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यूपी: भाई तुम पापा के पैसे बर्बाद मत करना, सुसाइड नोट में लिखा-'थैंक्यू सो मच मां', फिर फंदे पर झूली साइबर क्राइम की शिकार छात्रा
Mon, 19 Jul 2021 06:53 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 19 Jul 2021 06:53 PM IST
सार
घटना झांसी जिले के नवाबाद थाना इलाके के गुमनावारा की है। गुमनावारा के रहने वाले जगमोहन की बेटी यशस्वी (21) ने बीती रात घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके पास से सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के थाना नवाबाद इलाके में साइबर क्राइम की शिकार हुई एक छात्रा ने रविवार की रात को फांसी लगाकर जान दे दी। एक कंपनी में नौकरी लगवाने के नाम पर साइबर अपराधियों ने उसके साथ ठगी कर ली थी। तब से वो तनाव में रहने लगी थी।
इसी बीच उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। छात्रा की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गुमनावारा में रहने वाले जगमोहन पाराशर किसान हैं। इसके अलावा वे एक मेडिकल एजेंसी पर कार्य किया करते थे। उनकी बेटी यशस्वी पाराशर (21) इंटरमीडिएट पास करने के बाद से जॉब की तलाश में थी।
इसी बीच उसको एक नामचीन आयुर्वेदिक कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नाम की कंपनी में जॉब होने की जानकारी हुई। उसने ऑनलाइन आवेदन कर दिया। कंपनी ओर से उसे बताया कि उसका सिलेक्शन हो गया है।
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कंपनी की ओर से दिए जाने वाले लैपटॉप व अन्य सामग्री के एवज में उससे किस्तों में 48,500 रुपए की रकम मांगी गई, जो उसके पिता ने ऑनलाइन ट्रांसफर की। रकम पहुंचने के बाद कंपनी के प्रतिनिधियों के मोबाइल बंद जाने लगे। तब उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।
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इसी बीच उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। छात्रा की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गुमनावारा में रहने वाले जगमोहन पाराशर किसान हैं। इसके अलावा वे एक मेडिकल एजेंसी पर कार्य किया करते थे। उनकी बेटी यशस्वी पाराशर (21) इंटरमीडिएट पास करने के बाद से जॉब की तलाश में थी।
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इसी बीच उसको एक नामचीन आयुर्वेदिक कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नाम की कंपनी में जॉब होने की जानकारी हुई। उसने ऑनलाइन आवेदन कर दिया। कंपनी ओर से उसे बताया कि उसका सिलेक्शन हो गया है।
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कंपनी की ओर से दिए जाने वाले लैपटॉप व अन्य सामग्री के एवज में उससे किस्तों में 48,500 रुपए की रकम मांगी गई, जो उसके पिता ने ऑनलाइन ट्रांसफर की। रकम पहुंचने के बाद कंपनी के प्रतिनिधियों के मोबाइल बंद जाने लगे। तब उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।
इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से भी की थी, परंतु कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन, इसके बाद से यशस्वी परेशान रहने लगी थी। उसे आत्मग्लानि थी कि उसकी वजह से पिता की मेहनत की कमाई बर्बाद हो गई।
इसी मानसिक अवस्था में उसने बीती रात अपने घर के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों को इसकी जानकारी सुबह हुई। परिवार में कोहराम मच गया।
उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘पापा ये किसी को न दिखाना, हम आपकी परेशानियों और घर की कलह की जड़ हैं, जो अब नहीं रहेगी। अब आप सिगरेट छोड़ देना। भैया, मां-पापा का ख्याल रखना, वो अच्छे हैं। हम उनका सपना पूरा नहीं कर पाए, तुम ऑफिसर बनना।
पापा के पैसे बर्बाद मत करना। थैंक्यू सो मच मां, आई एम सॉरी, रियली सॉरी, आई लव यू सो मच माई फैमिली, मैं अपनी मर्जी से जान दे रही हूं।सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।
इसी मानसिक अवस्था में उसने बीती रात अपने घर के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों को इसकी जानकारी सुबह हुई। परिवार में कोहराम मच गया।
उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘पापा ये किसी को न दिखाना, हम आपकी परेशानियों और घर की कलह की जड़ हैं, जो अब नहीं रहेगी। अब आप सिगरेट छोड़ देना। भैया, मां-पापा का ख्याल रखना, वो अच्छे हैं। हम उनका सपना पूरा नहीं कर पाए, तुम ऑफिसर बनना।
पापा के पैसे बर्बाद मत करना। थैंक्यू सो मच मां, आई एम सॉरी, रियली सॉरी, आई लव यू सो मच माई फैमिली, मैं अपनी मर्जी से जान दे रही हूं।सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।