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मंडल में तैनात नहीं मनरेगा लोकपाल
झांसी/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:49 AM IST
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झांसी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत झांसी, ललितपुर व जालौन जिले में लोकपाल की तैनाती नहीं की गई है। इसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। योजना में गड़बड़ियों पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा है। प्रदेश के सिर्फ 41 जिलों के लिए 11 लोकपाल नियुक्त हैं।
मनरेगा में पंजीकृत जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार देने की व्यवस्था है, लेकिन सूखा से जूझ रहे बुंदेलखंड में 150 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है। जिले में 1.73 लाख लोगों के जॉब कार्ड बने हुए हैं। ललितपुर जिले में लगभग 1.68 लाख जॉब कार्ड धारक हैं। लगभग इतने ही जालौन जिले में हैं।
मनरेगा में लोकपाल की नियुक्ति का प्रावधान है, जो मनरेगा से संबधित शिकायतों को सुनता और उनका निस्तारण करता है। लेकिन, मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन जिले में लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे जॉब कार्ड धारकों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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स्थिति यह है कि जॉब कार्ड धारकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अफसरों और नेताओं के पास गणेश परिक्रमा करनी पड़ रही है। साथ ही तमाम गड़बड़ियां मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रही हैं, जिनका खुलासा आए दिन अफसरों के निरीक्षण में हो रहा है।
मंडल के तीनों जिलों में लोकपाल की तैनाती अभी तक नहीं हुई है। पूर्व में बांदा के लोकपाल पूरे बुंदेलखंड का काम देखते थे, लेकिन अब मंडल के लिए कोई लोकपाल तैनात नहीं है। लोकपाल की तैनाती शासन स्तर से होती है।
- विकास मिश्रा
उप आयुक्त, मनरेगा, झांसी।
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मनरेगा में पंजीकृत जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार देने की व्यवस्था है, लेकिन सूखा से जूझ रहे बुंदेलखंड में 150 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है। जिले में 1.73 लाख लोगों के जॉब कार्ड बने हुए हैं। ललितपुर जिले में लगभग 1.68 लाख जॉब कार्ड धारक हैं। लगभग इतने ही जालौन जिले में हैं।
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मनरेगा में लोकपाल की नियुक्ति का प्रावधान है, जो मनरेगा से संबधित शिकायतों को सुनता और उनका निस्तारण करता है। लेकिन, मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन जिले में लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे जॉब कार्ड धारकों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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स्थिति यह है कि जॉब कार्ड धारकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अफसरों और नेताओं के पास गणेश परिक्रमा करनी पड़ रही है। साथ ही तमाम गड़बड़ियां मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रही हैं, जिनका खुलासा आए दिन अफसरों के निरीक्षण में हो रहा है।
मंडल के तीनों जिलों में लोकपाल की तैनाती अभी तक नहीं हुई है। पूर्व में बांदा के लोकपाल पूरे बुंदेलखंड का काम देखते थे, लेकिन अब मंडल के लिए कोई लोकपाल तैनात नहीं है। लोकपाल की तैनाती शासन स्तर से होती है।
- विकास मिश्रा
उप आयुक्त, मनरेगा, झांसी।