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शहर की दरकार ‘नेकी की दीवार’
Jhansi
Updated Tue, 08 Nov 2016 01:10 AM IST
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शहर की दरकार ‘नेकी की दीवार’
- फोटो : Amar Ujala
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झांसी। ‘नेकी की दीवार’ यानी ऐसी जगह जहां साधन संपन्न लोग अपनी गैर जरूरत की चीजों को छोड़ जाएं और जरूरतमंद बेरोकटोक इसे वहां से ले जाएं। देश में कई जगहों पर समाजसेवा की मुहिम शुरू हो चुकी है, अब अपने शहर में भी इसकी दरकार है, ताकि जरूरत की चीजें आसानी से सही हाथों में पहुंच सकें। इसके लिए समाजसेवियों व सामाजिक संस्थाओं को आगे आना होगा।
सर्दी ने दस्तक दे दी है। साधन संपन्न लोगों के लिए यह मौसम सुहाना होता है, लेकिन जिनके के पास न सिर छुपाने की जगह है और न ही तन ढकने को कपड़े, उन पर जाड़े का मौसम भारी गुजरता है। हालांकि, ऐसे लोगों की मदद का जज्बा हर दिल में होता है, लेकिन उन्हें इसका सही माध्यम नहीं मिल पाता है, जिससे लोग चाहकर भी गरीबों की मदद वंचित रह जाते हैं। नेकी की दीवार इसी कमी को पूरा करती है। शहर के किसी भी स्थान पर यह बनाई जा सकती है। इसके लिए ज्यादा कुछ करना भी नहीं होता है। एक सपाट दीवार पर वॉल पेटिंंग कराकर उस पर कुछ हेंगर या तार टांगने होते हैं। इन पर लोग दान में दिए जाने वाले कपड़े टांग कर जा सकते हैं। इसके अलावा नेकी की दीवार के पास खाद्य सामग्री, बर्तन, खिलौने या दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं को भी लोग छोड़कर जा सकते हैं और जरूरतमंद अपनी जरूरत के हिसाब से यह चीजें वहां से ले जा सकते हैं।
नेकी की दीवार मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में बन चुकी हैं और यह अपने उद्देश्य को पूरा भी कर रही हैं। समाजसेवा की यह अनूठी पहल लोगों को खूब रास आ रही है। जाड़े का मौसम सिर पर है, ऐसे में अब अपने शहर में भी इसकी दरकार है, ताकि लोग अपने पुराने गर्म कपड़े, कंबल आदि दान कर सकें और जरूरतमंद समय रहते यहां से अपनी जरूरत की चीजें ले जा सकें।
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ईरान से हुई थी शुरुआत
झांसी। नेकी की दीवार की शुरुआत ईरान से हुई थी। यहां एक व्यक्ति ने गरीबों को ठंड से बचाने के लिए इस प्रकार की मुहिम शुरू की थी। ईरान के लोगों को समाजसेवा का यह प्रयास बेहद पसंद आया और वहां जगह - जगह इसकी शुरुआत हो गई। दुनिया के विभिन्न मुल्कों से होती हुई नेकी की दीवार अब भारत में भी वंचितों का सहारा बन गई हैं।
झांसी वालों से अपील
‘नेकी की दीवार’ जरूरतमंदों की मदद का बेहद सुगम जरिया है। समाजसेवा की इस मुहिम में उन लोगों को आगे आना होगा, जो जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं। तो फिर देर किस बात की, हो जाइये तैयार...
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सर्दी ने दस्तक दे दी है। साधन संपन्न लोगों के लिए यह मौसम सुहाना होता है, लेकिन जिनके के पास न सिर छुपाने की जगह है और न ही तन ढकने को कपड़े, उन पर जाड़े का मौसम भारी गुजरता है। हालांकि, ऐसे लोगों की मदद का जज्बा हर दिल में होता है, लेकिन उन्हें इसका सही माध्यम नहीं मिल पाता है, जिससे लोग चाहकर भी गरीबों की मदद वंचित रह जाते हैं। नेकी की दीवार इसी कमी को पूरा करती है। शहर के किसी भी स्थान पर यह बनाई जा सकती है। इसके लिए ज्यादा कुछ करना भी नहीं होता है। एक सपाट दीवार पर वॉल पेटिंंग कराकर उस पर कुछ हेंगर या तार टांगने होते हैं। इन पर लोग दान में दिए जाने वाले कपड़े टांग कर जा सकते हैं। इसके अलावा नेकी की दीवार के पास खाद्य सामग्री, बर्तन, खिलौने या दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं को भी लोग छोड़कर जा सकते हैं और जरूरतमंद अपनी जरूरत के हिसाब से यह चीजें वहां से ले जा सकते हैं।
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नेकी की दीवार मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में बन चुकी हैं और यह अपने उद्देश्य को पूरा भी कर रही हैं। समाजसेवा की यह अनूठी पहल लोगों को खूब रास आ रही है। जाड़े का मौसम सिर पर है, ऐसे में अब अपने शहर में भी इसकी दरकार है, ताकि लोग अपने पुराने गर्म कपड़े, कंबल आदि दान कर सकें और जरूरतमंद समय रहते यहां से अपनी जरूरत की चीजें ले जा सकें।
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ईरान से हुई थी शुरुआत
झांसी। नेकी की दीवार की शुरुआत ईरान से हुई थी। यहां एक व्यक्ति ने गरीबों को ठंड से बचाने के लिए इस प्रकार की मुहिम शुरू की थी। ईरान के लोगों को समाजसेवा का यह प्रयास बेहद पसंद आया और वहां जगह - जगह इसकी शुरुआत हो गई। दुनिया के विभिन्न मुल्कों से होती हुई नेकी की दीवार अब भारत में भी वंचितों का सहारा बन गई हैं।
झांसी वालों से अपील
‘नेकी की दीवार’ जरूरतमंदों की मदद का बेहद सुगम जरिया है। समाजसेवा की इस मुहिम में उन लोगों को आगे आना होगा, जो जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं। तो फिर देर किस बात की, हो जाइये तैयार...