का जिम्मा निजी एजेंसी के कंधों पर है। स्थिति यह है कि तय स्थानों पर सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं रहते हैं। पार्कों में भी वह घूमते नजर नहीं आते हैं, इससे पार्षदों में नाराजगी है।
पार्षद सीमा वर्मा ने महापौर को पत्र देकर सदन में पास हुए प्रस्ताव का पालन कराने की मांग करते हुए निजी सुरक्षा गार्डों के स्थान पर सरकारी एजेंसियों के सुरक्षा कर्मी लगाने की मांग की है। उनकी मांग पर महापौर किरन राजू बुकसेलर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर आदेश की अवहेलना पर नाराजगी जताई है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई तो वह शासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराएंगी।
नगर निगम की सुरक्षा में पहले पीआरडी के जवान तैनात थे, लेकिन उनकी फीस अधिक होने के कारण हटाना पड़ा। वर्तमान में जो सुरक्षा एजेंसी यहां काम कर रही हैं, वह पीआरडी की अपेक्षा सस्ती पड़ रही हैं। सुरक्षा एजेंसी के लिए नियमानुसार टेंडर निकाल कर काम दिया जाता है।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
नगर निगम सरकारी संस्था है और पीआरडी भी सरकार का ही अंग है। नगर निगम व अन्य सरकारी संस्थाओं को चाहिए कि वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पीआरडी जवानों को प्राथमिकता दें, जिससे सरकार की लोगों को नियमित रोजगार देने की मंशा पूरी हो सके।
- धर्मेंद्र कुमार, कमांडेंट, पीआरडी, झांसी।