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सेवा का जुनून ऐसा...शहीदों के परिजन और फौजियों से नहीं लेते किराए का पैसा

Tue, 07 Jun 2022 12:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 12:06 AM IST
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Such is the passion of service...don't take rent money from the families of martyrs and soldiers
झांसी। जिंदगी में जरा सी मुश्किलें आ पड़ें तो जिस उम्र में युवा डिप्रेशन में डूब कर अपना सब कुछ बर्बाद कर लेते हैं, उस उम्र में झांसी शहर के युवा राहुल सिंह का जज्बा एक मिसाल है। यूं तो अपना घर-परिवार चलाने के लिए राहुल ऑटो चलाते हैं लेकिन तंगहाल जिंदगी में भी दूसरों का सहारा कैसे बन सकते हैं ये कोई इनसे सीखे। राहुल अपनी ऑटो में जहां शहीदों के परिजनों, फौजियों और तमाम असहाय बुजुर्गों को फ्री सेवा दे रहे हैं। वहीं कोरोना काल में नौकरी छिन जाने से वह दिन भर ऑटो चलाने के बाद रातों को जाग-जागकर पढ़ाई करते हैं। राहुल शिक्षक बनना चाहते हैं।
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राहुल सिंह शहर में मेडिकल के पास स्थित गुमनावारा इलाके में एक कमरे वाले छोटे से किराए के मकान में रहते हैं। इस घर में उनकी पत्नी सुनीता, बेटा मंयक (7) और बेटी छवि (5) उनके साथ ही रहते हैं। इनके माता-पिता और भाई-बहन अन्य जगह रहते हैं। परिवार में सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। राहुल बताते हैं कि उन्होंने भी बीए के बाद बीएड पास किया है। दूसरे युवाओं की तरह वह भी अपना कॅरियर बनाने के लिए पूरी मेहनत से पढ़ाई में लगे थे। साथ ही घर-गृहस्थी चलाने के लिए घर-घर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। लेकिन कोरोना काल ने उनकी जीविका छीन ली। ट्यूशन मिलना बंद हो गए। पैसे की तंगी के कारण उनका पढ़ाई पूरी कर शिक्षक बनने का सपना टूट गया। घर का किराया और पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया। लेकिन कभी दूसरों के सामने हाथ नहीं फैलाया।
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राहुल बताते हैं कि संक्रमण काल तो खत्म हो गया लेकिन तमाम आर्थिक संकट अब भी उनके सामने खड़े थे। ऐसे में उन्होंने किसी तरह एक ऑटो फाइनेंस (किस्त पर) कराई और उसे चलाने लगे। बताया कि फरवरी 2022 में विधानसभा के चुनाव हुए तो उन्होंने देखा जगह-जगह नेताओं के भाषण हो रहे थे। होर्डिंग्स में तमाम तरह के वादे लिखे गए थे। इससे उनके मन में भी विचार आया कि उन्हें भी समाजसेवा के लिए कुछ करना चाहिए। लेकिन दूसरों की कोई सहायता करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। ऐसे में बेटी की बर्थडे के दिन उन्होंने एक फैसला किया और अपनी ऑटो लेकर पेंटर के पास पहुंच गए। वहां ऑटो के पीछे ‘शहीद फौजी की वीर वधू को फ्री सेवा है..।’ लिखवा दिया और तब से लगातार स्टेशन, बस अड्डा या आम सड़क पर उन्हें कोई भी ऐसी सवारी मिलती है जो किसी शहीद के परिवार से हो तो वह उसे निशुल्क सेवा देते हैं। फौजी व असहाय बुजुर्गों को भी घर तक पहुंचाते हैं।
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कोचिंग पढ़ने के लिए नहीं कर पाते हैं फीस का इंतजाम इसलिए रात में करते हैं पढ़ाई
झांसी। राहुल शिक्षक बनने के लिए टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके ऊपर पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी है। मकान की किस्त, बच्चों की फीस और घर का खर्च देने के साथ उन्हें ऑटो की किस्त भी देनी पड़ती है। इसलिए अच्छी आमदनी की आशा में सुबह ही निकल पड़ते हैं। राहुल बताते हैं कि वह टेट की कोचिंग के लिए महंगी फीस नहीं जुटा सकते हैं इसलिए रात को 9 बजे जब घर लौटते हैं तब फ्री होकर पढ़ाई करने बैठते हैं।

शहीदों के परिजन, फौजी और असहाय बुजुर्गों को देते रहेंगे सेवा
झांसी। राहुल ने बताया कि यूं तो झांसी में शहीदों की परिजनों की संख्या ज्यादा नहीं है, इसलिए वह इनके साथ-साथ फौजी भाइयों और असहाय बुजुर्गों को सेवा देते रहेंगे। शिक्षक के लिए उनका चयन हो गया तो वह गरीब परिवार के बच्चों के लिए अवश्य ही कोई अच्छा काम करेंगे।
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